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Indore News: पानी बचाने का अनोखा मॉडल, इंदौर संभाग के इन जिलों ने पेश की मिसाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Wed, 08 Apr 2026 06:40 AM IST
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सार
मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ के तहत जल संरक्षण और संवर्धन के कार्यों में तेजी आई है। जनभागीदारी और प्रशासनिक समन्वय से यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
मौके पर मौजूद लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग के विभिन्न जिलों में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ के तहत जल संरक्षण और संवर्धन की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। स्थानीय नागरिकों के व्यापक सहयोग से यह अभियान अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें प्रशासन, नवाचार और जनभागीदारी का मजबूत तालमेल देखने को मिल रहा है।
जल सुरक्षा के लिए अभियान बना जनआंदोलन
संभाग के सभी जिलों में इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रशासन और जनता मिलकर जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में जुटे हैं, जिससे सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। बड़वानी जिले में जन अभियान परिषद से जुड़ी नवांकुर संस्थाएं युवाओं को अभियान से जोड़ रही हैं। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में लघु फिल्मों के जरिए जल संरक्षण का महत्व समझाया गया। कलेक्टर जयति सिंह ने पाटी विकासखंड में समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि खेत तालाब, डगवेल और अमृत सरोवर जैसे कार्य समय-सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं।
खंडवा में घाटों पर सामूहिक श्रमदान
खंडवा जिले में पवित्र ओंकारेश्वर के ब्रह्मपुरी घाट पर जल संरक्षण और स्वच्छता का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने मिलकर श्रमदान कर घाटों की सफाई की। जल चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों को नर्मदा नदी की स्वच्छता बनाए रखने और जल संचय की शपथ दिलाई गई।
आलीराजपुर में निर्माण कार्यों पर जोर
आलीराजपुर जिले में अब तक 195 रिचार्ज स्ट्रक्चर और 75 खेत तालाब बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा 445 रिचार्ज स्ट्रक्चर और 99 खेत तालाबों पर तेजी से काम चल रहा है। सोंडवा के ग्राम टेमला में ग्रामीणों ने मिलकर 200 बोरी बंधान तैयार किया, जो सामुदायिक एकता का उदाहरण बन गया है। महिलाओं को जोड़ने के लिए कलश यात्राएं भी निकाली जा रही हैं।
ये भी पढ़ें- MP News: मध्य प्रदेश में अब एक दिन पहले नौ अप्रैल से शुरू होगी गेहूं खरीदी, तैयारी पूरी
झाबुआ में शिक्षा और जल संरक्षण का संगम
झाबुआ जिले में जल संरचनाओं की सफाई और गाद निकालने का काम बड़े स्तर पर हो रहा है। हजारों ट्रॉली उपजाऊ मिट्टी किसानों ने अपने खेतों में उपयोग की है, जिससे तालाब गहरे हुए और खेतों की उर्वरता बढ़ी। शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के बीच निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित कर जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है। वहीं, राजस्व विभाग ने जल संरचनाओं को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कर उन्हें कानूनी सुरक्षा भी दी है।
खरगोन की प्रदेश स्तर पर उपलब्धि
खरगोन जिले ने इस अभियान में प्रदेश स्तर पर डैशबोर्ड में तीसरा स्थान हासिल किया है। थरड़पुरा जैसे गांवों में नदियों और बावड़ियों की सामूहिक सफाई की जा रही है। प्रशासन और जनता के बेहतर समन्वय से पुरानी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार और नई संरचनाओं के निर्माण में सफलता मिल रही है। इंदौर संभाग में चल रही ये सभी गतिविधियां इस बात का उदाहरण हैं कि समाज और शासन मिलकर जल संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। यह अभियान भविष्य के लिए जल सुरक्षा की नई मिसाल बनता जा रहा है।
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जल सुरक्षा के लिए अभियान बना जनआंदोलन
संभाग के सभी जिलों में इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रशासन और जनता मिलकर जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में जुटे हैं, जिससे सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। बड़वानी जिले में जन अभियान परिषद से जुड़ी नवांकुर संस्थाएं युवाओं को अभियान से जोड़ रही हैं। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में लघु फिल्मों के जरिए जल संरक्षण का महत्व समझाया गया। कलेक्टर जयति सिंह ने पाटी विकासखंड में समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि खेत तालाब, डगवेल और अमृत सरोवर जैसे कार्य समय-सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं।
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खंडवा में घाटों पर सामूहिक श्रमदान
खंडवा जिले में पवित्र ओंकारेश्वर के ब्रह्मपुरी घाट पर जल संरक्षण और स्वच्छता का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने मिलकर श्रमदान कर घाटों की सफाई की। जल चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों को नर्मदा नदी की स्वच्छता बनाए रखने और जल संचय की शपथ दिलाई गई।
आलीराजपुर में निर्माण कार्यों पर जोर
आलीराजपुर जिले में अब तक 195 रिचार्ज स्ट्रक्चर और 75 खेत तालाब बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा 445 रिचार्ज स्ट्रक्चर और 99 खेत तालाबों पर तेजी से काम चल रहा है। सोंडवा के ग्राम टेमला में ग्रामीणों ने मिलकर 200 बोरी बंधान तैयार किया, जो सामुदायिक एकता का उदाहरण बन गया है। महिलाओं को जोड़ने के लिए कलश यात्राएं भी निकाली जा रही हैं।
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झाबुआ में शिक्षा और जल संरक्षण का संगम
झाबुआ जिले में जल संरचनाओं की सफाई और गाद निकालने का काम बड़े स्तर पर हो रहा है। हजारों ट्रॉली उपजाऊ मिट्टी किसानों ने अपने खेतों में उपयोग की है, जिससे तालाब गहरे हुए और खेतों की उर्वरता बढ़ी। शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के बीच निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएं आयोजित कर जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है। वहीं, राजस्व विभाग ने जल संरचनाओं को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कर उन्हें कानूनी सुरक्षा भी दी है।
खरगोन की प्रदेश स्तर पर उपलब्धि
खरगोन जिले ने इस अभियान में प्रदेश स्तर पर डैशबोर्ड में तीसरा स्थान हासिल किया है। थरड़पुरा जैसे गांवों में नदियों और बावड़ियों की सामूहिक सफाई की जा रही है। प्रशासन और जनता के बेहतर समन्वय से पुरानी जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार और नई संरचनाओं के निर्माण में सफलता मिल रही है। इंदौर संभाग में चल रही ये सभी गतिविधियां इस बात का उदाहरण हैं कि समाज और शासन मिलकर जल संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। यह अभियान भविष्य के लिए जल सुरक्षा की नई मिसाल बनता जा रहा है।

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