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Bhopal News: 30 हजार की मांग पर अड़े एमबीबीएस इंटर्न, अब जूनियर डॉक्टर भी साथ, काली पट्टी बांधकर किया काम
Thu, 30 Jul 2026 04:47 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 30 Jul 2026 04:47 PM IST
सार
एमपी में 30 हजार रुपये स्टाइपेंड की मांग को लेकर एमबीबीएस इंटर्न का 24 जुलाई से कामबंद आंदोलन जारी है। सरकार की ओर से करीब 20% बढ़ोतरी का प्रस्ताव सामने आया है, लेकिन लिखित आदेश जारी नहीं होने से सहमति नहीं बनी। अब जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने काली पट्टी बांधकर आंदोलन को समर्थन दिया है।
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जूनियर डॉक्टर ड्यूटी के दौरान काली पट्टी बांधते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने का आंदोलन अब और व्यापक हो गया है। 30 जुलाई को जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) ने इंटर्नों के आंदोलन को समर्थन दिया और काली पट्टी बांधकर चिकित्सीय कार्य किया। जेडीए के पदाधिकारियों और इंटर्न प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में आंदोलन की स्थिति और मांगों पर चर्चा हुई। इसके बाद जेडीए ने आंदोलन के समर्थन का फैसला लिया। इंटर्न डॉक्टर मौजूदा 14,337 रुपये मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न 24 जुलाई से कामबंद आंदोलन कर रहे हैं।
सरकार 20% बढ़ोतरी को तैयार, लेकिन आदेश नहीं
आंदोलन के बीच सरकार की ओर से इंटर्न स्टाइपेंड में करीब 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव की बात सामने आई है। हालांकि इंटर्नों का कहना है कि अभी तक इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है। यही वजह है कि प्रस्ताव और बातचीत के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हो पाया है। इंटर्नों का कहना है कि सिर्फ मौखिक आश्वासन या प्रस्ताव के आधार पर वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। उनकी मांग है कि सरकार स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक लिखित आदेश जारी करे। इसके बाद ही आंदोलन वापस लेने पर फैसला किया जाएगा।
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30 हजार की मांग पर कायम इंटर्न
इंटर्नों का कहना है कि एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पतालों में नियमित चिकित्सकीय सेवाओं का हिस्सा रहते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में कम है। इसी आधार पर वे इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। 24 जुलाई से शुरू हुए आंदोलन के तहत इंटर्नों ने चिकित्सकीय कार्य का बहिष्कार किया है। इससे पहले भी उन्होंने ज्ञापन, विरोध प्रदर्शन और अन्य शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाई थी।
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भूख हड़ताल तक पहुंचा था आंदोलन
स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर आंदोलनकारी इंटर्नों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की भी तैयारी की थी। भोपाल में दो इंटर्नों के अनशन पर बैठने की बात सामने आई थी। बाद में अधिकारियों से बातचीत और आश्वासन के बाद भूख हड़ताल को टाल दिया गया, लेकिन कामबंद आंदोलन जारी रखा गया। इंटर्नों का कहना है कि आंदोलन का सबसे अहम मुद्दा अब यही है कि सरकार बढ़ोतरी पर जो फैसला कर रही है, उसे कागज पर भी जारी करे।
जेडीए ने काली पट्टी बांधकर दिया समर्थन
30 जुलाई को वॉयस ऑफ इंटर्न्स, मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों ने जेडीए के पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ बैठक की। इंटर्न प्रतिनिधियों ने आंदोलन की पूरी स्थिति और अपनी मांगों की जानकारी दी। चर्चा के बाद जेडीए ने आंदोलन को समर्थन देने का निर्णय लिया। इसके बाद जेडीए के सदस्यों ने काली पट्टी बांधकर चिकित्सकीय कार्य किया। इंटर्न संगठनों ने इसे मेडिकल समुदाय की एकजुटता का बड़ा संदेश बताया है। अब आंदोलन को जूनियर डॉक्टरों के समर्थन से सरकार पर जल्द समाधान का दबाव और बढ़ गया है।
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आश्वासन नहीं, लिखित आदेश की मांग
इंटर्नों का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत हो चुकी है और 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव की जानकारी भी सामने आ चुकी है। ऐसे में अब मामला केवल लिखित आदेश का है। उनका कहना है कि जब तक आदेश जारी नहीं होता, प्रस्ताव को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। इसी कारण 20 प्रतिशत बढ़ोतरी की पहल के बावजूद कामबंद आंदोलन जारी है।
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सरकार 20% बढ़ोतरी को तैयार, लेकिन आदेश नहीं
आंदोलन के बीच सरकार की ओर से इंटर्न स्टाइपेंड में करीब 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव की बात सामने आई है। हालांकि इंटर्नों का कहना है कि अभी तक इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है। यही वजह है कि प्रस्ताव और बातचीत के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हो पाया है। इंटर्नों का कहना है कि सिर्फ मौखिक आश्वासन या प्रस्ताव के आधार पर वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। उनकी मांग है कि सरकार स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक लिखित आदेश जारी करे। इसके बाद ही आंदोलन वापस लेने पर फैसला किया जाएगा।
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30 हजार की मांग पर कायम इंटर्न
इंटर्नों का कहना है कि एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पतालों में नियमित चिकित्सकीय सेवाओं का हिस्सा रहते हैं। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में कम है। इसी आधार पर वे इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। 24 जुलाई से शुरू हुए आंदोलन के तहत इंटर्नों ने चिकित्सकीय कार्य का बहिष्कार किया है। इससे पहले भी उन्होंने ज्ञापन, विरोध प्रदर्शन और अन्य शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी मांग सरकार तक पहुंचाई थी।
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भूख हड़ताल तक पहुंचा था आंदोलन
स्टाइपेंड वृद्धि को लेकर आंदोलनकारी इंटर्नों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की भी तैयारी की थी। भोपाल में दो इंटर्नों के अनशन पर बैठने की बात सामने आई थी। बाद में अधिकारियों से बातचीत और आश्वासन के बाद भूख हड़ताल को टाल दिया गया, लेकिन कामबंद आंदोलन जारी रखा गया। इंटर्नों का कहना है कि आंदोलन का सबसे अहम मुद्दा अब यही है कि सरकार बढ़ोतरी पर जो फैसला कर रही है, उसे कागज पर भी जारी करे।
जेडीए ने काली पट्टी बांधकर दिया समर्थन
30 जुलाई को वॉयस ऑफ इंटर्न्स, मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों ने जेडीए के पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ बैठक की। इंटर्न प्रतिनिधियों ने आंदोलन की पूरी स्थिति और अपनी मांगों की जानकारी दी। चर्चा के बाद जेडीए ने आंदोलन को समर्थन देने का निर्णय लिया। इसके बाद जेडीए के सदस्यों ने काली पट्टी बांधकर चिकित्सकीय कार्य किया। इंटर्न संगठनों ने इसे मेडिकल समुदाय की एकजुटता का बड़ा संदेश बताया है। अब आंदोलन को जूनियर डॉक्टरों के समर्थन से सरकार पर जल्द समाधान का दबाव और बढ़ गया है।
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आश्वासन नहीं, लिखित आदेश की मांग
इंटर्नों का कहना है कि सरकार के साथ बातचीत हो चुकी है और 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव की जानकारी भी सामने आ चुकी है। ऐसे में अब मामला केवल लिखित आदेश का है। उनका कहना है कि जब तक आदेश जारी नहीं होता, प्रस्ताव को अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। इसी कारण 20 प्रतिशत बढ़ोतरी की पहल के बावजूद कामबंद आंदोलन जारी है।
