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Mohali Jhula Accident: मेले में ड्रॉप टावर झूले के पास ही बना था सेल्फी प्वाइंट, एनओसी पर भी खड़े हुए सवाल
Tue, 06 Sep 2022 08:47 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली
अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 06 Sep 2022 08:47 AM IST
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Mohali Jhula Accident
- फोटो : अमर उजाला
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मोहाली के फेज-आठ स्थित दशहरा मैदान में चल रहे मेले के लिए आयोजकों ने भले ही जिला अनुमति ली हुई थी लेकिन घटना ने एक बार फिर प्रशासन की टीमों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में घायल लोगों का आरोप है कि विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने शारीरिक सत्यापन किए बिना ही एनओसी जारी की थी। बस फाइल में ही सब कुछ पूरा था, जबकि आयोजन स्थल पर लोगों की जान खतरे में थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। डीसी अमित तलवार का कहना है इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आयोजकों का लक्ष्य सिर्फ टिकट खिड़की तक सीमित था। इसके बाद उनका कोई लेनादेना नहीं था। जहां पर ड्रॉप टावर झूला गिरा उसके पास ही सेल्फी प्वाइंट बना हुआ था। यहां हर समय 15 से 20 युवा खड़े रहते थे। यदि यह झूला बाहर की तरफ गिरता तो कई लोगों की जान जा सकती थी। इसी लाइन में दो और एडवेंचर वाले झूले थे। झूले उचित तरीके से काम कर रहे है या नहीं इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया।
मोहाली में टूटा झूला।
- फोटो : अमर उजाला
मेले में पार्किंग की नहीं थी उचित व्यवस्था
मेले में पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं थी। यहां आने वाले लोग आईपीएस से गुरुद्वारा श्री सिंह शहीदां सोहाना रोड के किनारे स्लिप रोड पर ही गाड़ियां पार्क करके मेला देखने जाते थे। हादसे में घायल दीपिका ने बताया कि जब वह झूले से गिरी तो वाहनों के चलते पुलिस व अन्य को वहां तक पहुंचने में दिक्कत आई। इसके अलावा मेले में प्रवेश और निकासी के लिए भी एक ही रास्ता था। इस वजह से भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।
मेले में पार्किंग की उचित व्यवस्था नहीं थी। यहां आने वाले लोग आईपीएस से गुरुद्वारा श्री सिंह शहीदां सोहाना रोड के किनारे स्लिप रोड पर ही गाड़ियां पार्क करके मेला देखने जाते थे। हादसे में घायल दीपिका ने बताया कि जब वह झूले से गिरी तो वाहनों के चलते पुलिस व अन्य को वहां तक पहुंचने में दिक्कत आई। इसके अलावा मेले में प्रवेश और निकासी के लिए भी एक ही रास्ता था। इस वजह से भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।
घायलों को अस्पताल ले जाते हुए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इतने बड़े आयोजन स्थल पर डॉक्टरों की टीम जरूरी
जहां पर मेला लगाया गया था वहां रोजाना दो से चार हजार लोग आते थे। आयोजन स्थल पर न कोई डाक्टर था और न ही एंबुलेंस। मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू का कहना है कि इतने बड़े आयोजन के लिए इंतजाम पहल के आधार पर करने चाहिए थे। जब प्रशासन ने एनओसी जारी की थी तो स्वास्थ्य विभाग को गंभीरता दिखानी चाहिए थी।
जहां पर मेला लगाया गया था वहां रोजाना दो से चार हजार लोग आते थे। आयोजन स्थल पर न कोई डाक्टर था और न ही एंबुलेंस। मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू का कहना है कि इतने बड़े आयोजन के लिए इंतजाम पहल के आधार पर करने चाहिए थे। जब प्रशासन ने एनओसी जारी की थी तो स्वास्थ्य विभाग को गंभीरता दिखानी चाहिए थी।
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घायल को अस्पताल ले जाते हुए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पीने को पानी तक की सुविधा नहीं
संदीप सिंह ने बताया कि आयोजन स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। वहां पर लोगों के लिए पेयजल से लेकर शौचालय तक कमी खली। इसके अलावा रेडीमेड कपड़ों के स्टाल के पास ही खाने पीने का इंतजाम था। लेकिन आयोजकों ने कभी इस तरह ध्यान ही नहीं दिया।
संदीप सिंह ने बताया कि आयोजन स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। वहां पर लोगों के लिए पेयजल से लेकर शौचालय तक कमी खली। इसके अलावा रेडीमेड कपड़ों के स्टाल के पास ही खाने पीने का इंतजाम था। लेकिन आयोजकों ने कभी इस तरह ध्यान ही नहीं दिया।
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हादसे में घायल लोग।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
झूले की एनओसी पर में फंस रहा पेच
झूलों की एनओसी को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग की जिम्मेदारी थी लेकिन एनओसी किस अधिकारी ने जारी की थी इस पर सवाल खड़े हो रहे है। अमर उजाला की टीम ने पीडब्ल्यूडी के कई उच्च अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन वह इस बारे में कोई उचित जवाब नहीं दे पाए।
झूलों की एनओसी को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग की जिम्मेदारी थी लेकिन एनओसी किस अधिकारी ने जारी की थी इस पर सवाल खड़े हो रहे है। अमर उजाला की टीम ने पीडब्ल्यूडी के कई उच्च अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन वह इस बारे में कोई उचित जवाब नहीं दे पाए।