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टीकमगढ़ में अवैध ग्रेनाइट खनन का खुलासा: तीन साल तक वन क्षेत्र में चलता रहा खेला, विधानसभा में गूंजा मुद्दा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़ Published by: टीकमगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 06 Apr 2026 11:27 AM IST
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सार

टीकमगढ़ के बेदोरा जंगल में तीन साल तक अवैध ग्रेनाइट खनन का बड़ा मामला सामने आया है। करोड़ों रुपये का खनिज निकालकर राजस्थान भेजा गया, जबकि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। मामला मध्यप्रदेश विधानसभा में उठने के बाद जांच शुरू हुई है। पढ़ें पूरी खबर

Illegal Granite Mining in Forest Areas: Investigation Committee Formed After Issue Resonates
वन क्षेत्र में अवैध खदान को लेकर प्रशासन हुआ सख्त। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

टीकमगढ़ के बेदोरा जंगल में तीन साल तक चलती रही ग्रेनाइट की अवैध खदान करोड़ों रुपये का ग्रेनाइट निकालकर बेचा गया राजस्थान। विधानसभा में मामला उठते ही खनिज माफिया हुए फरार ।रातों-रात वन विभाग मकान और खदान को छुपाने की कर रहा है कोशिश। मध्य प्रदेश सरकार ने तीन आईएफएस की कमेटी को जांच के लिए किया नियुक्त।
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मिली जानकारी के अनुसार, वेदोरा जंगल में छह हेक्टेयर की खदान टीकमगढ़ जिला खनिज विभाग द्वारा 13 मार्च 2023 को खसरा क्रमांक 37/1 और 2 में दी गई थी। यह स्वीकृति कामतानाथ मिनरल्स ग्वालियर को दी गई थी, जिस जगह पर एक खदान स्वीकृत की गई थी उस जगह पर कोई भी ग्रेनाइट खदान नहीं थी। लेकिन उसी से लगे हुए वन विभाग के बीट लिधौरा के अंतर्गत आने वाले वन विभाग के कक्ष क्रमांक 246 पर लगातार तीन साल तक उत्खनन होता रहा।
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'खुलेआम पोकलेन और विस्फोटक सामग्री का भी इस्तेमाल किया'
इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा समय-समय पर टीकमगढ़ जिला प्रशासन और वन विभाग को शिकायत की गई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। खदान के पास स्थित गांव सतगुवा के रहने वाले रामकुमार कहते हैं कि पिछले तीन साल से लगातार वन क्षेत्र में उत्खनन होता रहा और शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र में खुलेआम पोकलेन और विस्फोटक सामग्री का भी इस्तेमाल किया गया, जिस कारण से कई जानवरों की भी मौत हुई है। जिसे वन विभाग ने कभी उजागर नहीं किया।

मध्य प्रदेश विधानसभा में गूंजा मामला
टीकमगढ़ वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जब कोई कार्रवाई नहीं की गई तो टीकमगढ़ विधानसभा से कांग्रेस के विधायक यादवेंद्र सिंह बुंदेला ने इस अवैध उत्खनन का मामला विधानसभा में उठाया, जिस पर मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भारतीय वन सेवा के तीन अधिकारियों की जांच कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए गए। यह विधानसभा के पटल पर 14 फरवरी 2026 को मामला गूंजा था।

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अभी तक कोई कार्रवाई नहीं
कामतानाथ मिनरल्स ग्वालियर द्वारा वन क्षेत्र में करोड़ों रुपए की ग्रेनाइट का अवैध उत्खनन करने के मामले में वन विभाग द्वारा जिला प्रशासन या खनिज विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है टीकमगढ़ जिले में रहे तत्कालीन खनिज अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह पूरा खेल राजनीति के संरक्षण में खेला गया उन्होंने कहा कि यह सही है कि जहां पर खदान स्वीकृत की गई थी वहां पर कोई ग्रेनाइट नहीं थी। इस पूरे मामले में कहीं ना कहीं वन विभाग दोषी है और वन विभाग के अधिकारियों की मिली भगत है क्योंकि जहां पर उत्खनन किया गया है वह वन विभाग का क्षेत्रफल है गांव के रहने वाले पुरुषोत्तम सिंह का कहना है कि अभी तक इस मामले में वन विभाग द्वारा कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है और चोरी छुपे लगातार अवैध उत्खनन जारी है

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राजस्थान जाती थी ग्रेनाइट
सूत्रों की माने तो यहां से ग्रेनाइट का उत्खनन होने के बाद ट्रकों के माध्यम से सिल्ली कटिंग के लिए राजस्थान तक भेजी जाती थी यानी की कह सकते हैं कि टीकमगढ़ से लेकर राजस्थान तक अवैध खनन का दौरा 3 साल तक चलता रहा और वन विभाग के किसी भी अधिकारी ने खनिज विभाग के किसी भी अधिकारी ने कोई कार्रवाई नहीं कि इससे संकेत मिलता है कि कहीं ना कहीं अवैध खनन करने वाले माफियाओं को राजनीति का संरक्षण था

जानें इस पर क्या कहते हैं वन अधिकारी?
टीकमगढ़ जिले के डीएफओ राजाराम परमार कहते हैं कि 31 मार्च को टीम ने मौके का निरीक्षण किया था और अभी इसकी रिपोर्ट भेजी कि नहीं भेजी अभी इस बात का पता नहीं है। मैं मौके पर साथ में गया था, हां यह बात सच है कि वन क्षेत्र में करोड़ों रुपये का अवैध उत्खनन किया गया है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

 

वन क्षेत्र में अवैध खदान

वन क्षेत्र में अवैध खदान।

 

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