अच्छी खबर: सीहोर में बदलेगी सोयाबीन की खेती की तस्वीर, 20 हेक्टेयर में बनेगा राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र
किसान वर्ष में मध्यप्रदेश सरकार ने सीहोर के भाऊखेड़ी में राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के लिए 20 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है। केंद्र से किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती, कीट-रोग नियंत्रण और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी मिलेगी।
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विस्तार
किसान वर्ष के तहत मध्यप्रदेश सरकार ने सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इछावर तहसील के ग्राम भाऊखेड़ी में राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान की स्थापना के लिए 20 हेक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस पहल से सीहोर को सोयाबीन अनुसंधान और आधुनिक कृषि तकनीक के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होने की उम्मीद है।
भाऊखेड़ी में 20 हेक्टेयर भूमि आवंटित
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से जुड़े राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के लिए आवंटित भूमि का उपयोग कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना और सोयाबीन से संबंधित अनुसंधान गतिविधियों के लिए किया जाएगा। यह केंद्र किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक खेती की जानकारी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
किसानों को मिलेंगे उन्नत बीज
अनुसंधान केंद्र के माध्यम से किसानों को सोयाबीन की उन्नत और नई किस्मों की जानकारी तथा बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। मौसम, मिट्टी और क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुरूप ऐसी किस्मों के विकास और प्रसार पर जोर रहेगा, जिनसे उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाई जा सके।
बीमारी और कीट नियंत्रण की मिलेगी जानकारी
सोयाबीन की फसल में होने वाले रोग और कीट किसानों के लिए बड़ी चुनौती रहते हैं। प्रस्तावित केंद्र के माध्यम से किसानों को फसल में बीमारी और कीटों की पहचान, उनके नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों तथा उचित कृषि दवाओं के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी। इससे अनावश्यक दवा और उत्पादन लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
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आधुनिक तकनीक से खेती को मिलेगा बढ़ावा
कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत कृषि उपकरण, फसल प्रबंधन और बेहतर उत्पादन पद्धतियों की जानकारी मिलने की उम्मीद है। इससे पारंपरिक खेती के साथ वैज्ञानिक तकनीकों का समावेश होगा और किसानों को बदलते मौसम के बीच उत्पादन बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
देश के करीब 50 लाख सोयाबीन किसानों से जुड़ा संस्थान
राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से संबंधित संस्थान है। सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से यह देश के लगभग 50 लाख सोयाबीन किसानों के हितों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। सीहोर में इसकी गतिविधियों का विस्तार मध्यप्रदेश के सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कृषि वैज्ञानिक ने बताया महत्वपूर्ण कदम
आरएके कॉलेज के सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक डॉ. आरसी जैन ने इसे क्षेत्र के किसानों के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया। उनके अनुसार, अनुसंधान और वैज्ञानिक मार्गदर्शन की सुविधा किसानों के नजदीक उपलब्ध होने से सोयाबीन उत्पादन में नई तकनीकों को अपनाने और खेती की लागत को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
सीहोर की कृषि पहचान को मिलेगी नई दिशा
भाऊखेड़ी में केंद्र की स्थापना से सीहोर जिले को सोयाबीन की उन्नत खेती, अनुसंधान और तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की संभावना है। खासतौर पर इछावर और आसपास के सोयाबीन उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। किसान वर्ष में लिया गया यह निर्णय जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है।
