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MP: 'मेरे मरने के बाद कौन करेगा अंतिम संस्कार?', इस चिंता में बुजुर्ग ने जीते-जी करा लिया अपना कर्मकांड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
Published by: शिवपुरी ब्यूरो
Updated Sun, 17 May 2026 06:35 PM IST
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सार
शिवपुरी के हाजीनगर गांव में 60 वर्षीय कल्याण पाल ने जीते-जी अपना कर्मकांड और धार्मिक आयोजन कराकर सभी को हैरान कर दिया। अकेलेपन और अंतिम संस्कार की चिंता ने उन्हें यह अनोखा कदम उठाने पर मजबूर किया। पढ़ें ये अनोखा मामला
बुजुर्ग ने करवाया अनोखा भोज।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शिवपुरी के करैरा क्षेत्र के ग्राम हाजीनगर में शनिवार को एक ऐसा आयोजन हुआ, जिसने हर किसी को हैरान भी किया और भावुक भी। यहां रहने वाले 60 वर्षीय कल्याण पाल ने वह सब कुछ जीते जी करा लिया, जो आमतौर पर किसी व्यक्ति की मौत के बाद होता है।
अविवाहित और अकेले जीवन जी रहे कल्याण पाल के मन में वर्षों से एक ही चिंता थी कि मेरे मरने के बाद मेरा अंतिम संस्कार कौन करेगा? कर्मकांड और भंडारा कौन कराएगा? इसी सवाल ने उन्हें ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया, जिसकी अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
अविवाहित और अकेले जीवन जी रहे कल्याण पाल के मन में वर्षों से एक ही चिंता थी कि मेरे मरने के बाद मेरा अंतिम संस्कार कौन करेगा? कर्मकांड और भंडारा कौन कराएगा? इसी सवाल ने उन्हें ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया, जिसकी अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
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भोज करते हुए ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज पहुंचकर खुद कराया अपना कर्मकांड
बताया जा रहा है कि आयोजन से दो दिन पहले कल्याण पाल खुद प्रयागराज पहुंचे। वहां उन्होंने अपने नाम से विधि-विधान के साथ कर्मकांड कराया। इतना ही नहीं, अस्थि विसर्जन की परंपरा की तरह गंगा स्नान भी किया। इसके बाद वह वापस अपने गांव हाजीनगर लौट आए। गांव लौटने के बाद उन्होंने 24 घंटे के लिए सीताराम रामधुन पाठ शुरू कराया। पूरे गांव में धार्मिक माहौल बना रहा और लोग इस अनोखे आयोजन को लेकर चर्चा करते रहे।
बताया जा रहा है कि आयोजन से दो दिन पहले कल्याण पाल खुद प्रयागराज पहुंचे। वहां उन्होंने अपने नाम से विधि-विधान के साथ कर्मकांड कराया। इतना ही नहीं, अस्थि विसर्जन की परंपरा की तरह गंगा स्नान भी किया। इसके बाद वह वापस अपने गांव हाजीनगर लौट आए। गांव लौटने के बाद उन्होंने 24 घंटे के लिए सीताराम रामधुन पाठ शुरू कराया। पूरे गांव में धार्मिक माहौल बना रहा और लोग इस अनोखे आयोजन को लेकर चर्चा करते रहे।
कल्याण पाल कार्यक्रम स्थल पर।
- फोटो : अमर उजाला
हजारों लोगों ने किया भोज
शनिवार धार्मिक कार्यक्रमों के बाद दोपहर करीब 4 बजे से बड़े स्तर पर भंडारा शुरू हुआ। यह आयोजन पूरी तरह मृत्यु भोज की तरह किया गया था, लेकिन फर्क सिर्फ इतना था कि जिसका मृत्यु भोज हो रहा था, वह खुद लोगों का स्वागत करता नजर आ रहा था। गांव और आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोग आयोजन में पहुंचे। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 6 से 7 हजार लोगों ने भंडारे में भोजन किया।
आयोजन में खाने-पीने और बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी। कुछ दिन पहले इस आयोजन का निमंत्रण कार्ड सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। कार्ड में लिखा था कि अपना अपने सामने अंतिम गंगा पूजन, भंडारा
शनिवार धार्मिक कार्यक्रमों के बाद दोपहर करीब 4 बजे से बड़े स्तर पर भंडारा शुरू हुआ। यह आयोजन पूरी तरह मृत्यु भोज की तरह किया गया था, लेकिन फर्क सिर्फ इतना था कि जिसका मृत्यु भोज हो रहा था, वह खुद लोगों का स्वागत करता नजर आ रहा था। गांव और आसपास के क्षेत्रों से हजारों लोग आयोजन में पहुंचे। ग्रामीणों के मुताबिक करीब 6 से 7 हजार लोगों ने भंडारे में भोजन किया।
आयोजन में खाने-पीने और बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी। कुछ दिन पहले इस आयोजन का निमंत्रण कार्ड सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। कार्ड में लिखा था कि अपना अपने सामने अंतिम गंगा पूजन, भंडारा
आमंत्रण का कार्ड।
- फोटो : अमर उजाला
'मुझे तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था,मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था'। कार्ड वायरल होने के बाद से ही लोग यह जानने को उत्सुक थे कि आखिर ऐसा आयोजन क्यों किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक कल्याण अपने पिता के इकलौते बेटे हैं। उनकी शादी भी नहीं हुई। परिवार में ऐसा कोई नहीं है, जो उनके बाद अंतिम संस्कार और कर्मकांड की जिम्मेदारी निभा सके। कल्याण पाल बताते हैं कि उन्हें हमेशा इस बात की चिंता सताती थी कि उनकी मौत के बाद कहीं उनका अंतिम संस्कार और धार्मिक कर्मकांड अधूरे न रह जाएं।
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इसी वजह से उन्होंने सब कुछ अपनी आंखों के सामने ही करा लिया। कल्याण पाल ने कहा कि अब उन्हें किसी बात की चिंता नहीं है। उनका मानना है कि इंसान को जीवन में सबसे बड़ा सुकून तब मिलता है, जब वह अपनी जिम्मेदारियां पूरी कर ले। उन्होंने भावुक होकर कहा कि अब जब भी मौत आएगी, मैं सुकून से मर सकूंगा, क्योंकि अपने अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कर्मकांड मैं जीते जी देख चुका हूं।
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