MP: नर्मदा किनारे के तीन गांव जल जीवन मिशन से बाहर, हजारों लोग दूषित पानी पीने को मजबूर; व्यवस्था ध्वस्त
खंडवा जिले की मोरटक्का माफी पंचायत के ओंकारेश्वर रोड, मोरटक्का और खेड़ीघाट गांव जल जीवन मिशन से वंचित हैं। हजारों ग्रामीण नर्मदा, कुओं और बावड़ियों का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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विस्तार
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (नल-जल योजना) का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, लेकिन खंडवा जिले की पुनासा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मोरटक्का माफी के तीन गांव ओंकारेश्वर रोड, मोरटक्का और खेड़ीघाट आज भी इस योजना के लाभ से वंचित हैं। हालात यह हैं कि हजारों ग्रामीण नर्मदा नदी, कुओं और बावड़ियों के बिना उपचारित पानी पर निर्भर हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। विडंबना यह है कि इसी ग्राम पंचायत के अन्य गांवों में जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था पहुंच चुकी है, लेकिन इन तीन गांवों को योजना से बाहर रखा गया। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
ओंकारेश्वर का प्रवेश द्वार, फिर भी शुद्ध पानी नहीं
नर्मदा तट पर बसे ओंकारेश्वर रोड, मोरटक्का और खेड़ीघाट धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए इसी मार्ग से गुजरते हैं। इसके बावजूद यहां के निवासी आज तक शुद्ध पेयजल सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से सीधे नर्मदा नदी का पानी उपयोग कर रहे हैं। बारिश के मौसम में नदी, कुओं और बावड़ियों का पानी दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे डायरिया, पीलिया और टायफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है।
अधूरा रह गया जल जीवन मिशन का लक्ष्य
15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए जल जीवन मिशन का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) उपलब्ध कराना था। पहले इसकी समय-सीमा वर्ष 2024 तय की गई थी, जिसे बढ़ाकर 2026 कर दिया गया। प्रदेश के अनेक गांवों में योजना सफल रही है, लेकिन मोरटक्का माफी पंचायत के इन तीन गांवों तक इसका लाभ नहीं पहुंच सका। ग्रामीणों का आरोप है कि यह विभागीय लापरवाही और सर्वेक्षण में हुई त्रुटियों का परिणाम है।
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स्वास्थ्य से खिलवाड़ का आरोप
केवट समाज जिला अध्यक्ष दशरथ केवट, जीतू पाल, विनोद केवट और छोटू चौहान ने कहा कि इन गांवों को योजना से बाहर रखना हजारों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। दशरथ केवट ने कहा कि जब पंचायत के अन्य गांवों तक पाइपलाइन पहुंच चुकी है तो इन्हीं गांवों को बाहर रखने के कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ग्राम पंचायत मोरटक्का माफी के सरपंच बद्रीलाल बरेला और उपसरपंच प्रेमलाल पुनासिया ने बताया कि इस संबंध में खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, मांधाता विधायक नारायण पटेल, कलेक्टर ऋषभ गुप्ता, जिला पंचायत सीईओ सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
45 वर्ष पुरानी जल व्यवस्था हो चुकी ध्वस्त
पूर्व सरपंच देवराम पटेल (76) ने बताया कि करीब 45 वर्ष पहले इन गांवों के लिए दो ट्यूबवेल और छोटी जल टंकियों की व्यवस्था बनाई गई थी। समय के साथ पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और पूरी व्यवस्था लगभग समाप्त हो गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन के सर्वेक्षण के दौरान पुराने रिकॉर्ड के आधार पर यह मान लिया गया कि गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था उपलब्ध है। इसी वजह से इन गांवों को नई योजना में शामिल नहीं किया गया।
सिंहस्थ-2028 से पहले समाधान जरूरी
ओंकारेश्वर रोड निवासी समाजसेवी अजय कुमार मिश्रा (75) ने कहा कि गांव की महिलाओं को प्रतिदिन पानी लाने में कई घंटे खर्च करने पड़ते हैं, जिससे उनके घरेलू और आर्थिक कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 के दौरान करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन से ओंकारेश्वर दर्शन के लिए इसी मार्ग से गुजरेंगे, इसलिए इससे पहले पेयजल समस्या का समाधान आवश्यक है।
जांच और प्रस्ताव की तैयारी
खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि वे कलेक्टर और संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर पूछेंगे कि इन गांवों को योजना में क्यों शामिल नहीं किया गया। जल जीवन मिशन के जिला प्रभारी मयंक रिछारिया ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी। प्रस्ताव तैयार कर संबंधित विभाग को भेजा जाएगा और ग्रामीणों को योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं ग्राम पंचायत सचिव शेरूसिंह वर्मा ने बताया कि मामले की जानकारी विभाग को भेज दी गई है और गांवों के योजना से छूटने के कारणों की जांच की जा रही है।

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