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Indore News: जेल में बंद नारायण साईं का तलाक हुआ, पत्नी जानकी को 2 करोड़ रुपए एलुमनी का आदेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 07 Apr 2026 10:23 PM IST
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सार
Indore News: फैमिली कोर्ट ने नारायण साईं और उनकी पत्नी जानकी के बीच तलाक को मंजूरी दे दी है। न्यायालय ने नारायण साईं को अपनी पत्नी को स्थायी भरण-पोषण के तौर पर 2 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया है।
नारायण साईं।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर के फैमिली कोर्ट ने नारायण साईं और उनकी पत्नी जानकी के तलाक की अर्जी को स्वीकार कर लिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में नारायण साईं को निर्देशित किया है कि वह अपनी पत्नी को स्थायी भरण-पोषण के रूप में 2 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान करें।
उल्लेखनीय है कि यह कानूनी प्रक्रिया लगभग आठ वर्षों तक चली। पीड़िता के अधिवक्ता अनुराग गोयल ने मंगलवार को बताया कि न्यायालय ने 2 अप्रैल को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है। वर्तमान में नारायण साईं दुष्कर्म के एक मामले में सूरत की जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और उसे हाल ही में 24 मार्च को इंदौर की अदालत में पेशी के लिए लाया गया था। जानकी और नारायण साईं का विवाह वर्ष 2008 में संपन्न हुआ था, किंतु वर्ष 2013 से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। पत्नी ने न्यायालय के समक्ष पति द्वारा परित्याग किए जाने और वैवाहिक संबंधों के अभाव का तर्क प्रस्तुत किया था।
जानकी ने लगाए साईं पर कई महिलाओं से संबंध के आरोप
तलाक की याचिका के दौरान जानकी ने नारायण साईं पर अन्य महिलाओं के साथ अनैतिक संबंधों के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके अतिरिक्त, याचिका में सूरत की अदालत द्वारा दुष्कर्म के प्रकरण में दी गई सजा का भी संदर्भ दिया गया था। जानकी ने अपनी आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए 5 करोड़ रुपए की स्थायी एलुमनी की मांग की थी। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों का सूक्ष्मता से परिशीलन करने के उपरांत 2 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की है।
भरण-पोषण की बकाया राशि 50 लाख तक पहुंची
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि धारा 125 सीआरपीसी के अंतर्गत पूर्व में 50 हजार रुपए प्रतिमाह का अंतरिम भरण-पोषण तय किया गया था। अधिवक्ता के अनुसार, नारायण साईं की ओर से इस राशि का नियमित भुगतान नहीं किया गया, जिसके कारण लगभग 50 लाख रुपए की राशि अब तक बकाया हो चुकी है। इस बकाया राशि की वसूली हेतु अब कानूनी प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।
उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं
विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश को आगामी दिनों में उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। इस प्रकरण में नारायण साईं की संपत्ति के भौतिक सत्यापन हेतु इंदौर कलेक्टर को भी पूर्व में निर्देश जारी किए गए थे, परंतु संपत्तियों के विवरण की पूर्ण जानकारी अभी तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की जा सकी है।
दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे
नारायण साईं को सूरत की दो बहनों द्वारा दर्ज कराए गए दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2013 में दर्ज इस मामले में छोटी बहन ने नारायण साईं पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे, जबकि बड़ी बहन ने आसाराम के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपों के अनुसार, नारायण साईं ने वर्ष 2002 से 2005 के बीच पीड़िता के साथ विभिन्न आश्रमों में दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम दिया था।
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उल्लेखनीय है कि यह कानूनी प्रक्रिया लगभग आठ वर्षों तक चली। पीड़िता के अधिवक्ता अनुराग गोयल ने मंगलवार को बताया कि न्यायालय ने 2 अप्रैल को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है। वर्तमान में नारायण साईं दुष्कर्म के एक मामले में सूरत की जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और उसे हाल ही में 24 मार्च को इंदौर की अदालत में पेशी के लिए लाया गया था। जानकी और नारायण साईं का विवाह वर्ष 2008 में संपन्न हुआ था, किंतु वर्ष 2013 से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। पत्नी ने न्यायालय के समक्ष पति द्वारा परित्याग किए जाने और वैवाहिक संबंधों के अभाव का तर्क प्रस्तुत किया था।
जानकी ने लगाए साईं पर कई महिलाओं से संबंध के आरोप
तलाक की याचिका के दौरान जानकी ने नारायण साईं पर अन्य महिलाओं के साथ अनैतिक संबंधों के गंभीर आरोप लगाए थे। इसके अतिरिक्त, याचिका में सूरत की अदालत द्वारा दुष्कर्म के प्रकरण में दी गई सजा का भी संदर्भ दिया गया था। जानकी ने अपनी आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए 5 करोड़ रुपए की स्थायी एलुमनी की मांग की थी। हालांकि, फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों का सूक्ष्मता से परिशीलन करने के उपरांत 2 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की है।
भरण-पोषण की बकाया राशि 50 लाख तक पहुंची
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि धारा 125 सीआरपीसी के अंतर्गत पूर्व में 50 हजार रुपए प्रतिमाह का अंतरिम भरण-पोषण तय किया गया था। अधिवक्ता के अनुसार, नारायण साईं की ओर से इस राशि का नियमित भुगतान नहीं किया गया, जिसके कारण लगभग 50 लाख रुपए की राशि अब तक बकाया हो चुकी है। इस बकाया राशि की वसूली हेतु अब कानूनी प्रक्रिया आरंभ की जाएगी।
उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं
विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश को आगामी दिनों में उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है। इस प्रकरण में नारायण साईं की संपत्ति के भौतिक सत्यापन हेतु इंदौर कलेक्टर को भी पूर्व में निर्देश जारी किए गए थे, परंतु संपत्तियों के विवरण की पूर्ण जानकारी अभी तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की जा सकी है।
दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे
नारायण साईं को सूरत की दो बहनों द्वारा दर्ज कराए गए दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2013 में दर्ज इस मामले में छोटी बहन ने नारायण साईं पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे, जबकि बड़ी बहन ने आसाराम के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपों के अनुसार, नारायण साईं ने वर्ष 2002 से 2005 के बीच पीड़िता के साथ विभिन्न आश्रमों में दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम दिया था।

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