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Indore: जल अभावग्रस्त घोषित हुआ इंदौर, नए बोरिंग कराने पर रोक लागू

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Wed, 08 Apr 2026 08:41 AM IST
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सार

मध्य प्रदेश के इंदौर में गिरते भूजल स्तर और सूखते जल स्रोतों को देखते हुए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। पूरे जिले को जल अभावग्रस्त घोषित करते हुए 30 जून 2026 तक नए निजी बोरिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। आदेश का उल्लंघन करने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान है, साथ ही अवैध बोरिंग मशीनों को जब्त कर एफआईआर दर्ज की जाएगी।

 

Indore: Indore declared a water-scarce city, ban imposed on new borings
इंदौर शहर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश के इंदौर में बढ़ती गर्मी के बीच जल संकट के हालात गंभीर होते जा रहे हैं। तालाबों का जलस्तर घटने और भूजल तेजी से नीचे जाने के कारण प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए शहर में नए बोरिंग कराने पर रोक लगा दी है। शहर में गर्मी के चलते तालाबों का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। इसका सीधा असर आसपास के क्षेत्रों के भूजल स्तर पर भी पड़ रहा है। कई बोरिंग में पानी कम हो चुका है, जिससे जल संकट की स्थिति बन रही है। प्रशासन ने 30 जून 2026 तक शहर में नए बोरिंग कराने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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इंदौर को घोषित किया गया जल अभावग्रस्त क्षेत्र

इंदौर के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित कर दिया गया है। यह फैसला लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (जलप्रदाय) नगर निगम की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।
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रिपोर्ट में क्या कहा गया

रिपोर्ट के अनुसार, शहर में भूजल स्रोतों का अत्यधिक दोहन हो रहा है, जिससे जलस्तर तेजी से गिर रहा है। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले समय में जल संकट और गहरा सकता है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 और संशोधन अधिनियम 2002 के तहत पूरे जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। अधिनियम की धारा 6(1) के अंतर्गत जिले में निजी और अशासकीय नलकूप खनन (बोरिंग) पर 30 जून 2026 तक प्रतिबंध लगाया गया है।


अवैध बोरिंग पर सख्त कार्रवाई

ऐसी बोरिंग मशीनें जो प्रतिबंध के बावजूद जिले में प्रवेश करेंगी या बोरिंग करने का प्रयास करेंगी, उन्हें जब्त किया जाएगा और संबंधित थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर 2 हजार रुपये का जुर्माना और दो साल तक की सजा या दोनों का प्रावधान है। यह आदेश सरकारी योजनाओं के तहत होने वाले नलकूप उत्खनन पर लागू नहीं होगा। यदि जल संकट और बढ़ता है, तो प्रशासन धारा-4 के तहत निजी बोरिंग का अधिग्रहण भी कर सकता है।

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