सतलुज-यमुना लिंक नहर का मुद्दा दशकों से हरियाणा और पंजाब के बीच बड़ा मुद्दा बना है। मंगलवार को ही सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से हरियाणा और पंजाब के साथ बैठक कर हल निकालने की बात कही। बुधवार को हरियाणा के हिसार पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के सीएम भगंवत मान ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया। मगर गेंद केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाले में डाल दी। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पानी बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है।
Haryana: हल होगा SYL का मुद्दा! केजरीवाल और भगवंत मान ने कही बड़ी बात, गेंद PM के पाले में डाली
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पंजाब और हरियाणा में पानी की कमी है। यहां भी पानी का स्तर नीचे जा रहा है। केंद्र सरकार को हरियाणा और पंजाब को पानी दिलाना चाहिए। केंद्र का काम दोनों राज्यों को लड़ाना नहीं है, बल्कि हल निकालना है। हमें 130 करोड़ लोगों को जोड़ना है। हमें आपस में लड़ना नहीं है। हरियाणा और पंजाब को पानी मिल सकता है। मगर केंद्र सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी। हरियाणा और पंजाब को पर्याप्त पानी मिले। मैं प्रधानमंत्री से अपील करता हूं कि दोनों राज्यों के लिए पानी की व्यवस्था करें। अगर उनके पास समाधान नहीं है तो मुझे चाय पर बुला लें। मैं उन्हें समाधान दूंगा।
मगर इन जटिल समस्याओं के समाधान प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं निकलते हैं। केजरीवाल ने यह भी पूछा कि एसवाईएल मुद्दे पर हरियाणा भाजपा और पंजाब भाजपा का क्या रुख है। वहीं हरियाणा कांग्रेस और पंजाब कांग्रेस इस मुद्दे पर क्या सोचती हैं। पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा कि मुझे हरियाणा के मुख्यमंत्री से मिलने पर कोई समस्या नहीं है। मगर प्रधानमंत्री को समाधान निकालना पड़ेगा। हरियाणा के मुख्यमंत्री आएं, हम बातचीत करेंगे। भगवंत मान ने कहा कि केंद्र सरकार हमें लड़ाने के बजाय समाधान निकाले। पंजाब और हरियाणा को पूरा पानी मुहैया कराए।
पुरानी पेंशन बहाली का उठाया मुद्दा
हिसार में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अरविंद केजरीवाल ने पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन बहाल होनी चाहिए। नई पेंशन स्कीम कर्मचारियों के साथ बहुत बड़ा धोखा है। केंद्र सरकार ने पूरे देश के ऊपर नई पेंशन स्कीम को थोपी थी। केंद्र सरकार कर्मचारियों के हित में पुरानी पेंशन स्कीम को जरूर बहाल करे। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कुलदीप बिश्नोई की हमें जरूरत नहीं है। वह जहां हैं, वहीं रहें। वह कांग्रेस से भाजपा में सिर्फ अपने केस हटवाने गए हैं।
चार दशक से उलझा है मामला
1966 में पंजाब से अलग होकर हरियाणा बनने के बाद 1981 का विवादास्पद जल-बंटवारा समझौता अस्तित्व में आया। पानी के प्रभावी आवंटन के लिए एसवाईएल नहर लिंक की परिकल्पना की गई थी। 214 किमी एसवाईएल का निर्माण किया जाना था, जिसमें से 122 किमी पंजाब में और 92 किमी हरियाणा में होना था। हरियाणा ने नहर के अपने हिस्से का निर्माण किया, पंजाब ने प्रारंभिक चरण के बाद काम बंद कर दिया था। दशकों पुराना यह मुद्दा आज भी दोनों राज्यों के बीच बड़े विवाद के रूप में बना है।