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Maihar News: मैहर में शिक्षा विभाग का 4.37 करोड़ का लघु निर्माण घोटाला, 22 आरोपियों पर एफआईआर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैहर
Published by: सतना ब्यूरो
Updated Tue, 10 Feb 2026 10:32 AM IST
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सार
मैहर जिले के रामनगर विकासखंड में स्कूलों के लघु निर्माण कार्यों में 4.37 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा हुआ है। बिना निर्माण के भुगतान और फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए गए। एसडीएम जांच के बाद पुलिस ने बीईओ, प्राचार्यों व ठेकेदारों सहित 22 आरोपियों पर मामला दर्ज किया है।
मैहर लघु निर्माण घोटाला।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मैहर जिले के रामनगर विकासखंड में शिक्षा विभाग के भीतर हुए लघु निर्माण घोटाले ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है। शासकीय हाई स्कूल और हायर सेकेंड्री स्कूलों में भवन मरम्मत और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर 4 करोड़ 37 लाख 89 हजार 420 रुपये के गबन के मामले में अब आपराधिक कार्रवाई शुरू हो चुकी है। एसडीएम रामनगर की जांच रिपोर्ट के बाद प्रभारी बीईओ की शिकायत पर रामनगर थाना पुलिस ने 22 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
बिना निर्माण के निकाल ली गई करोड़ों की राशि
जांच में सामने आया है कि शासन द्वारा रामनगर विकासखंड के 22 विद्यालयों को लघु निर्माण, पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड जैसे कार्यों के लिए राशि आवंटित की गई थी। आरोप है कि कई स्कूलों में एक ईंट भी नहीं लगी, फिर भी संबंधित प्राचार्यों ने ठेका कंपनियों को भुगतान कर दिया। इतना ही नहीं, बिना कार्य पूर्ण हुए फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत से खुली परतें
इस घोटाले का खुलासा सुलखमा स्कूल से जुड़ी शिकायत के बाद हुआ, जो सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई थी। प्रारंभिक जांच में ही स्पष्ट हो गया कि बिना वर्क ऑर्डर और बिना निर्माण कार्य के भुगतान किया गया है। इसके बाद जब जांच का दायरा बढ़ाया गया, तो एक-एक कर 16 अन्य स्कूलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं सामने आने लगीं।
ये भी पढ़ें- बागेश्वर धाम से गूंजी बेटियों को बचाने की पुकार, एपस्टीन फाइल्स के खुलासे पर जानिए क्या बोले शास्त्री
समिति ने किया बड़ा खुलासा
कलेक्टर मैहर के आदेश पर गठित जांच समिति ने पूरे प्रकरण की गंभीरता से पड़ताल की। एसडीएम रामनगर शिव प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 18 शासकीय विद्यालयों में बिना काम कराए भुगतान किया गया। रिपोर्ट में इसे शासन के धन का सीधा दुरुपयोग और गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश राशि भोपाल की वाणी इंफ्रा इंफ्रास्ट्रक्चर एंड मटेरियल सप्लायर, सतना की महाकाल ट्रेडर्स, मैहर की रुद्र इंटरप्राइजेज को भुगतान की गई। आरोप है कि फर्मों और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के बीच मिलीभगत से करोड़ों रुपये का भुगतान एक साथ कर दिया गया।
बीईओ, प्राचार्य और कर्मचारी भी घेरे में
पुलिस जांच में तत्कालीन बीईओ संतोष कुमार सिंह, देयक तैयार कर कोषालय में प्रस्तुत करने वाले कर्मचारी विनोद कुमार पटेल सहित कई स्कूल प्राचार्यों को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है। आरोप है कि आहरण एवं संवितरण अधिकारी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया।
22 नामजद आरोपियों पर दर्ज हुआ प्रकरण
रामनगर थाना पुलिस ने बीईओ, 17 प्राचार्यों, तीन फर्म संचालकों और एक चपरासी सहित कुल 22 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। पुलिस अब फर्म संचालकों और कर्मचारियों की तलाश में जुटी हुई है और जल्द गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।
पहले ही हो चुका है निलंबन
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सख्त कदम उठाते हुए प्रभारी बीईओ, 18 प्राचार्यों और एक चपरासी को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कमिश्नर रीवा, संयुक्त संचालक शिक्षा, जिला पंचायत सीईओ और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई है।
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बिना निर्माण के निकाल ली गई करोड़ों की राशि
जांच में सामने आया है कि शासन द्वारा रामनगर विकासखंड के 22 विद्यालयों को लघु निर्माण, पार्किंग शेड और साइकिल स्टैंड जैसे कार्यों के लिए राशि आवंटित की गई थी। आरोप है कि कई स्कूलों में एक ईंट भी नहीं लगी, फिर भी संबंधित प्राचार्यों ने ठेका कंपनियों को भुगतान कर दिया। इतना ही नहीं, बिना कार्य पूर्ण हुए फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए।
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सीएम हेल्पलाइन की शिकायत से खुली परतें
इस घोटाले का खुलासा सुलखमा स्कूल से जुड़ी शिकायत के बाद हुआ, जो सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई थी। प्रारंभिक जांच में ही स्पष्ट हो गया कि बिना वर्क ऑर्डर और बिना निर्माण कार्य के भुगतान किया गया है। इसके बाद जब जांच का दायरा बढ़ाया गया, तो एक-एक कर 16 अन्य स्कूलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं सामने आने लगीं।
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समिति ने किया बड़ा खुलासा
कलेक्टर मैहर के आदेश पर गठित जांच समिति ने पूरे प्रकरण की गंभीरता से पड़ताल की। एसडीएम रामनगर शिव प्रकाश मिश्रा के नेतृत्व में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 18 शासकीय विद्यालयों में बिना काम कराए भुगतान किया गया। रिपोर्ट में इसे शासन के धन का सीधा दुरुपयोग और गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश राशि भोपाल की वाणी इंफ्रा इंफ्रास्ट्रक्चर एंड मटेरियल सप्लायर, सतना की महाकाल ट्रेडर्स, मैहर की रुद्र इंटरप्राइजेज को भुगतान की गई। आरोप है कि फर्मों और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के बीच मिलीभगत से करोड़ों रुपये का भुगतान एक साथ कर दिया गया।
बीईओ, प्राचार्य और कर्मचारी भी घेरे में
पुलिस जांच में तत्कालीन बीईओ संतोष कुमार सिंह, देयक तैयार कर कोषालय में प्रस्तुत करने वाले कर्मचारी विनोद कुमार पटेल सहित कई स्कूल प्राचार्यों को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया है। आरोप है कि आहरण एवं संवितरण अधिकारी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर पूरी राशि का भुगतान कर दिया गया।
22 नामजद आरोपियों पर दर्ज हुआ प्रकरण
रामनगर थाना पुलिस ने बीईओ, 17 प्राचार्यों, तीन फर्म संचालकों और एक चपरासी सहित कुल 22 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। पुलिस अब फर्म संचालकों और कर्मचारियों की तलाश में जुटी हुई है और जल्द गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।
पहले ही हो चुका है निलंबन
घोटाले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही सख्त कदम उठाते हुए प्रभारी बीईओ, 18 प्राचार्यों और एक चपरासी को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कमिश्नर रीवा, संयुक्त संचालक शिक्षा, जिला पंचायत सीईओ और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई है।
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