‘हुक्का’ पंचायतों व घरों में भले ही प्रतिष्ठा का प्रतीक बना हो, लेकिन यह कैंसर के रोगियों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा कर रहा है। इनमें सबसे खतरनाक फूड पाइप कैंसर है। इसके रोगियों की संख्या बढ़ाने में रासायनिक खाद्य पदार्थों के अलावा हुक्का, सिगरेट और बीड़ी का भी खासा योगदान है।
सिगरेट और बीड़ी से भी ज्यादा खतरनाक है हुक्के का कश, जानें कैसे बढ़ाता है कैंसर का खतरा
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पीजीआईएमएस रोहतक के सर्जरी ओंकोलोजिस्ट डॉ. सुशील की मानें तो सिगरेट में फिल्टर है या हुक्के में पानी होता है, इसलिए इसमें से धुंआ जहर मुक्त हो कर आता है...ऐसे दावों पर कोई यकीन न करें। धुएं के रूप में पीये जा रहे जहर को नजर अंदाज न करें। साधारण तंबाकू या फ्लेवर तंबाकू दोनों ही मानव जीवन के लिए घातक हैं। डॉ. सुशील ने बताया कि पंजाब, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश की तुलना में हरियाणा में फूड पाइप के अधिक मरीज सामने आ रहे हैं। इसके अलावा ओरल कैंसर के मरीज भी सामने आ रहे हैं, जबकि इस तरह के मरीज उत्तर भारत में अधिक मिलते हैं।
दो मार्च 2019 को वह जोधपुर से संस्थान में आए और ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच में पाया कि अधिकांश मरीज हुक्का, बीड़ी, सिगरेट पीने वाले हैं, इनको फूड पाइप कैंसर है। हैरानी तो इस बात की है कि इसमें 28 की उम्र तक के युवा शामिल हैं। महिला व पुरुष वर्ग के मरीजों की संख्या लगभग बराबर है। इसमें महिला मरीजों की उम्र पुरुषों की तुलना में अधिक है। शुरुआत में मरीज की पहचान होने पर उसे कीमोथैरेपी व ऑपरेशन कर बचाने का प्रयास किया जाता है। कुछ मरीजों की आयु आठ से दस साल उपचार के सहारे बढ़ा दी जाती है और जिन मरीजों की बीमारी अंतिम स्टेज में होती है उनकी काउंसिलिंग की जाती है। इस कैंसर के होने का मुख्य कारण जैनेटिक फैक्टर भी है। ओरल कैंसर में 90 फीसदी पुरुष व 10 फीसदी महिला वर्ग प्रभावित है।
ब्रेस्ट कैंसर की मरीजों की संख्या भी कम नहीं
डॉ. सुशील की मानें तो सर्जरी विभाग में ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों की संख्या भी खासी है। इसके मामले भी हर ओपीडी में एक से दो सामने आ ही जाते हैं। इसकी वजह देर से या जल्द मासिक धर्म आना, मां का बच्चे को स्तनपान न कराना, जैनेटिक फैक्टर आदि कई कारण हैं। इसमें महिलाओं की उम्र 40 से 70 होती है। अधिकांश मामले ग्रामीण क्षेत्रों के होते हैं। जांच में सामने आया कि ग्रामीण महिलाएं समय पर जांच नहीं करवा पाती और सामान्य लक्षणों को वह हल्के में ले लेती हैं।
सप्ताह में दो दिन होती है स्पेशल ओपीडी
पीजीआईएमएस में सर्जरी ओंकोलोजी की स्पेशल ओपीडी हर सप्ताह सोमवार व गुरुवार को कमरा नंबर 256 में लगती है। इसके अलावा मंगलवार व शुक्रवार को ऑपरेशन होता है। प्रतिदिन स्पेशल ओपीडी में 50 के करीब मरीज आते हैं।
ड्रग विभाग का तर्क
स्टेट ड्रग डिपेंडेंट ट्रीटमेंट सेंटर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ आर्य ने बताया कि सामान्य हुक्का बीड़ी, सिगरेट से भी खतरनाक है। क्योंकि बीड़ी व सिगरेट को आदमी तीन से पांच मिनट में पीकर हट जाता है, जबकि हुक्के पर घंटों समय व्यतीत होता है। कुछ लोग हुक्के के तंबाकू में गुड़ मिला लेते हैं, माना जाता है कि धुंआ मीठा होगा। जबकि प्लेन तंबाकू का स्वाद कड़वा होता है। हुक्के के धुएं से भी हाइड्रो कार्बन, टार, कार्बन मोनोक्साइड, हैवी मैटल जैसे आर्सेनिक कैडमिन निकलता है। हुक्के का कस सिगरेट व बीड़ी के मुकाबले अधिक गहरा होने के कारण यह अधिक घातक हो जाता है।