76 साल के तृप्त सिंह को जिम में कसरत करते देख युवा भी हैरान रह जाते हैं। फिटनेस ऐसी कि 545 पुशअप लगाने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। कई नौजवान तो उनका सामना करने से कतराते हैं। उनका जज्बा देख जिम प्रबंधन ने उनकी उम्र भर की सदस्यता ही मुफ्त नहीं की बल्कि अपना ब्रांड एंबेसडर भी बना दिया है। खास बात यह है कि विरोट कोहली भी इन्हें इंस्टाग्राम पर फॉलो करते हैं। तृप्त सिंह बुजुर्गों को संदेश देते हैं कि उम्र के नंबर पर नहीं जाना चाहिए। इच्छाशक्ति हो तो इंसान 100 साल तक आसानी से जी सकता है। तृप्त सिंह पंजाब के मोहाली के सेक्टर-71 में रहते हैं। उन्होंने बताया कि 1999 तक वह दिल्ली में रहे। वहां उनका नानक पब्लिकेशन हाउस था। पत्नी मनजीत कौर के साथ वे इसे संभालते थे। इस दौरान पत्नी को दिल की बीमारी हो गई। वह हर दो साल में बीमार हो जाती थीं।
प्रेरक है 76 साल वाली ये जवानी : तृप्त सिंह को मात नहीं दे पाते हैं नौजवान, विराट कोहली भी इनकी फिटनेस से हैरान
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तृप्त सिंह ने बताया कि 51 साल की उम्र में मनजीत कौर दिल की इसी बीमारी के कारण दुनिया छोड़कर चली गईं। मनजीत की मौत ने मुझे तोड़ दिया। न पब्लिकेशन हाउस में मन लगा, न दिल्ली में। इसके बाद वह अपने दोनों बेटों को लेकर मोहाली आ गए। यहां नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरू की। चंडीगढ़ में आजकल वे फैंसी कपड़ों का स्टोर चलाते हैं। तृप्त सिंह बताते हैं कि वे जब मोहाली आए तो हमेशा घर में ही रहते थे। जीने की इच्छा भी खत्म होने लगी थी। एक दिन बड़े बेटे ने नाराज होकर कहा कि अपनी हालत देखिए क्या बना ली है। अपनी सेहत पर ध्यान दीजिए। अगले ही दिन से मैंने पार्क में दौड़ना शुरू कर दिया। मुझे बचपन में दौड़ने का खूब शौक भी था। ऐसे में मैंने दौड़ को ही जिंदगी का नया आधार बनाया।
2010 में चंडीगढ़ में हुई सीनियर सिटीजन मैराथन में पहली बार हिस्सा लिया। इसमें मैं पांचवें नंबर पर रहा तो मेरा हौसला बढ़ गया। इसके बाद तो 2011 में गुड़गांव में 10 किलोमीटर की मैराथन में कांस्य पदक जीता। 2011 में ही नैनीताल में हुई 42 किलोमीटर की मैराथन में स्वर्ण पदक जीता। 2013 में शिमला में हुई 21 किलोमीटर की माउंटेन अल्ट्रा मैराथन में भी स्वर्ण पदक पाया। इसी तरह पंचकूला में होने वाली 42 किलोमीटर मैराथन में स्वर्ण पदक जीता। तृप्त सिंह बताते हैं कि अब वह बिना कसरत किए नहीं रह सकते। 2013 में जिम जाना शुरू किया था।
बहुत से लोगों ने तब मेरा मजाक भी उड़ाया था। लेकिन उनकी बातों पर ध्यान दिए बगैर मैंने जिम जारी रखा। सुबह पांच बजे जिम पहुंच जाता और दो से तीन घंटे तक कसरत करता। दो साल बाद जिम वालों ने मेरी ताउम्र की सदस्यता मुफ्त कर दी और मुझे ब्रांड एंबेसडर बना दिया। तृप्त सिंह ने बताया, जिम में युवा मुझे बाबाजी कहकर बुलाते थे। मैंने उन्हें टोकते हुए कहा कि यदि मुझे मुकाबले में हरा सको तो ही बाबा जी कहो। कोई युवा मुझे हरा नहीं सका। 545 पुशअप लगाने का रिकॉर्ड मेरे नाम है। ऐसी कोई मशीन जिम में नहीं है, जिस पर मैं कसरत न कर सकूं। 60 किलो के डंबल आराम से उठा लेता हूं। खुराक में सिर्फ हरी सब्जियां, उबला हुआ सोयाबीन व सूखे मेवे लेता हूं। दूध, दही, मक्खन, मास मछली, अंडा आदि से दूर रहता हूं।
बुजुर्गों को देंगे मुफ्त प्रशिक्षण
तृप्त सिंह ने बताया कि उन्होंने आयुर्वेद और होम्योपैथी की जानकारी भी ली है। एक समय पीठ दर्द से जूझ रहे थे। दो महीने में नेचुरोपैथी के जरिए उन्होंने दर्द से निजात पा ली। आज भी वे यूके की यूनिवर्सिटी से डिप्लोमा ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग का कोर्स कर रहे हैं। इसके लिए एक साल से पढ़ाई कर रहे हैं। इसी महीन उन्हें प्रमाणपत्र मिल जाएगा। इसके बाद वे अपने हमउम्र लोगों को पार्क में मुफ्त प्रशिक्षण दिया करेंगे।