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एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध: तेल और मिल्क प्रोटीन से बनने वाले पनीर पर लगेगा प्रतिबंध; हर महीने है 900 टन की खपत

Wed, 12 Aug 2026 11:35 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Wed, 12 Aug 2026 11:35 AM IST
सार

मध्यप्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को इसे लेकर जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि दूध से बने असली पनीर की जगह दूसरे पदार्थों से तैयार उत्पाद बेचे जाने को लेकर चिंता बढ़ रही है।

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MP News: Ban to be imposed on analogue paneer in Madhya Pradesh; Chief Minister issues directives.
सीएम मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुजरात रवाना होने से पहले बुधवार को मुख्यमंत्री निवास पर अधिकारियों की बैठक में एनालॉग पनीर पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अन्य प्रदेशों की तरह मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएगी। राज्य में प्राकृतिक रूप से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा और प्राकृतिक तरीके से ही पनीर का निर्माण किया जाएगा।
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क्या होता है एनालॉग पनीर?
एनालॉग पनीर दिखने और इस्तेमाल में सामान्य पनीर जैसा होता है, लेकिन इसे पूरी तरह दूध से तैयार नहीं किया जाता। इसमें दूध की जगह या उसके साथ वनस्पति वसा/तेल, मिल्क प्रोटीन और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी लागत सामान्य दूध से बने पनीर की तुलना में कम पड़ती है, इसलिए होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार में इसके इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई जा रही है। सबसे बड़ी समस्या तब होती है जब इसे एनालॉग या नॉन-डेयरी उत्पाद के रूप में स्पष्ट जानकारी दिए बिना असली पनीर बताकर बेचा जाए। इससे उपभोक्ता को पता ही नहीं चलता कि वह दूध से बना पनीर खरीद रहा है या दूसरे पदार्थों से तैयार उत्पाद।
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एक अनुमान के मुताबिक मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की रोजाना आवक और बिक्री लगभग 300 से 400 क्विंटल के आसपास है। इस हिसाब से प्रदेश में हर महीने लगभग 9,000 से 12,000 क्विंटल यानी 900 से 1,200 टन एनालॉग पनीर खप रहा है। बाजार में इतनी बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री को देखते हुए सरकार ने अब इस पर सख्ती बरतने का निर्णय लिया है।

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सेहत के लिए क्यों चिंता का विषय?
एनालॉग पनीर में इस्तेमाल होने वाली वसा और अन्य सामग्री के कारण इसका पोषण मूल्य असली पनीर से अलग हो सकता है। खासकर यदि इसमें अधिक मात्रा में संतृप्त वसा हो, तो इसका नियमित और अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता। इससे नुकसान इसकी सामग्री, मात्रा और लंबे समय तक सेवन पर निर्भर करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अधिक संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन रक्त में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है, जिससे लंबे समय में हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं अगर उत्पाद में अस्वीकृत या असुरक्षित सामग्री का इस्तेमाल हुआ हो तो खाद्य सुरक्षा का जोखिम अलग से पैदा हो सकता है। 


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असली पनीर की जगह इस्तेमाल से पोषण में भी अंतर
दूध से बने पनीर में प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। एनालॉग पनीर की संरचना अलग होने के कारण उसमें वही पोषण मिलना जरूरी नहीं है। इसलिए इसे असली पनीर समझकर खाने वाले उपभोक्ताओं को अपेक्षित पोषण नहीं मिल सकता। FSSAI खाद्य पदार्थों के मानक और सुरक्षा को नियंत्रित करता है।

 

मानवाधिकार आयोग का कड़ा रुख

एनालॉग पनीर की बिक्री को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी सख्त नाराजगी जताई है। आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों को पत्र लिखने का फैसला किया है। आयोग की ओर से विभिन्न राज्यों से इस प्रकार के उत्पाद की बिक्री तथा जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों के संबंध में विस्तृत विवरण मांगा जाएगा। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने स्पष्ट कहा कि एनालॉग पनीर स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है। आयोग इसके लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को नोटिस जारी करके पूछ रहा है कि इस प्रकार के पनीर को बेचने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है।

 

जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल

आयोग के सदस्य ने कहा कि यदि सिगरेट के ऊपर यह लिख दिया जाता है कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, तो क्या यह नुकसान पहुंचाना बंद कर देती है? जब तीन राज्यों की सरकारों ने इस विषय पर एक सराहनीय निर्णय लिया है, तो अन्य सभी राज्यों को भी तत्काल फैसला लेना चाहिए। उन्होंने जांच के तरीकों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एरोबिक स्टार्च की जांच करने से एनालॉग पनीर पकड़ में नहीं आता है। इसलिए आम जनता की सेहत की सुरक्षा के लिए इस मिलावटी खाद्य पदार्थ पर प्रभावी कानूनी प्रतिबंध लगाना बहुत जरूरी हो गया है।

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