कारगिल में शहीद हुए पवित्र में बचपन से ही देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी। शहीद पवित्र का जन्म हरियाणा के नारनौंद उपमंडल के गांव मिलकपुर में 6 अगस्त 1978 को एक फौजी के घर में हुआ। पिता स्व. किताब सिंह से बचपन से ही मिले देश सेवा के जज्बे को अपने दिल में बसा लिया था। पिता जब भी आर्मी से छुट्टी लेकर घर आते थे तो शहीद पवित्र उनसे खिलौने में भी बंदूक की ही मांग करते थे। जब उसके पापा उसके लिए खिलौने के रूप में बंदूक ले आते तो कहता था कि पापा में भी बड़ा होकर फौजी बनूंगा और आपकी तरह देश की शरहद पर दुश्मनों को मारकर देश की सेवा करूंगा।
CourageInKargil: जन्म और शहादत की तारीख एक, 11 दुश्मनों को मारा, पिता ने बचपन में थमाई थी खिलौना बंदूक
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पवित्र ने गांव के सरकारी स्कूल से ही अपनी 10वीं तक की शिक्षा पूरी की। देशसेवा के जज्बे के साथ-साथ पढ़ाई में भी होशियार थे। 11वीं की पढ़ाई के लिए राखी शाहपुर की वोकेशनल में पढ़ाई शुरू की। पढ़ते-पढ़ते ही 29 फरवरी 1996 को 8 जाट रेजिमेंट में भर्ती होकर बचपन के अपने सपने को साकार कर दिखाया। 9 जुलाई 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए 11 दुश्मनों को मौत के घाट उतार कर देश के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए। यह इत्तफाक की बात है कि शहीद पवित्र की जन्म व शहादत की तारीख नौ ही है। परिजनों ने प्रशासन से गांव के सरकारी स्कूल का नाम शहीद पवित्र के नाम से रखने की मांग की है।
मेरा बेटा बचपन से ही बहादुर था और देशसेवा करने का जज्बा उसके दिल में था। वह पढ़ते-पढ़ते ही आर्मी में भर्ती हो गया था। मुझे इस बात पर गर्व है मेरा बेटा देश के 11 दुश्मनों को मारकर शहीद हुआ। पवित्र जैसे बहादुर देश पर मर मिटने वाले बच्चे सभी माताओं की कोख से पैदा हों ताकि देश की सेवा कर सकें। सुजानी देवी, शहीद की मां पवित्र कुमार बचपन से ही विनम्र स्वभाव के थे। घर वाले अगर किसी बात पर गुस्सा हो जाते थे तो पवित्र कुमार उसका जवाब हंसते हुए देते थे। वर्ष 1985 में जब उसके पिता किताब सिंह 7 केवलरी आर्मी से सेवानिवृत्त हुए तब उनसे ही पवित्र में सेना में भर्ती होने व देश की सेवा करने का जज्बा पैदा हो गया। प्रदीप व सवित्र, शहीद के भाई।
दादा सुलतान सिंह ने बताया कि देशसेवा का जज्बा उसे अपने पिता से विरासत में मिला था। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि फौजी पिता के घर जन्म होने के कारण उसके संस्कार में ही राष्ट्र प्रेम की भावना भर गई थी। अपने सपने साकार कर उसने अपने गांव व देश का नाम रोशन किया है। शहीद पवित्र कुमार की याद में गांव में स्मारक का निर्माण करवाया गया था। किसी शरारती तत्व ने शहीद की प्रतिमा को 28 अप्रैल 2018 को खंडित कर उनके हाथ में मौजूद सेना के हथियार बंदूख को क्षतिग्रस्त कर दिया था। पुलिस ने उस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की और दो साल तक प्रतिमा खंडित करने वाले आरोपियों को पकड़ने के लिए शहीद परिवार ने बार-बार नारनौंद पुलिस के चक्कर काटे। इसके बावजूद न तो प्रशासन ने ही प्रतिमा को ठीक करवाया और न ही आरोपियों को पकड़ा गया। आखिरकार परिजनों ने ही अपने खर्च पर प्रतिमा को ठीक करवाया। सवित्र श्योराण, शहीद पवित्र का भाई।
स्कूल से शहीद का नाम हटाया
गांव में खेड़ी रोज व मिलकपुर दो ग्राम पंचायतों का एक ही सरकारी स्कूल है। स्कूल का नाम शहीद के नाम से रखा गया था लेकिन 4-5 दिन के बाद ही स्कूल के मेन गेट से शहीद का नाम हटा दिया। इस तरफ प्रशासन ने भी कोई ध्यान नहीं दिया। आज तक प्रशासन की तरफ से शहीद के नाम पर और कहीं किसी सरकारी संस्था का नाम नहीं रखा गया है। परिजनों ने मांग की है कि गांव के सरकारी स्कूल का नाम शहीद पवित्र श्योराण के नाम से रखा जाए ताकि आने वाली पीढ़ी भी शहीदों के बारे में जान सके