Somnath Temple: गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग है। भगवान शिव का यह प्रसिद्ध मंदिर भारत की आत्मा, आस्था और गौरव का एहसास कराता है। यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि हजारों साल पुरानी भारतीय सभ्यता, विश्वास और संघर्ष की कहानी भी कहता है। वर्ष 2026 सोमनाथ के इतिहास में एक अहम पड़ाव है। इस साल सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण को 1000 साल पूरे हो रहे हैं।
Somnath Temple: कब और किसने बनवाया था सोमनाथ मंदिर? जिसे महमूद गजनवी ने एक दो नहीं, बल्कि 17 बार लूटा
Somnath Temple: गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है। मान्यता है कि भवगाव शिव के इस मंदिर की स्थापना चंद्रदेव ने की है। इस मंदिर पर मुगलों ने कई बार आक्रमण कर इसे लूटा।
मंदिर को मुगल शासकों ने दर्जनों बार लूटा
मुगल शासकों ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर इस दर्जनों बार लूटा है। महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर की समृद्धता से प्रभावित होकर इस पर 17 बार हमला कर इसकी संपत्ति लूटी। महमूद गजनवी ने 1024 ई. में सोमनाथ मंदिर आक्रमण किया और इसके 56 खंभों में जड़े सोना-चांदी, हीरे-मोती तथा बहुमूल्य रत्नों को लूटकर ले गया। इसके बाद उसने मंदिर को नष्ट-भ्रष्ट कर आसपास आग लगा दी थी। अलाउद्दीन खिलजी, मुजफ्फरशाह, अहमदशाह, औरंगजेब से लेकर नादिरशाह जैसे मुस्लिम आक्रांताओं ने भी कई बार इस मंदिर को लूटा और तहस-नहस किया।
गजनवी के हमले के बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया। इसके बाद 1297 में दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर कब्जा किया और फिर मंदिर को गिरा दिया। 1706 में मुगल बादशाह औरंगजेब ने फिर मंदिर को गिरा दिया। सोमनाथ मंदिर हिंदुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यही वजह है कि सदियों से इस मंदिर पर आक्रमण होते रहे हैं और इसे लूटा जाता रहा है। कई बार टूटने के बाद भी मंदिर का निर्माण होता रहा है। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी इस मंदिर को द्वापर युग में बनाया था।
Nostradamus: युद्ध को लेकर नास्त्रेदमस ने की हैं ये 4 डरावनी भविष्यवाणियां, आखिर 2026 में क्या होने वाला है
गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 1950 में दोबारा बनवाया
वर्तमान समय में जो मंदिर है, उसका निर्माण भारत के गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 1950 में दोबारा कराया था। इस मंदिर की महिमा को मुगलों के आक्रमण भी भक्तों के मन से हटा नहीं सके। इस मंदिर का सातवीं बार कैलाश महामेरू प्रासाद शैली में निर्माण कराया गया था।
Predictions: सच हो रही है नास्त्रेदमस और बाबा वेंगा की ये भविष्यवाणी? वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले से डरी दुनिया
सोमनाथ मंदिर की सबसे प्रचलित कहानी
हजारों साल पुरानी कथा से सोमनाथ मंदिर को जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, चंद्रदेव ने दक्ष प्रजापति की 27 कन्या से शादी की थी, लेकिन वह रोहिणी नामक पत्नी से सबसे ज्यादा प्यार करते थे और अन्य पत्नियों के साथ भेदभाव रखते थे। इससे क्रोधित होकर दक्ष प्रजापति ने चंद्रदेव को श्राप दिया था कि तुम्हें अपनी खूबसूरती पर बहुत घमंड है, तुम्हारी चमक धूमिल हो जाएगी। इससे चंद्र का तेज कम होने लगा। इसके बाद ब्रह्माजी ने चंद्रदेव को भगवान शिव की आराधना करने की सलाह दी। इसके बाद चंद्रदेव ने प्रभास क्षेत्र (अब सोमनाथ) में भगवान शिव की घोर तपस्या की और शिवलिंग की स्थापना की। चंद्रदेव की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने चंद्रदेव को दर्शन दिए और उनके श्राप मुक्त किया। चंद्रदेव ने भगवान शिव से ज्योतिर्लिंग के रूप में वास करने की प्राथना की और यह सोमनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इस मंदिर को सोमेश्वर महादेव भी कहा जाता है।
Snake Facts: आखिर भूखे कितने दिन तक जिंदा रह सकते हैं सांप? जानकर उड़ जाएंगे होश