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एयरफोर्स अफसर ने रचा इतिहास, मां को दिया वो तोहफा आंखें छलकीं...सक्सेस फॉर्मूला
अमित कुमार/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
Updated Sun, 22 Apr 2018 03:48 PM IST
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विकास ठाकुर
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एयरफोर्स में अफसर ने मां को ऐसा तोहफा दिया कि उनकी आंखें छलक उठी। फिर बताया, वो फॉर्मूला जिसे अपनाकर बेटे ने इतिहास रचा।
विकास ठाकुर
ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रही कॉमनवेल्थ गेम्स-2018 में लुधियाना के वेटलिफ्टर विकास ठाकुर ने देश को वेटलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीता। 94 किलोग्राम वेट कैटेगरी में क्लीन एंड जर्क के बाद उनका कुल स्कोर 351 रहा है। 14 नवंबर 1993 को हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिला के पटनौण में जन्मे विकास ने लुधियाना के विभिन्न स्कूलों से प्राथमिक शिक्षा ली।
विकास ठाकुर
रेलवे कलॉनी में रहने वाले विकास के कांस्य पदक हासिल करने की खबर सुनकर उनकी मां आशा ठाकुर के आंसु खुशी से छलक गए। उन्होंने कहा कि मुझे अपने बेटे पर गर्व है। वहीं परिवारवालों और इलाका निवासियों ने जीत का जश्न मनाया। रेलवे कर्मचारी पिता बृज लाल ठाकुर ने बताया कि विकास पहले 85 कैटेगरी में खेलता था। इस बार उसने कैटेगरी चेंज कर 94 कैटेगरी में भाग लिया था। यही वजह रही कि उसका कांस्य पदक आया है।
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विकास ठाकुर
विकास ठाकुर इस समय भारतीय वायुसेना में वारंट ऑफिसर के तौर पर कार्यरत हैं। कॉमनवेल्थ में भाग लेने से पहल पटियाला स्थित एनआईएस में ट्रेनिंग ले रहे थे। विकास का चयन इस साल अगस्त में होने वाली एशियन गेम्स के लिए हुआ है। विकास की ट्रेनिंग रखबाग स्थित वेट लिफ्टिंग जिम में हुई है। वह फिटनेस के प्रति पहले से ही गंभीर थे। फिर उन्होंने गुरु नानक स्टेडियम स्थित लुधियाना वेटलिफ्टिंग क्लब में दाखिला ले लिया।
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विकास ठाकुर
विकास के पिता ब्रज लाल ठाकुर बेटे की जीत से काफी उत्साहित हैं। वे बताते हैं कि विकास की जीत का एक ही फॉर्मूला है। सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ो। मैंने भी उसे हमेशा यही सीख दी है कि खुद से कंपीटिशन करो, सामने वाले से ही। विकास पहले 85 किलोग्राम कैटेगरी में खेलता था, लेकिन इस बार कैटेगरी चेंज कर 94 किलोग्राम कैटेगरी में हिस्सा लिया और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर पाया।