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अखाड़ा परिषद की बड़ी पहल: सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में बनेगा माईवाड़ा, वृद्ध साध्वी माताओं को मिलेगा आश्रय

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Mon, 01 Jun 2026 02:34 PM IST
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सार

अखाड़ा परिषद का पूरा जोर है कि माईवाड़ा का निर्माण सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा कर लिया जाए। उज्जैन में अगला सिंहस्थ अप्रैल-मई 2028 में होगा। उससे पहले लाखों श्रद्धालुओं और संतों का आना शुरू हो जाता है।

Simhastha 2028 Gift: Maiwada to Be Built on Shipra Banks, Ensuring Respect, Food, Shelter and Devotional Spac
रविन्द्र पूरी महाराज, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

धर्म और साधना की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 से पहले एक ऐतिहासिक पहल होने जा रही है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने यहां संन्यास ले चुकी वृद्ध साध्वी माताओं और सन्यासिनी महिलाओं के लिए ‘माईवाड़ा’ बनाने का निर्णय लिया है। परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रविंद्र पुरी ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि इस विशेष परिसर में साध्वी माताओं के लिए आवास, अन्नक्षेत्र, स्नान और भजन-पूजन की संपूर्ण व्यवस्था रहेगी।




 

महंत रविन्द्र पुरी ने कहा कि हर सिंहस्थ में देशभर से लाखों साधु-संत और साध्वी माताएं उज्जैन पहुंचती हैं। पुरुष संतों के लिए अखाड़ों और आश्रमों में पर्याप्त व्यवस्था रहती है, लेकिन वृद्ध और एकाकी जीवन जी रही सन्यासिनी माताओं के लिए कोई व्यवस्थित स्थान नहीं है। कई बार उन्हें खुले या असुरक्षित स्थानों पर ठहरना पड़ता है। सिंहस्थ जैसे विशाल आयोजन में भीड़ और अव्यवस्था के बीच सबसे अधिक परेशानी इन्हीं माताओं को होती है।

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इसी जरूरत को देखते हुए अखाड़ा परिषद ने माईवाड़ा की परिकल्पना की है। इसे शिप्रा नदी के तट के समीप विकसित करने का प्रस्ताव है। यह केवल आवासीय परिसर नहीं होगा, बल्कि एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

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परिसर में वृद्ध और सन्यासिनी माताओं के लिए अलग-अलग कुटिया और कमरे बनाए जाएंगे। बिजली, पानी और शौचालय की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यहां स्थायी अन्नक्षेत्र संचालित होगा, जहां माताओं को सम्मानपूर्वक सात्विक भोजन परोसा जाएगा। शिप्रा स्नान के लिए विशेष घाट तक आने-जाने की व्यवस्था रहेगी, जबकि अस्वस्थ माताओं के लिए परिसर में ही स्नान की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।


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इसके अलावा भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और ध्यान के लिए अलग हॉल और मंदिर बनाया जाएगा। प्राथमिक उपचार के लिए वैद्य और डॉक्टर की नियमित उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। महंत रविन्द्र पुरी ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ छत देना नहीं है। जिन माताओं ने अपना पूरा जीवन धर्म और समाज के लिए समर्पित किया है, उनका शेष जीवन सम्मान, सुरक्षा और आध्यात्मिक शांति के साथ बीते, यही हमारी कोशिश है।”

सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य
अखाड़ा परिषद का लक्ष्य माईवाड़ा का निर्माण सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करना है। उज्जैन में अगला सिंहस्थ अप्रैल-मई 2028 में प्रस्तावित है। उससे पहले बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो जाता है। ऐसे में समय पर निर्माण पूरा होने पर देशभर से आने वाली सैकड़ों वृद्ध साध्वी माताओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

महंत रविन्द्र पुरी के अनुसार, परियोजना के लिए भूमि चिन्हांकन का काम शुरू हो चुका है। प्रशासन और राज्य सरकार से चर्चा जारी है ताकि सभी जरूरी अनुमतियां समय पर मिल सकें। अखाड़ा परिषद के साथ अन्य धार्मिक और सामाजिक संगठन भी इस कार्य में सहयोग के लिए आगे आ रहे हैं।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद क्या है?
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद देश के 13 प्रमुख अखाड़ों की सर्वोच्च संस्था है। कुंभ और सिंहस्थ जैसे आयोजनों में अखाड़ों की पेशवाई, शाही स्नान और व्यवस्थाओं का निर्धारण परिषद ही करती है। वर्तमान में महंत डॉ. रविन्द्र पुरी इसके अध्यक्ष हैं। वे निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर भी हैं।

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