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हरियाणा की सियासत का सबसे 'ताकतवर' गांव, बने पांच विधायक, डिप्टी सीएम, बिजली मंत्री भी यहीं से
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरसा (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 28 Dec 2019 01:51 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा का सिरसा जिला इस साल राजनीति का केंद्र रहा। लेकिन इन सबसे ज्यादा चर्चा रही एक गांव की। इसी गांव से हरियाणा के डिप्टी सीएम, एक मंत्री और तीन विधायक हैं। वैसे तो हरियाणा की राजनीति में इस गांव का दबदबा दशकों पुराना है लेकिन गांव की रौनक इस बार के विधानसभा चुनाव में फिर लौटी। आइए जानते हैं हरियाणा के सिरसा के इस गांव के बारे में...
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दुष्यंत चौटाला
- फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने चुनाव लड़ा था। लेकिन केवल दस सीटों पर ही जीत दर्ज कर पाई। फिर भी सत्ता की चाबी दुष्यंत चौटाला के हाथ में रही। भाजपा-जजपा का गठबंधन हुआ और दुष्यंत चौटाला हरियाणा के सबसे युवा उपमुख्यमंत्री बन गए। दुष्यंत चौटाला सिरसा जिले के चौटाला गांव से ताल्लुक रखते हैं और हम बात भी इसी गांव की कर रहे हैं।
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अभय सिंह चौटाला (फाइल फोटो)
- फोटो : ani
चौटाला गांव से संबंध रखने वाले पांच व्यक्ति इस बार विधायक हैं। जिसमें से चौधरी देवीलाल के कुनबे से चार विधायक हैं। इनमें बिजली मंत्री रणजीत सिंह, अभय सिंह चौटाला, दुष्यंत चौटाला, नैना चौटाला हैं। वहीं इस गांव से ही अमित सिहाग भी संबंध रखते हैं। दुष्यंत चौटाला की मां नैना चौटाला बाढ़डा सीट से विधायक हैं। वहीं चाचा अभय चौटाला ऐलनाबाद से विधायक हैं।
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नैना चौटाला
- फोटो : फाइल फोटो
32 साल बाद विजयी हुए रणजीत सिंह
वर्ष 2019 के विधानसभा चुनावों में पिछले 32 सालों से चुनाव हार रहे रणजीत सिंह चौटाला को जीत नसीब हुई। कांग्रेस से टिकट कटी तो चौ. रणजीत सिंह ने इस बार किसी पार्टी का साथ ना लेकर खुद निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का फैसला किया और विपक्षी पार्टी को करीब 20 हजार वोटों से हराया। इससे पहले रणजीत सिंह कांग्रेस की टिकट पर दो बार रानियां विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और हार रहे थे। जिसको लेकर रणजीत सिंह ने निर्दलीय ही चुनाव लड़ने का फैसला लिया और जीत हासिल की। इस बार हरियाणा सरकार में वे बिजली मंत्री हैं।
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रणजीत सिंह चौटाला।
- फोटो : फाइल फोटो
डॉ. केवी सिंह के बेटे अमित सिहाग जीते
डबवाली से कांग्रेसी नेता व पूर्व ओएसडी डॉ. केवी सिंह भी कभी विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाए। वे लगातार दो चुनाव डबवाली विधानसभा सीट से हारे। लेकिन अबकी बार खुद टिकट न लेकर अपने बेटे अमित सिहाग को दिलाई। अमित सिहाग पहली बार ही विधानसभा चुनाव जीत गए।
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