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Ujjain News: शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले काल सेंटर का भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तार; लाखों का माल जब्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Sat, 04 Apr 2026 08:31 AM IST
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सार
उज्जैन पुलिस ने शेयर ट्रेडिंग के नाम पर निवेशकों को ठगने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। आरोपियों ने नकली ग्राफ और प्रॉफिट दिखाकर निवेशकों को फंसाया। नेटवर्क समन्वयक सहित कुछ आरोपी अभी फरार हैं।
मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शेयर मार्केट में निवेशकों को फायदा दिलाने का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाले फर्जी काल सेंटर का उज्जैन पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मुख्य संचालक सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और इंदौर स्थित फर्जी “एलीस ब्लू” ब्रोकरेज ऑफिस पर दबिश देकर लाखों रुपए का माल जब्त किया है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
जीवाजीगंज थाना प्रभारी विवेक कनोडिया के अनुसार, सूरज राठौर निवासी राधामोहन की गली, अंकपात मार्ग, उज्जैन ने 25 मार्च को राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें शेयर मार्केट में ट्रेडिंग कर अधिक लाभ दिलाने का झांसा देकर कुल 70,000 रुपये की ठगी की। शिकायत साइबर पोर्टल पर पंजीकृत होने के बाद थाना जीवाजीगंज पुलिस को मिली।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तकनीकी और मैनुअल जांच शुरू की। इसमें मोबाइल नंबर, बैंक खाते, यूपीआई ट्रांजेक्शन और डिजिटल फुटप्रिंट का विश्लेषण किया गया। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर अपराध क्रमांक 76/2026, धारा 319(2), 318(4), 3(5) भारतीय दंड संहिता एवं 66-D आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि “महिंद्रा ट्रेडिंग” एप के डेवलपर और तकनीकी सहयोगियों की पहचान की जा रही है। साथ ही फर्जी बैंक खातों के स्रोत और अन्य पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी जारी है।
आरोपियों तक कैसे पहुंची पुलिस
जांच के दौरान मिले मोबाइल नंबर और बैंक खातों के विश्लेषण से संदेही सौरभ यादव निवासी इंदौर की पहचान हुई। उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। सौरभ यादव ने फर्जी शेयर ट्रेडिंग नेटवर्क के संचालन की महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने थाना विजयनगर, जिला इंदौर स्थित ऑर्बिट मॉल के पीछे PU-4 क्षेत्र, प्लॉट नंबर 230 की मल्टी के तृतीय तल पर संचालित “एलीस ब्लू” ब्रोकरेज फर्म का पता लगाया।
2 अप्रैल को पुलिस ने दबिश देकर मुख्य संचालक अरुण लोधी (पिता: इमरतलाल लोधी, 27 वर्ष) को गिरफ्तार किया। इसके अलावा उसके सहयोगी नीरज आदिवासी (पिता: मुंशी आदिवासी, 33 वर्ष), राहुल पाटीदार (पिता: राधेश्याम पाटीदार, 31 वर्ष) और नेटवर्क समन्वयक सौरभ यादव (25 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया।
फर्जी सिम और डेबिट कार्ड जब्त
दबिश के दौरान कार्यालय से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक और आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई। इसमें शामिल हैं:
पुलिस के अनुसार इनका इस्तेमाल संगठित साइबर ठगी में किया जा रहा था।
ये भी पढ़ें- ये कैसा इलाज?: झाड़फूंक के नाम पर महिला से मारपीट, लात-घूंसों से पिटती रही पत्नी और पति चुपचाप देखता रहा
नकली ग्राफ और प्रॉफिट दिखाकर फंसा रहे थे निवेशक
इस फर्जी कंपनी में लगभग 10-12 कर्मचारी कार्यरत थे। कर्मचारियों को स्क्रिप्ट आधारित कॉलिंग के जरिए निवेशकों को फंसाने का प्रशिक्षण दिया जाता था। विभिन्न स्रोतों से डिमेट अकाउंट धारकों और निवेशकों का डेटा खरीदा जाता था। “महिंद्रा ट्रेडिंग” नामक फर्जी एप का उपयोग कर निवेशकों को नकली ग्राफ और प्रॉफिट दिखाया जाता था। आरोपियों ने बताया कि उन्हें फर्जी सिम और डेबिट कार्ड उपलब्ध कराने वाला मिंटू उर्फ मयूर परिहार (न्यू गौरी नगर, इंदौर, स्थायी पता: कुमेदान मोहल्ला, जिला टीकमगढ़) अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम रवाना की गई है।
