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MP: निरीक्षण करने पहुंचे सांसद तो खुली नगर पालिका की पोल, सफाई व्यवस्था देखकर हुए नाराज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Fri, 12 Jun 2026 04:33 PM IST
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सार

सीहोर के सीवन नदी घाट पर फैली गंदगी देखकर भोपाल सांसद आलोक शर्मा नाराज हो गए। सफाई अभियान के दौरान उन्होंने सीएमओ सुधीर सिंह को फटकार लगाते हुए व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। इसके बाद सांसद ने जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के साथ श्रमदान कर घाट की सफाई भी की।

Madhya Pradesh News BJP MP Alok Sharma Threatens Sehore CMO with Immediate Suspension During Inspection
सीएमओ पर भड़के सांसद आलोक शर्मा - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

सीहोर सीवन नदी घाट पर फैली गंदगी ने गुरुवार सुबह उस वक्त प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी, जब भोपाल संसदीय क्षेत्र के सांसद आलोक शर्मा ने मौके पर पहुंचकर नगर पालिका के अधिकारियों की कार्यशैली पर खुली नाराजगी जाहिर कर दी। सफाई अभियान के दौरान सांसद का गुस्सा सीधे मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) सुधीर सिंह पर फूट पड़ा और उन्होंने सबके सामने उन्हें कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। 


घाट पर पसरी गंदगी ने बढ़ाया सांसद का पारा
केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘12 साल विकास के, विश्वास के और जनकल्याण के’ अभियान के अंतर्गत सांसद आलोक शर्मा गुरुवार को सीहोर प्रवास पर थे। सुबह के कार्यक्रम में उन्होंने स्थानीय सीवन नदी घाट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान घाट पर जगह-जगह फैला कचरा, गंदगी और अव्यवस्थित सफाई व्यवस्था देखकर सांसद नाराज हो गए। इस दौरान उन्होंने मुख्य नगरपालिका अधिकारी सुधीर सिंह को हिदायत दे डाली कि तत्काल व्यवस्थाएं सुधारों वर्ना मिस्टम सीएमओ. पांच मिनट में हो जाओगे सस्पेंड।  प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घाट की स्थिति देखकर सांसद ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से जवाब-तलब शुरू कर दिया। प्रशासनिक अमले के बीच अचानक बढ़ी इस सख्ती से माहौल गंभीर हो गया।
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हम सफाई कर रहे हैं और आप बाहर खड़े हैं?
निरीक्षण के दौरान सांसद की नजर मुख्य नगरपालिका अधिकारी सुधीर सिंह पर पड़ी, जो घाट के ऊपरी हिस्से में खड़े होकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे थे। इसी बात पर सांसद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं सफाई अभियान में हिस्सा ले रहे हैं तो अधिकारियों को भी जमीन पर उतरकर जिम्मेदारी निभानी चाहिए। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार सांसद ने सख्त लहजे में कहा कि केवल निर्देश देने से काम नहीं चलेगा, अधिकारियों को खुद मैदान में उतरकर व्यवस्था संभालनी होगी। उन्होंने सीएमओ को तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और कर्मचारियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए।
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प्रशासनिक लापरवाही पर सार्वजनिक नाराजगी
घटनास्थल पर मौजूद जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के सामने सांसद द्वारा व्यक्त की गई नाराजगी ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। जिस स्थान पर नियमित सफाई व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है, वहां इतनी बड़ी मात्रा में कचरा मिलना अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न माना जा रहा है।
सांसद ने स्पष्ट संकेत दिए कि स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषय में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

खुद संभाली सफाई अभियान की कमान
केवल निर्देश देने तक सीमित न रहते हुए सांसद आलोक शर्मा स्वयं सफाई अभियान में उतर गए। उन्होंने नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, सीएमओ सुधीर सिंह, भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर घाट पर श्रमदान किया। करीब एक घंटे तक चले इस अभियान में घाट पर फैले कचरे को हटाया गया और स्वच्छता का संदेश दिया गया। सांसद ने कहा कि जनभागीदारी के बिना स्वच्छता अभियान सफल नहीं हो सकता, लेकिन प्रशासन की जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण है।

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अधिकारियों को दी सख्त नसीहत
सफाई अभियान के दौरान सांसद ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि केवल कार्यालयों में बैठकर व्यवस्थाएं नहीं सुधर सकतीं। जमीनी स्तर पर निगरानी और नियमित निरीक्षण आवश्यक है। उन्होंने सीवन नदी घाट पर स्थायी और प्रभावी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि स्वच्छता सेवक लगातार मेहनत कर रहे हैं, इसलिए अधिकारियों को भी उनकी तरह सक्रिय रहकर जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

अभियान खत्म, फिर उठे जमीनी हकीकत पर सवाल
हालांकि, कार्यक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी शुरू हो गई कि घाट पर सफाई अभियान का असर कितना स्थायी रहेगा। कई लोगों का कहना है कि वीआईपी दौरे और फोटो सेशन के दौरान सफाई गतिविधियां तेज दिखाई देती हैं, लेकिन बाद में हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय नहीं हुई तो ऐसे अभियान केवल प्रतीकात्मक बनकर रह जाएंगे। लोगों ने मांग की है कि घाट पर स्थायी सफाई व्यवस्था लागू की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की नियमित जवाबदेही तय हो।
 
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