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MP News: एआई, डेटा साइंस, ब्लॉकचेन... नई इंजीनियरिंग ब्रांचों से छात्रों ने बनाई दूरी, सीएसई का दबदबा बरकरार
Thu, 30 Jul 2026 03:25 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 30 Jul 2026 03:25 PM IST
सार
इंजीनियरिंग में नई तकनीकों पर आधारित शाखाएं बढ़ रही हैं, लेकिन छात्रों की पहली पसंद अब भी कंप्यूटर साइंस बनी हुई है। डेटा साइंस, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, आईओटी और रोबोटिक्स जैसी शाखाओं में दाखिले सीमित हैं। 75,249 सीटों में अब तक 20,757 प्रवेश हुए हैं, यानी 54,492 सीटें खाली हैं। आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि छात्र नई तकनीक के साथ-साथ रोजगार, प्लेसमेंट और भरोसेमंद करियर विकल्प को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
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इंजीनियरिंग में छात्रों की पसंद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंजीनियरिंग शिक्षा में तकनीक तेजी से बदल रही है। कॉलेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, लेकिन विद्यार्थियों की पसंद अभी भी उतनी तेजी से नहीं बदली है। दाखिलों के ताजा आंकड़े बताते हैं कि नई तकनीक वाली कई शाखाएं छात्रों को आकर्षित करने में पिछड़ रही हैं, जबकि कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग अब भी सबसे मजबूत पसंद बनी हुई है। उपलब्ध 57 शाखाओं की 75,249 सीटों में अब तक 20,757 प्रवेश हुए हैं। यानी करीब 27.6 प्रतिशत सीटें ही भर पाई हैं, जबकि 54,492 सीटें खाली हैं। खास बात यह है कि नई विशेषज्ञता वाली कई शाखाओं में सीटें कम होने के बावजूद उनके मुकाबले दाखिलों की संख्या बेहद सीमित है।
डेटा साइंस, ब्लॉकचेन और आईओटी में सीमित दाखिले
डेटा साइंस की 255 सीटों में सिर्फ 23 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इसी तरह कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग-ब्लॉकचेन की 75 सीटों में 46, इंटरनेट ऑफ थिंग्स की 75 में 45 और एआई एवं रोबोटिक्स की 75 में 39 सीटें ही भर पाई हैं। इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग में 75 सीटों के मुकाबले 32 प्रवेश हुए हैं। वहीं कंप्यूटर इंजीनियरिंग की 112 सीटों में सिर्फ 2 दाखिले हुए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि नई विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रमों का नाम आकर्षक होने के बावजूद विद्यार्थी बड़ी संख्या में इनकी ओर नहीं जा रहे हैं।
साइबर सुरक्षा समेत कई ब्रांच में शून्य दाखिले
सबसे कमजोर स्थिति कुछ नई शाखाओं की है। साइबर सुरक्षा की 75 सीटों पर अब तक एक भी प्रवेश नहीं हुआ है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की 75, बायोटेक्नोलॉजी की 37 और एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग की 37 सीटों पर भी कोई दाखिला नहीं हुआ। यानी जिन तकनीकों को भविष्य के रोजगार बाजार से जोड़कर देखा जा रहा है, उनके नाम पर अभी विद्यार्थियों का भरोसा व्यापक स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है।
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एआई में रुचि, लेकिन सीएसई सबसे आगे
हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े पाठ्यक्रमों में छात्रों की रुचि पूरी तरह कमजोर नहीं है। एआई एंड मशीन लर्निंग की 1,596 सीटों में 498, एआई एंड डेटा साइंस की 1,012 में 325 और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की 300 में 142 सीटें भर चुकी हैं। लेकिन इसके बावजूद कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग सबसे आगे है। सीएसई की 21,889 सीटों में 6,557 प्रवेश हुए हैं। यानी आधुनिक तकनीक वाले विकल्पों के बीच भी छात्रों का सबसे बड़ा भरोसा अब तक मूल कंप्यूटर साइंस पर ही है।
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मैकेनिकल और सिविल में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली
रुझान सिर्फ नई ब्रांचों तक सीमित नहीं है। पारंपरिक शाखाओं में भी दाखिले अपेक्षा के मुताबिक नहीं हैं। मैकेनिकल की 8,624 सीटों में 1,279, सिविल की 7,201 में 1,052 और इलेक्ट्रिकल की 2,016 सीटों में 548 प्रवेश हुए हैं। इससे संकेत मिलता है कि विद्यार्थी अब सिर्फ इंजीनियरिंग की कोई भी शाखा चुनने के बजाय रोजगार, प्लेसमेंट और भविष्य की स्वीकार्यता को ध्यान में रखकर विकल्प चुन रहे हैं।
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नई ब्रांचों में दाखिले कम होने की वजह सिर्फ छात्रों की पसंद नहीं
