Madhya Pradesh: इंदौर के अस्पताल में नवजात बच्ची की मौत, परिवार का आरोप- चूहों ने कुतर दीं मासूम की उंगलियां
एक बार फिर इंदौर के एमवाईएच अस्पताल में एक नवजात बच्ची की संदिग्ध हालत में मौत का मामला गरमा गया है। आदिवासी संगठन जेएवाईएस का दावा है कि आईसीयू में चूहों ने बच्ची की चार उंगलियां कुतर दीं, जिससे उसकी मौत हो गई। परिजनों को शव प्लास्टिक में पैक कर सौंपा गया था। अंतिम संस्कार से पहले जब देखा गया तो हाथ की उंगलियां गायब थीं। प्रशासन पर झूठ बोलने और लापरवाही का आरोप लगा है।
विस्तार
मध्य प्रदेश के इंदौर के महाराजा यशवंतराव (एमवाईएच) अस्पताल में एक बार फिर चूहों से संबंधित मामले में बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां एक नवजात बच्ची की संदिग्ध हालत में मौत के मामले ने बड़ा तूल पकड़ लिया है। आदिवासी संगठन जय आदिवासी युवा शक्ति (जेएवाईएस) ने दावा किया है कि अस्पताल की लापरवाही से चूहों ने बच्ची की चार उंगलियां कुतर दीं, जिससे उसकी मौत हो गई। मामले में संगठन ने अस्पताल प्रशासन पर झूठ बोलने और मामले को दबाने का आरोप लगाया है।
हालांकि अस्पताल प्रशासन की माने तो 31 अगस्त की रात और एक सितंबर की सुबह के बीच आईसीयू में भर्ती दो नवजात बच्चियों पर चूहों ने हमला कर दिया। दोनों बच्चियां पहले से ही जन्मजात बीमारियों से पीड़ित थीं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इनमें से एक बच्ची धार जिले के देवराम नामक व्यक्ति की बेटी थी और दूसरी बच्ची देवास से थी। दोनों जिले इंदौर के पास हैं।
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परिवार का दावा- मिला उंगलियों से कटा बच्ची का शव
आदिवासी संगठन जेएवाईएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकेश मुजाल्दा ने कहा कि अस्पताल ने बच्ची की मौत के बाद उसका शव प्लास्टिक बैग में पैक करके शनिवार देर शाम परिवार को सौंप दिया। जब अंतिम संस्कार से पहले परिवार ने पैकिंग हटाई, तो देखा कि एक हाथ की चारों उंगलियां गायब थीं और उन्हें चूहे कुतर चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने पहले झूठ कहा कि उंगलियों पर हल्की चोटें हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही थी।
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आरोपों पर क्या बोला अस्पताल प्रशासन?
वहीं मामले में अस्पताल से जुड़े महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ अरविंद घंघोरिया ने सभी आरोपों को नकारा है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की टीम से पोस्टमॉर्टम कराया गया है और उसके आधार पर स्थिति साफ हो चुकी है। हालांकि उन्होंने माना कि साफ-सफाई, चूहा नियंत्रण और सुरक्षा के उपायों में सुधार किए जा रहे हैं। बता दें कि अस्पताल प्रशासन ने अब तक छह कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है, जिनमें कुछ को सस्पेंड और पद से हटाया गया है।
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अब समझिए आदिवासी संगठन की क्या है मांग?
अब बात अगर संगठन की मांग की करें तो जेएवाईएस के मुजाल्दा ने मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। डीन और अधीक्षक को निलंबित किया जाए। एक स्वतंत्र मेडिकल टीम बनाकर दोनों मौतों की वैज्ञानिक तरीके से 'डेथ ऑडिट' की जाए और अगर ऐसा नहीं होता है तो उन्होंने सख्त चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला, तो आदिवासी समुदाय सड़कों पर उतरेगा।
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