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शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
जीवाजीगंज थाना प्रभारी विवेक कनोडिया के अनुसार, सूरज राठौर निवासी राधामोहन की गली, अंकपात मार्ग, उज्जैन ने 25 मार्च को राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें शेयर मार्केट में ट्रेडिंग कर अधिक लाभ दिलाने का झांसा देकर कुल 70,000 रुपये की ठगी की। शिकायत साइबर पोर्टल पर पंजीकृत होने के बाद थाना जीवाजीगंज पुलिस को मिली।
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पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तकनीकी और मैनुअल जांच शुरू की। इसमें मोबाइल नंबर, बैंक खाते, यूपीआई ट्रांजेक्शन और डिजिटल फुटप्रिंट का विश्लेषण किया गया। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर अपराध क्रमांक 76/2026, धारा 319(2), 318(4), 3(5) भारतीय दंड संहिता एवं 66-D आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि “महिंद्रा ट्रेडिंग” एप के डेवलपर और तकनीकी सहयोगियों की पहचान की जा रही है। साथ ही फर्जी बैंक खातों के स्रोत और अन्य पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा रही है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश भी जारी है।
आरोपियों तक कैसे पहुंची पुलिस
जांच के दौरान मिले मोबाइल नंबर और बैंक खातों के विश्लेषण से संदेही सौरभ यादव निवासी इंदौर की पहचान हुई। उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। सौरभ यादव ने फर्जी शेयर ट्रेडिंग नेटवर्क के संचालन की महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने थाना विजयनगर, जिला इंदौर स्थित ऑर्बिट मॉल के पीछे PU-4 क्षेत्र, प्लॉट नंबर 230 की मल्टी के तृतीय तल पर संचालित “एलीस ब्लू” ब्रोकरेज फर्म का पता लगाया।
2 अप्रैल को पुलिस ने दबिश देकर मुख्य संचालक अरुण लोधी (पिता: इमरतलाल लोधी, 27 वर्ष) को गिरफ्तार किया। इसके अलावा उसके सहयोगी नीरज आदिवासी (पिता: मुंशी आदिवासी, 33 वर्ष), राहुल पाटीदार (पिता: राधेश्याम पाटीदार, 31 वर्ष) और नेटवर्क समन्वयक सौरभ यादव (25 वर्ष) को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार किया।
फर्जी सिम और डेबिट कार्ड जब्त
दबिश के दौरान कार्यालय से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक और आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई। इसमें शामिल हैं:
- 6 बेनामी सिम कार्ड
- 3 बेनामी डेबिट कार्ड (स्टेट बैंक और जना बैंक)
- 15 कंप्यूटर यूनिट (CPU)
- 19 मॉनिटर
- मोबाइल फोन, राउटर, कीबोर्ड, माउस
- विभिन्न व्यक्तियों के डिमेट/मोबाइल/बैंक डेटा
- रजिस्टर और अन्य दस्तावेज
पुलिस के अनुसार इनका इस्तेमाल संगठित साइबर ठगी में किया जा रहा था।
ये भी पढ़ें- ये कैसा इलाज?: झाड़फूंक के नाम पर महिला से मारपीट, लात-घूंसों से पिटती रही पत्नी और पति चुपचाप देखता रहा
नकली ग्राफ और प्रॉफिट दिखाकर फंसा रहे थे निवेशक
इस फर्जी कंपनी में लगभग 10-12 कर्मचारी कार्यरत थे। कर्मचारियों को स्क्रिप्ट आधारित कॉलिंग के जरिए निवेशकों को फंसाने का प्रशिक्षण दिया जाता था। विभिन्न स्रोतों से डिमेट अकाउंट धारकों और निवेशकों का डेटा खरीदा जाता था। “महिंद्रा ट्रेडिंग” नामक फर्जी एप का उपयोग कर निवेशकों को नकली ग्राफ और प्रॉफिट दिखाया जाता था। आरोपियों ने बताया कि उन्हें फर्जी सिम और डेबिट कार्ड उपलब्ध कराने वाला मिंटू उर्फ मयूर परिहार (न्यू गौरी नगर, इंदौर, स्थायी पता: कुमेदान मोहल्ला, जिला टीकमगढ़) अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम रवाना की गई है।

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