वर्तमान में ब्रिटेन की महारानी के ताज में जड़ा कोहिनूर हीरा एक बार फिर चर्चा में है। इस विश्व प्रसिद्ध हीरे को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। इसके पीछे कारण यह है कि कुछ समय पहले लुधियाना निवासी रोहित सभ्रवाल जब लंदन घूमने गए तो देखा कि लंदन ब्रिज के पास एक हाल में कोहिनूर हीरे को आम पब्लिक के देखने के लिए रखा गया है। एग्जीबिशन हाल में जाने के लिए उन्होंने 40 पाउंड की टिकट ली। वहां तैनात अधिकारियों ने बताया कि इस कोहिनूर को भारत ने गिफ्ट किया था।
कोहिनूर हीरे को लेकर हुआ नया खुलासा, सरकार और एएसआई के बयान भी अलग!
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खुलासा : कोहिनूर को अंग्रेजों को नहीं सौंपा था
रोहित ने इस सच्चाई को जानने के लिए पीएमओ में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी, जिसे पीएमओ ने आगे इसे एएसआई को भेज दिया। इस पर एएसआई ने जवाब दिया कि रिकॉर्ड के मुताबिक महाराजा दलीप सिंह और लॉर्ड डलहौजी के बीच 1849 में लाहौर संधि हुई थी। इस संधि के तहत महाराजा ने कोहिनूर को इंग्लैंड की महारानी को सौंपा था। संधि में यह भी जिक्र है कि महाराजा दलीप सिंह ने अपनी इच्छानुसार कोहिनूर को अंग्रेजों को नहीं सौंपा था। उस समय महाराजा दलीप सिंह की उम्र 9 साल की थी। यह खुलासा गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के आर्किलॉजिकल सर्वे इंडिया के एंटिक्विटी सेक्शन ने किया है।
कोहिनूर क्यों है खास
कोहिनूर दुनिया का सबसे मशहूर हीरा है। यह मूल रूप से तेलंगाना के गोलकोंडा खनन क्षेत्र में निकला था। यह कोहिनूर इस समय करीब 106 कैरेट का है, जब इसकी खोज हुई थी तो इसका वजन करीब 700 कैरेट के आसपास था। भारत, ब्रिटिश सरकार से कई बार कोहिनूर लौटाने का अनुरोध कर चुका है। हालांकि, 2013 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने इस मांग को खारिज कर दिया था।
सरकार और एएसआई के बयानों में है अंतर
भारत सरकार ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि कोहिनूर हीरा ईस्ट इंडिया कंपनी को भेंट किया गया था जबकि आरटीआई के अनुसार अंग्रेजों ने लाहौर संधि के जरिये इसे जबरन लिया था।
कोहिनूर की कहानी
कोहिनूर के बारे में यह मान्यता है कि वह कृष्णा नदी के पास, कुल्लूर की खदानों में मिला था। यह खदाने आज के आंध्र प्रदेश में स्थित हैं। लगभग 5000 वर्ष पहले हीरा महाभारत काल में मिला था। ऐतिहासिक जानकारी यह है कि इस हीरे का सबसे पहला जिक्र बाबर की आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में मिलता है। इसके बाद ये हीरा मुगलों के पास ही रहा। 1738 में ईरानी शासक नादिर शाह ने मुगलिया सल्तनत पर हमला किया।
1739 में उसने दिल्ली के तब के शासक मोहम्मद शाह को हराकर उसे बंदी बना लिया और शाही खजाना लूट लिया। इसमें बाबर हीरा भी था, इस हीरे का नाम नादिर शाह ने ही कोहिनूर रखा। रानी विक्टोरिया ने इसे अपने ताज में जड़वा लिया, तब से कोहिनूर वहीं है।