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MP News: सात साल की आदिवासी मासूम को देह व्यापार के लिए उठाया, चार को उम्रकैद; कुल 13 दरिंदे सलाखों के पीछे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Wed, 25 Mar 2026 07:02 PM IST
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सार

सीहोर के इछावर में 7 साल की आदिवासी बच्ची को देह व्यापार के लिए अगवा करने वाले 13 दरिंदों को पॉक्सो कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाई। 4 को उम्रकैद सहित कुल 13 को 12-12 साल की जेल और 52,000 रुपये जुर्माना लगाया गया।

MP News:Tribal Girl, 7, Kidnapped for Prostitution; 4 Get Life, 13 Convicted in Sehore
सीहोर कोर्ट का बड़ा फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के थाना इछावर क्षेत्र के डुंडलावा गांव में 10 फरवरी 2024 की सुबह एक ऐसा जघन्य और रोंगटे खड़े कर देने वाला अपराध अंजाम दिया गया, जिसने पूरे जिले को हिला कर रख दिया। सफेद रंग की एक चार पहिया गाड़ी में सवार दरिंदों ने जनजाति वर्ग की महज 7 साल की अबोध बालिका को पानी देने के बहाने बुलाया और पलक झपकते ही उसे गाड़ी में डालकर फरार हो गए। मासूम का 5 साल का भाई चीखता-बिलखता रह गया। इस दरिंदगी का मकसद और भी भयावह था, उस मासूम को देह व्यापार के दलदल में धकेलना।

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पानी लेने गई बच्ची, लौटी नहीं.. तब नाना ने दर्ज कराई रिपोर्ट
सुबह 8 से 9 बजे के बीच पीड़िता अपने 5 वर्षीय छोटे भाई के साथ घर के बाहर खेल रही थी। तभी एक सफेद कार घर के सामने आकर रुकी और उसमें बैठे शख्स ने पीड़िता से पानी मांगा। मासूम घर के भीतर गई, बोतल में पानी भरा और कार वाले को देने निकल गई। लेकिन काफी देर बीतने पर भी वह लौटी नहीं। नानाजी ने बाहर आकर देखा तो न बच्ची थी, न कार। इधर-उधर भटकने और गांव में तलाश करने के बाद जब कुछ हाथ नहीं लगा, तो परिजनों के साथ थाना इछावर पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने अपराध क्रमांक 52/2024, धारा 363 भादवि के तहत अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की।
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CCTV, मुखबिर और PSTN से पुलिस ने बुना जाल
मामले की गंभीरता देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तत्काल तीन विशेष पुलिस टीमें गठित की गईं। घटनास्थल के आसपास के लोगों और वाहन चालकों से गहन पूछताछ हुई। पता चला कि घटना से एक दिन पहले भी एक सफेद कार इलाके में आती-जाती दिखी थी। पुलिस ने पूरे शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली तो घटना के बाद एक संदिग्ध सफेद कार शहर से बाहर जाती नजर आई। मुखबिरों की सूचना और घटनास्थल के आसपास के PSTN डेटा की जांच से स्पष्ट हो गया कि अपहरणकर्ता शिवपुरी जिले में हैं। पुलिस टीमें बिना देर किए शिवपुरी रवाना हो गईं।

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रात के अंधेरे में दबिश, कंजरों के डेरे से मिली मासूम
शिवपुरी जिले के मायापुर थाना क्षेत्र स्थित कंजरों के डेरे पर देर रात पुलिस ने धावा बोला। वहां से पीड़िता को सकुशल बरामद किया गया और 9 आरोपियों तिवारी कंजर, राहुल, सुनील, आजाद सिंह, धर्मराज, दयाराम, शाहरूख, इकरा बी और मांगीबाई को दबोच लिया गया। इसके साथ ही आरोपी सुनील के कब्जे से स्विफ्ट डिजायर (MP13ZD3979) जब्त की गई। ये वही वाहन थे, जिनसे वारदात को अंजाम दिया गया था। सभी 9 आरोपियों को कारों सहित पीड़िता के साथ थाना इछावर लाया गया।

पूछताछ में उगला जहर, बेचने की थी साजिश
थाने में सभी आरोपियों के मेमो बयान लिए गए। इकरा बी की निशानदेही पर कार में पीड़िता के कपड़े बरामद हुए। मांगीबाई की निशानदेही पर वह मटमैला तौलिया जब्त किया गया, जिससे मासूम का मुंह दबाया गया था। पूछताछ से यह भयावह सच सामने आया कि पड़ोसी गांव डोगनलापानी के आरोपी प्रेमसिंह बारेला के घर पर वारदात से एक दिन पहले गिरोह के सदस्य इकट्ठे हुए थे और पूरी साजिश रची गई थी। इसके बाद पुलिस ने सोम कंजर, किरण बेढ़िया, वंदना बेढ़िया और अनुज शिवहरे को भी गिरफ्तार किया। जांच में यह साबित हुआ कि 9 आरोपियों ने बच्ची का अपहरण कर उसे इन 4 आरोपियों को बेचने की योजना बनाई थी। प्रकरण में धारा 366(A), 372, 120-B, 75 भादवि, पॉक्सो एक्ट और SC/ST एक्ट जोड़ी गईं।

60 दिन में चालान, 26 गवाह, 164 साक्ष्य, अभियोजन ने कसा शिकंजा
विवेचना के दौरान टोल नाकों के CCTV फुटेज, मोबाइलों की CDR/CAF रिपोर्ट, जाति प्रमाण पत्र, स्कॉलर रजिस्टर की प्रति और पीड़िता के लिए खरीदी गई फ्रॉक की ट्रांजेक्शन रसीद जैसे पुख्ता सबूत जुटाए गए। निर्धारित 60 दिन के भीतर 14 आरोपियों के खिलाफ 11 अप्रैल 2024 को अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया। सहायक जिला अभियोजन अधिकारी रेखा यादव ने मजबूत पैरवी की। अभियोजन की ओर से 26 गवाहों की गवाही करवाई गई और 164 दस्तावेज व वस्तुएं न्यायालय में प्रमाणित कराई गईं। पूर्व डीपीओ अनिल बादल ने पीड़िता की ओर से लिखित अंतिम तर्क प्रस्तुत किए।

कोर्ट ने सुनाई 4 को उम्रकैद, कुल 13 सलाखों के पीछे
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) स्मृता सिंह ठाकुर की अदालत ने तमाम साक्ष्यों और तर्कों से सहमत होते हुए 13 आरोपियों को दोषी करार दिया। फरार आरोपी प्रेमसिंह बारेला के विरुद्ध फैसला बाद में सुनाया जाएगा। SC/ST एक्ट की धारा 3(2)(V) के तहत राहुल, अनुज, शाहरूख और इकरा बी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। धारा 370 (मानव तस्करी) में सभी 13 आरोपियों को 12-12 वर्ष की सजा दी गई।

कुल मिलाकर 37 वर्ष कारावास और 52,000 रुपये जुर्माना ठोका गया। न्यायालय ने पीड़िता को मध्यप्रदेश पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 1 लाख रुपये मुआवजा दिलाने का आदेश भी दिया। अदालत ने मासूम को दरिंदों के चंगुल से छुड़ाने में तत्परता दिखाने के लिए पुलिसबल की जमकर सराहना की। प्रकरण को शासन स्तर पर जघन्य एवं सनसनीखेज श्रेणी में रखा गया।

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