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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Six people, including a mother-sons, were sentenced to life imprisonment; farmer and his two sons were killed

Justice: मां-बेटों सहित छह को उम्रकैद, जमीन-पानी के विवाद में किसान और उसके दो पुत्रों को उतारा था मौत के घाट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम Published by: रतलाम ब्यूरो Updated Thu, 02 Apr 2026 05:36 PM IST
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सार

रतलाम के देवरुंडा गांव में पांच साल पुराने तिहरे हत्याकांड में छह दोषियों को उम्रकैद मिली। जमीन और सिंचाई विवाद में किसान व उसके दो बेटों की हत्या कर शव कुएं में फेंके गए थे। अदालत ने साक्ष्य नष्ट करने पर भी अतिरिक्त सजा सुनाई। 

Six people, including a mother-sons, were sentenced to life imprisonment; farmer and his two sons were killed
रतलाम कोर्ट ने सुनाया फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

रतलाम जिले की सांगर ग्राम पंचायत के ग्राम देवरुंडा में हुए साढ़े पांच साल पुराने तिहरे हत्याकांड में शामिल एक महिला व उसके दो बेटों सहित छह आरोपियों को न्यायालय ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इन्होंने जमीन व खेत में पानी सींचने के विवाद में युवक (किसान) व उसके दो मासूम पुत्रों की हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद साक्ष्य छिपाने के लिए तीनों के शव पानी की मोटर में रस्सी से बांध कर कुएं में फेंक दिए थे। 

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विशेष लोक अभियोजक व सहायक जिला अभियोजन अधिकारी गोल्डन राय ने बताया कि मामला यह है कि किसान 35 वर्षीय लक्ष्मण भाभर पिता मांगू भाभर निवासी ग्राम देवरूंडा का अपने दूर के काका पूनमचंद उर्फ पूंजा भाभर से जमीन को लेकर कई वर्षों से विवाद चल रहा था। वहीं लक्ष्मण का उसके पड़ोसी पीरू खराड़ी व इसके परिवारवालों से खेत पास स्थित सरकारी कुएं (पानी का बड़ा गड्ढा) से खेत में पानी पिलाने (सिंचाई) को लेकर भी विवाद चल रहा था। लक्ष्मण भाभर 07 नवंबर 2021 को अपने बड़े पुत्र 13 वर्षीय विशाल व 08 वर्षीय पुष्कर के साथ अपने खेत पर गया था। खेत पर लक्ष्मण का छोटा भाई जगदीश भाभर भी गया हुआ था, लेकिन वह शाम की करीब पांच बजे घर लौट आया था। कुछ देर बाद लहसुन चौपने की मजदूरी करने गई लक्ष्मण की पत्नी बसंतीबाई व जगदीश की पत्नी कलाबाई भी घर लौटी और बसंतीबाई ने जगदीश से पूछा कि तुम्हारे भैया लक्ष्मण कहां है,  तो उसने कहा कि जब वह खेत से घर आया तो भैया लक्ष्मण और दोनों भतीजे विशाल व पुष्कर उसे नहीं दिखे। 
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Six people, including a mother-sons, were sentenced to life imprisonment; farmer and his two sons were killed
(इन्हेंं मिली सजा) 

जगदीश ने अपनी बुआ शांतिबाई के घर फन कॉल कर पूछा तो पता चला कि, वे तीनों वहां पर भी नहीं गए हैं। इसके बाद जगदीश ने गांव में और आसपास तलाश किया और फिर खेत की तरफ ढूंढने गया। वह उनके खेत कुएं तरफ ढूंढ़ने गया तो उसने देखा कि सुबह पानी की जो मोटर कुएं से बाहर निकालकर कुएं के पास रखी थी, वह नहीं दिखी। उसे शंका हुई कि बड़ा भाई लक्ष्मण लक्ष्मण मोटर के साथ कुएं में तो नहीं गिरा है। उसने अन्य परिजन व गांव के कुछ लोगों को वहां बुलाया तथा कुएं में कूदकर देखा तो उसके पैरों पर कुछ अड़ा, उसने अंदर देखा तो उसे उसके भाई लक्ष्मण और दोनों भतीजों के शव दिखाई दिए। तब उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की मदद से तीनों के शव बाहर निकाले तो वे रस्सी से मोटर से बंधे हुए थे।

जांच में हुआ खुलासा
पुलिस ने मामले की जांच की तो पाया कि लक्ष्मण भाभर व उसके दोनों बच्चों की हत्या जमीन व कुएं से सिंचाई करने के विवाद में उसके रिश्तेदार आरोपी 55 वर्षीय पूंजा उर्फ पूनमचंद भाभर पिता नागू भाभर, पड़ोसी खेत वाले 38 वर्षीय पीरू खराड़ी पिता रूपा खराड़ी, इसके भाई 27 वर्षीय दिलीप उर्फ दीपू खराड़ी उर्फ धुलेसिंह, मां 55 वर्षीय रुपली बाई खराड़ी और साथी 58 वर्षीय फूलजी गामड़ पिता नानजी गामड़ तथा 25 वर्षीय कमलेश उर्फ कमल पिता फूलजी गामड़ निवासी ग्राम देवरूंडा ने मिलकर की थी। हत्या करने के बाद आरोपियों ने सबूत नष्ट करने के उद्देश्य से तीनों शव पानी की मोटर से रस्सी से बांध दिए थे तथा उन्हें कुएं में फेंक दिया था।  

रूपली बाई और उसके पुत्र पीरू व दिलीप
(इन्हेंं मिली सजा) 

ये सुनाई गई सजा
अष्टम अपर सत्र न्यायालय (न्यायाधीश निर्मल मंडोरिया) ने सुनवाई के बाद अभियुक्त पूंजा उर्फ पूनमचंद भाभर, पीरू खराड़ी, दिलीप उर्फ दीपू उर्फ धुलेसिंह ख्राड़ी  फूलजी गामड़, कमलेश उर्फ कमल गामड़  और रूपली खराड़ी को भादंवि की धारा 302 सहपठित धारा 149 में सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई और सभी पर चार-चार हजार रुपए का जुर्माना किया। साथ ही अभियुक्तों को धारा 201 में सात-सात वर्ष के सश्रम करावास की सजा व दो-दो हजार रुपए का जुर्माना से भी दंडित किया। प्रकरण पांच वर्ष पुराने चिन्हित, जघन्य व सनसनीखेज श्रेणी में रखा गया था। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी विशेष लोक अभियोजक व सहायक जिला अभियोजन अधिकारी गोल्डन राय ने की।

 

रूपली बाई और उसके पुत्र पीरू व दिलीप

इस जगह फेंके गए थे शव

 

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