प्रो. उदय चौरसिया, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग, यूआईटी-आरजीपीवी भोपाल के अनुसार, एआई, डेटा साइंस, ब्लॉकचेन और दूसरी नई विशेषज्ञता वाली शाखाओं में कम दाखिलों की बड़ी वजह इन पाठ्यक्रमों को लेकर छात्रों और अभिभावकों में अभी पूरी स्पष्टता नहीं होना है। कई विद्यार्थियों को यह पता नहीं होता कि इन डिग्रियों के बाद करियर के विकल्प क्या होंगे, किस तरह की नौकरियां मिलेंगी और आगे उच्च शिक्षा के कितने अवसर हैं। ऐसे में वे ऐसी शाखा चुनना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं, जिसका नाम और करियर पथ पहले से स्थापित है। उनका कहना है कि कोर सीएसई में पढ़ने वाले छात्रों के लिए आगे विशेषज्ञता बदलने के विकल्प खुले रहते हैं। वे बाद में एआई, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, क्लाउड जैसे क्षेत्रों में जा सकते हैं। इसके मुकाबले किसी एक विशेषज्ञता वाली शाखा में शुरुआत से ही सीमित क्षेत्र चुनने की धारणा छात्रों में बनी हुई है। एक दूसरी बड़ी वजह पाठ्यक्रमों की नई शुरुआत और रोजगार बाजार को लेकर भरोसे की कमी है।
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डेटा साइंस, ब्लॉकचेन और आईओटी में सीमित दाखिले
डेटा साइंस की 255 सीटों में सिर्फ 23 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है। इसी तरह कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग-ब्लॉकचेन की 75 सीटों में 46, इंटरनेट ऑफ थिंग्स की 75 में 45 और एआई एवं रोबोटिक्स की 75 में 39 सीटें ही भर पाई हैं। इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग में 75 सीटों के मुकाबले 32 प्रवेश हुए हैं। वहीं कंप्यूटर इंजीनियरिंग की 112 सीटों में सिर्फ 2 दाखिले हुए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि नई विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रमों का नाम आकर्षक होने के बावजूद विद्यार्थी बड़ी संख्या में इनकी ओर नहीं जा रहे हैं।
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साइबर सुरक्षा समेत कई ब्रांच में शून्य दाखिले
सबसे कमजोर स्थिति कुछ नई शाखाओं की है। साइबर सुरक्षा की 75 सीटों पर अब तक एक भी प्रवेश नहीं हुआ है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की 75, बायोटेक्नोलॉजी की 37 और एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग की 37 सीटों पर भी कोई दाखिला नहीं हुआ। यानी जिन तकनीकों को भविष्य के रोजगार बाजार से जोड़कर देखा जा रहा है, उनके नाम पर अभी विद्यार्थियों का भरोसा व्यापक स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है।
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एआई में रुचि, लेकिन सीएसई सबसे आगे
हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े पाठ्यक्रमों में छात्रों की रुचि पूरी तरह कमजोर नहीं है। एआई एंड मशीन लर्निंग की 1,596 सीटों में 498, एआई एंड डेटा साइंस की 1,012 में 325 और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की 300 में 142 सीटें भर चुकी हैं। लेकिन इसके बावजूद कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग सबसे आगे है। सीएसई की 21,889 सीटों में 6,557 प्रवेश हुए हैं। यानी आधुनिक तकनीक वाले विकल्पों के बीच भी छात्रों का सबसे बड़ा भरोसा अब तक मूल कंप्यूटर साइंस पर ही है।
यह भी पढ़ें-जानिए कौन हैं 'लेडी सिंघम' IPS मोनिका शुक्ला? किसान आंदोलन में बस के सामने चट्टान बनकर हो गईं थी खड़ी
मैकेनिकल और सिविल में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली
रुझान सिर्फ नई ब्रांचों तक सीमित नहीं है। पारंपरिक शाखाओं में भी दाखिले अपेक्षा के मुताबिक नहीं हैं। मैकेनिकल की 8,624 सीटों में 1,279, सिविल की 7,201 में 1,052 और इलेक्ट्रिकल की 2,016 सीटों में 548 प्रवेश हुए हैं। इससे संकेत मिलता है कि विद्यार्थी अब सिर्फ इंजीनियरिंग की कोई भी शाखा चुनने के बजाय रोजगार, प्लेसमेंट और भविष्य की स्वीकार्यता को ध्यान में रखकर विकल्प चुन रहे हैं।
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नई ब्रांचों में दाखिले कम होने की वजह सिर्फ छात्रों की पसंद नहीं
प्रो. उदय चौरसिया, एसोसिएट प्रोफेसर, कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग विभाग, यूआईटी-आरजीपीवी भोपाल के अनुसार, एआई, डेटा साइंस, ब्लॉकचेन और दूसरी नई विशेषज्ञता वाली शाखाओं में कम दाखिलों की बड़ी वजह इन पाठ्यक्रमों को लेकर छात्रों और अभिभावकों में अभी पूरी स्पष्टता नहीं होना है। कई विद्यार्थियों को यह पता नहीं होता कि इन डिग्रियों के बाद करियर के विकल्प क्या होंगे, किस तरह की नौकरियां मिलेंगी और आगे उच्च शिक्षा के कितने अवसर हैं। ऐसे में वे ऐसी शाखा चुनना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं, जिसका नाम और करियर पथ पहले से स्थापित है। उनका कहना है कि कोर सीएसई में पढ़ने वाले छात्रों के लिए आगे विशेषज्ञता बदलने के विकल्प खुले रहते हैं। वे बाद में एआई, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, क्लाउड जैसे क्षेत्रों में जा सकते हैं। इसके मुकाबले किसी एक विशेषज्ञता वाली शाखा में शुरुआत से ही सीमित क्षेत्र चुनने की धारणा छात्रों में बनी हुई है। एक दूसरी बड़ी वजह पाठ्यक्रमों की नई शुरुआत और रोजगार बाजार को लेकर भरोसे की कमी है।
