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वक्त की ऐसी मार, मिट गया देश के ऐतिहासिक स्टेशन का वजूद

Wed, 07 Oct 2015 09:07 AM IST
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब)
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर(पंजाब) Updated Wed, 07 Oct 2015 09:07 AM IST

वक्त की ऐसी मार, मिट गया देश के ऐतिहासिक स्टेशन का वजूद

finished existence of hussainiwala railway station at pak border

भारत-पाक विभाजन से पहले प्रमुख रेलवे स्टेशनों में

गिना जाता था। वक्त की ऐसी मार पड़ी, आज वजूद ही मिट गया बॉर्डर पर बने इस स्टेशन का। रिपोर्ट: अनिल कुमार, फिरोजपुर
 

वक्त की ऐसी मार, मिट गया देश के ऐतिहासिक स्टेशन का वजूद

finished existence of hussainiwala railway station at pak border

भारत-पाकिस्तान बंटवारे से पहले गांव हुसैनीवाला स्थित सिंचाई विभाग की वर्कशॉप के पास प्रमुख रेलवे स्टेशन था हुसैनीवाला। वक्त की मार से अब इसका वजूद मिट गया है। अब यहां लोगों ने खेती करना शुरू कर दिया है। लेकिन रेल पटरी अब भी वहां से गुजरती है। ट्रेन के जरिये लाहौर व कसूर से आने वाले लोग इसी स्टेशन पर उतरते थे और सिंचाई विभाग की वर्कशॉप में कार्य करने जाते थे। वर्कशॉप में तब पांच सौ मुलाजिम थे।

वक्त की ऐसी मार, मिट गया देश के ऐतिहासिक स्टेशन का वजूद

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इस रेलवे स्टेशन पर सिंचाई विभाग की अपनी दो साइडिंग थीं, जिन पर मालगाड़ी आकर खड़ी होती थी और हिमाचल के नालागढ़ से आने वाला पत्थर इन साइडिंग पर उतारा जाता था। यह पत्थर दरिया के किनारों की मजबूती के लिए इस्तेमाल होता था। भारत-पाकिस्तान के बीच हुए दो युद्धों के बाद हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन का नामोनिशान खत्म हो चुका है। मौजूदा समय में लोगों को पता ही नहीं कि स्टेशन कहां बना था।

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अमर उजाला की टीम ने हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन के इतिहास को जानने के लिए कई पुराने कर्मियों से बातचीत की। इसके बाद रेलवे से सेवानिवृत्त हुए ट्रेन चालक मेहर सिंह (94) को लेकर हुसैनीवाला गांव का दौरा किया। मेहर सिंह ने बताया कि हुसैनीवाला बॉर्डर स्थित शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के स्मारक से लगभग तीन किलोमीटर पहले सिंचाई विभाग की वर्कशॉप है, जिसके पास रेलवे स्टेशन हुसैनीवाला था। 1965 और 1971 की जंग के बाद स्टेशन नष्ट हो गया। अब लोग यहां खेती करने लगे हैं।

वक्त की ऐसी मार, मिट गया देश के ऐतिहासिक स्टेशन का वजूद

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स्टेशन वाली जगह पर पुरानी ईंटों से बने दो पिलर और वर्कशॉप ही स्टेशन होने की पुष्टि करते हैं। सिंचाई विभाग की वर्कशॉप आज भी है। गांव हुसैनीवाला में मिले बुजुर्ग डाल चंद ने बताया कि वे सिंचाई विभाग में 1952 में नौकरी पर लगे थे और 1990 में सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेन से लाहौर और कसूर से लोग वर्कशॉप में काम करने आते थे। वे हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन पर ही उतरते थे।

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