फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कोहिनूर हीरे को लेकर हुआ नया खुलासा, सरकार और एएसआई के बयान भी अलग!

Wed, 17 Oct 2018 09:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब) Updated Wed, 17 Oct 2018 09:22 AM IST
विज्ञापन
know about kohinoor and its new controversy
kohinoor diamond - फोटो : फाइल फोटो

वर्तमान में ब्रिटेन की महारानी के ताज में जड़ा कोहिनूर हीरा एक बार फिर चर्चा में है। इस विश्व प्रसिद्ध हीरे को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। इसके पीछे कारण यह है कि कुछ समय पहले लुधियाना निवासी रोहित सभ्रवाल जब लंदन घूमने गए तो देखा कि लंदन ब्रिज के पास एक हाल में कोहिनूर हीरे को आम पब्लिक के देखने के लिए रखा गया है। एग्जीबिशन हाल में जाने के लिए उन्होंने 40 पाउंड की टिकट ली। वहां तैनात अधिकारियों ने बताया कि इस कोहिनूर को भारत ने गिफ्ट किया था।

know about kohinoor and its new controversy
kohinoor diamond - फोटो : फाइल फोटो

खुलासा : कोहिनूर को अंग्रेजों को नहीं सौंपा था
रोहित ने इस सच्चाई को जानने के लिए पीएमओ में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी, जिसे पीएमओ ने आगे इसे एएसआई को भेज दिया। इस पर एएसआई ने जवाब दिया कि रिकॉर्ड के मुताबिक महाराजा दलीप सिंह और लॉर्ड डलहौजी के बीच 1849 में लाहौर संधि हुई थी। इस संधि के तहत महाराजा ने कोहिनूर को इंग्लैंड की महारानी को सौंपा था। संधि में यह भी जिक्र है कि महाराजा दलीप सिंह ने अपनी इच्छानुसार कोहिनूर को अंग्रेजों को नहीं सौंपा था। उस समय महाराजा दलीप सिंह की उम्र 9 साल की थी। यह खुलासा गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के आर्किलॉजिकल सर्वे इंडिया के एंटिक्विटी सेक्शन ने किया है।

know about kohinoor and its new controversy
kohinoor queen

कोहिनूर क्यों है खास
कोहिनूर दुनिया का सबसे मशहूर हीरा है। यह मूल रूप से तेलंगाना के गोलकोंडा खनन क्षेत्र में निकला था। यह कोहिनूर इस समय करीब 106 कैरेट का है, जब इसकी खोज हुई थी तो इसका वजन करीब 700 कैरेट के आसपास था। भारत, ब्रिटिश सरकार से कई बार कोहिनूर लौटाने का अनुरोध कर चुका है। हालांकि, 2013 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने इस मांग को खारिज कर दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
know about kohinoor and its new controversy
कोहिनूर - फोटो : Getty

सरकार और एएसआई के बयानों में है अंतर
भारत सरकार ने 2016 में सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि कोहिनूर हीरा ईस्ट इंडिया कंपनी को भेंट किया गया था जबकि आरटीआई के अनुसार अंग्रेजों ने लाहौर संधि के जरिये इसे जबरन लिया था।

विज्ञापन
know about kohinoor and its new controversy
कोहिनूर हीरा - फोटो : Reuters

कोहिनूर की कहानी                   
कोहिनूर के बारे में यह मान्यता है कि वह कृष्णा नदी के पास, कुल्लूर की खदानों में मिला था। यह खदाने आज के आंध्र प्रदेश में स्थित हैं। लगभग 5000 वर्ष पहले हीरा महाभारत काल में मिला था। ऐतिहासिक जानकारी यह है कि इस हीरे का सबसे पहला जिक्र बाबर की आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में मिलता है। इसके बाद ये हीरा मुगलों के पास ही रहा। 1738 में ईरानी शासक नादिर शाह ने मुगलिया सल्तनत पर हमला किया।

1739 में उसने दिल्ली के तब के शासक मोहम्मद शाह को हराकर उसे बंदी बना लिया और शाही खजाना लूट लिया। इसमें बाबर हीरा भी था, इस हीरे का नाम नादिर शाह ने ही कोहिनूर रखा। रानी विक्टोरिया ने इसे अपने ताज में जड़वा लिया, तब से कोहिनूर वहीं है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed