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Tikamgarh: 56.67 लाख जारी, फिर भी 110 सरकारी स्कूलों में नहीं पहुंची बिजली, अंधेरे में पढ़ने को मजबूर छात्र
Thu, 23 Jul 2026 10:35 AM IST
टीकमगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़
Published by: टीकमगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2026 10:35 AM IST
सार
टीकमगढ़ जिले के 110 सरकारी स्कूलों में बिजली कनेक्शन के लिए 56.67 लाख रुपये जारी होने के बावजूद अब तक बिजली नहीं पहुंची है। बिजली के अभाव में हजारों छात्र अंधेरे में पढ़ाई करने और आधुनिक शिक्षा सुविधाओं से वंचित रहने को मजबूर हैं।
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विस्तार
सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, लेकिन टीकमगढ़ जिले के 110 शासकीय स्कूल आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। हैरानी की बात यह है कि इन स्कूलों में बिजली कनेक्शन के लिए वर्ष 2025 में शासन द्वारा 56 लाख 67 हजार रुपये बिजली विभाग को उपलब्ध कराए जा चुके हैं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी स्कूलों में बिजली नहीं पहुंच सकी।
इन स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चे आज भी अंधेरे कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में आसमान में बादल छाते ही कक्षाओं में अंधेरा छा जाता है और ब्लैकबोर्ड तक साफ दिखाई नहीं देता। कई बार शिक्षक बच्चों को दरवाजे या खिड़की के पास बैठाकर पढ़ाने को मजबूर होते हैं। बिजली नहीं होने से गर्मी के मौसम में पंखे नहीं चल पाते, वहीं डिजिटल शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ने का सपना भी अधूरा है।
शिक्षकों का पक्ष
शिक्षकों का कहना है कि बिजली कनेक्शन के लिए कई बार विभागों को पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक मामला कागजी कार्रवाई और विभागीय प्रक्रिया में ही अटका हुआ है।जिला परियोजना समन्वयक आरपी त्रिपाठी ने बताया कि समस्या को गंभीरता से लिया गया है। बिजली विभाग को हाल ही में फिर पत्र भेजा गया है और जल्द समाधान का प्रयास किया जा रहा है।
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'संबंधित फाइल विभाग में लंबित'
वहीं, बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता अजमेर सिंह ने बताया कि फंड ट्रांसफर से जुड़ी कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने स्वीकार किया कि जिले के 110 स्कूलों में बिजली कनेक्शन होना बाकी है और संबंधित फाइल विभाग में लंबित है।
ये भी पढ़ें- रीवा कलेक्टर की RTO कार्यालय में दबिश: 'कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे', एजेंटों को लगाई फटकार; वीडियो
अब सवाल यह है कि जब बिजली कनेक्शन के लिए लाखों रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं, तो आखिर 110 स्कूलों के बच्चे कब तक अंधेरे में पढ़ाई करते रहेंगे? यह सिर्फ बिजली का सवाल नहीं, बल्कि उन हजारों बच्चों के भविष्य का सवाल है, जिनके सपनों पर विभागीय लापरवाही का अंधेरा छाया हुआ है।
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इन स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों बच्चे आज भी अंधेरे कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में आसमान में बादल छाते ही कक्षाओं में अंधेरा छा जाता है और ब्लैकबोर्ड तक साफ दिखाई नहीं देता। कई बार शिक्षक बच्चों को दरवाजे या खिड़की के पास बैठाकर पढ़ाने को मजबूर होते हैं। बिजली नहीं होने से गर्मी के मौसम में पंखे नहीं चल पाते, वहीं डिजिटल शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ने का सपना भी अधूरा है।
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शिक्षकों का पक्ष
शिक्षकों का कहना है कि बिजली कनेक्शन के लिए कई बार विभागों को पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक मामला कागजी कार्रवाई और विभागीय प्रक्रिया में ही अटका हुआ है।जिला परियोजना समन्वयक आरपी त्रिपाठी ने बताया कि समस्या को गंभीरता से लिया गया है। बिजली विभाग को हाल ही में फिर पत्र भेजा गया है और जल्द समाधान का प्रयास किया जा रहा है।
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'संबंधित फाइल विभाग में लंबित'
वहीं, बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता अजमेर सिंह ने बताया कि फंड ट्रांसफर से जुड़ी कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने स्वीकार किया कि जिले के 110 स्कूलों में बिजली कनेक्शन होना बाकी है और संबंधित फाइल विभाग में लंबित है।
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अब सवाल यह है कि जब बिजली कनेक्शन के लिए लाखों रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं, तो आखिर 110 स्कूलों के बच्चे कब तक अंधेरे में पढ़ाई करते रहेंगे? यह सिर्फ बिजली का सवाल नहीं, बल्कि उन हजारों बच्चों के भविष्य का सवाल है, जिनके सपनों पर विभागीय लापरवाही का अंधेरा छाया हुआ है।
