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Ujjain Cyber Fraud: छात्रों ने ट्रेडिंग के लालच में चुनी क्राइम की राह, दिल्ली की गैंग से मिलकर किया था फ्रॉड

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Fri, 19 Jun 2026 08:37 AM IST
सार

उज्जैन पुलिस ने साइबर ठगी के एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन बीटेक पास युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी लिंक के जरिए ठगे गए पैसे से सराफा कारोबारियों से सोना खरीदते थे और फिर उसे बेचकर रकम को क्रिप्टो ट्रेडिंग में लगाते थे।

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BTech Grads Turn Cyber Criminals: Lured by Trading, Joined Delhi Gang for 'Golden Fraud'
दिल्ली गैंग से जुड़कर किया जा रहा था गोल्डन फ्रॉड।

विस्तार

 उज्जैन पुलिस ने साइबर ठगी के एक हाई-प्रोफाइल अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। एसपी प्रदीप शर्मा ने खुलासा किया कि पकड़े गए तीनों आरोपी बीटेक पास और उच्च शिक्षित हैं। कशिश बढ़ानी, राहुल उर्फ शानू और अनिमेष उर्फ अनुराग उर्फ अन्नी पिछले तीन साल से क्रिप्टो ट्रेडिंग में सक्रिय थे।

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गैंग से जुड़े और गोल्ड फ्रॉड का नेटवर्क खड़ा कर दिया
ज्यादा मुनाफे के लालच में ये दिल्ली की साइबर गैंग से जुड़े और गोल्ड फ्रॉड का नेटवर्क खड़ा कर दिया। माधवनगर पुलिस ने तीनों को होटल हीरा पैलेस, सखीपुरा से गिरफ्तार किया है। एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि छह जून को कथित अनुराग कहार ने डीपीके गोल्ड शोरूम से 95 हजार रुपये की 6 ग्राम सोने की क्वाइन खरीदी। क्यूआर कोड से भुगतान के कुछ देर बाद ही शोरूम का बैंक खाता होल्ड हो गया। शिकायत पर माधवनगर थाने में केस दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि आरोपियों ने ट्रेडिंग के लिए पैसा जुटाने के उद्देश्य से तुर्की कम्युनिकेशन एप के जरिए दिल्ली के साइबर अपराधियों से संपर्क किया।
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दिल्ली की मुख्य तकनीकी टीम अलग-अलग राज्यों में लोगों को फर्जी लिंक भेजकर ठगी करती थी। इस टीम के पास यह डेटा रहता था कि किस बैंक, पेटीएम या एक्सचेंज अकाउंट में कितनी लिमिट बाकी है। उसी लिमिट के हिसाब से उज्जैन के आरोपियों को टारगेट दिया जाता था।

ऐसे होती थी ठगी
QR की डील
- गिरोह के सदस्य उज्जैन के प्रतिष्ठित सराफा शोरूम पर जाकर गोल्ड क्वाइन का सौदा करते थे।
कोड ट्रांसफर - भुगतान के लिए शोरूम का क्यूआर कोड स्कैन कर उसकी जानकारी दिल्ली टीम को भेज देते थे।
लिंक का जाल - दिल्ली टीम देश के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति को 'मोबाइल अपडेट' का लिंक भेजकर उसका फोन हैक कर लेती थी।
खाता खाली - फोन रीस्टार्ट होते ही पीड़ित के खाते से पैसे सीधे उज्जैन के ज्वेलर के क्यूआर कोड वाले खाते में ट्रांसफर हो जाते थे।
मनी लॉन्ड्रिंग - आरोपी शोरूम से सोना लेकर दूसरी दुकान पर बेच देते थे और नकदी को बायनेन्स पर यूएसडीटी ट्रेडिंग में लगा देते थे।

तीन राज्यों में फैला जाल
इस पूरी ठगी का जाल तीन राज्यों में फैला हुआ था। इसका खुलासा उस समय हुआ जब ठगी के शिकार अन्य लोग भी सामने आए। राजस्थान के नागौर निवासी मोहम्मद नासिर से 2,88,630 रुपये की ठगी की गई, जिनमें से 91,100 रुपये महावीर ज्वैलर्स के खाते में भेजे गए। पंजाब के एसएएस नगर निवासी सुरिंदर सिंह से 95,000 रुपये ठगे गए और पूरी राशि डीपीके ज्वैलर्स के खाते में ट्रांसफर की गई। वहीं उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी मनोज कुमार से 99,000 रुपये की ठगी कर यह राशि माहेश्वरी ज्वैलर्स के खाते में भेजी गई।

उज्जैन पुलिस जाएगी दिल्ली
एसपी ने कहा कि आरोपी तीन साल से सक्रिय हैं, इसलिए देशभर में कई और वारदातों की आशंका है। मुख्य सरगनाओं को पकड़ने के लिए उज्जैन पुलिस की विशेष टीम जल्द दिल्ली रवाना होगी।

कोर्ट से मिला रिमांड, क्या मिला आरोपियों से
नर्मदापुरम के तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया है। इनके पास से मोबाइल फोन, फर्जी आईडी कार्ड, गोल्ड खरीदने के बिल और अन्य अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं। मामले में बीएनएस की धारा 338, 336(3), 340(2), 61(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66 जोड़ी गई है। एसपी ने स्पष्ट किया कि दिल्ली गैंग और स्थानीय मददगारों समेत पूरी चेन को आरोपी बनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में कई बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।



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जानिए कौन हैं ये 'ट्रेडिंग गैंग' के सदस्य
कशिश बढ़ानी (29 वर्ष), राहुल उर्फ शानू (26 वर्ष) और अनिमेष उर्फ अनुराग उर्फ अन्नी (21 वर्ष) सभी नर्मदापुरम के रहने वाले हैं। ये बीटेक पास और उच्च शिक्षित हैं। इनका मकसद क्रिप्टो ट्रेडिंग के लिए जल्द पैसा कमाना था। दिल्ली की तकनीकी टीम फर्जी लिंक भेजकर लोगों के खाते खाली करती थी। किस अकाउंट में कितनी लिमिट उपलब्ध है, इसकी पूरी जानकारी इनके पास रहती थी।

दिल्ली गैंग से जुड़कर किया जा रहा था गोल्डन फ्रॉड

पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया।

 

 

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