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देखिए, भारत के पानी में पाकिस्तानी किसानों ने लगाई सेंध, ऐसे लूट रहे सतलुज का 'खजाना'
Tue, 18 Jun 2019 06:02 PM IST
खुशबू गोयल
अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर
अनिल कुमार, अमर उजाला, फिरोजपुर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 18 Jun 2019 06:02 PM IST
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सतलुज दरिया
- फोटो : फाइल फोटो
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भारत के पानी में पाकिस्तान के किसान सेंध लगा रहे हैं। भीषण गर्मी के चलते जहां देश में हाहाकार मचा है, वहां पाकिस्तानी धड़ाधड़ सतलुज का खजाना लूट रहे हैं, जानिए कैसे।
सतलुज दरिया
- फोटो : फाइल फोटो
पाकिस्तान के पंजाब के आधे से ज्यादा गांवों के किसान सतलुज दरिया के पानी का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। हरिके पत्तन हेड से हुसैनीवाला हेड के बीच दरिया से सटे पाकिस्तानी गांवों के किसान सतलुज दरिया के पानी से सिंचाई कर रहे हैं। हरिके हेड से हुसैनीवाला हेड के बीच का सतलुज दरिया कई बार पाकिस्तान के गांवों में प्रवेश होकर भारत में घुसता है। हरिके हैड से किसानों के लिए नहरों में पानी छोड़ा जाता है, यही पानी दरिया से सटे पाकिस्तानी गांवों के किसान इस्तेमाल करते हैं।
सतलुज दरिया
- फोटो : फाइल फोटो
किसान मलकीत सिंह ने बताया कि उन्हें धान की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल के पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। खेतों से गुजरने वाली नहरें सूखी पड़ी हैं। सतलुज दरिया के पानी का फायदा पाकिस्तानी किसान उठा रहे हैं। दरिया के साथ कई पाकिस्तानी गांव बसे हैं। सतलुज दरिया हरिके पत्तन से हुसैनीवाला हेड की तरफ बहता है तो कई बार पाक में प्रवेश करके भारत में घुसता है। इन दिनों में हरिके हेड से नहरों में पानी छोड़ा जाता है, जो पाक गांवों से होकर हुसैनीवाला हेड तक पहुंचता है।
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सतलुज दरिया
- फोटो : फाइल फोटो
किसान दर्शन सिंह का कहना है कि हरिके पत्तन से जब पानी छोड़ा जाता है, तो वह पट्टी, मुठियांवाला, बंडाला व बीएसएफ बीओपी सम्मके की तरफ पाक से होकर भारत में प्रवेश करता है। इन्हीं दिनों में पाक किसान धान की खेती करते हैं और सतलुज दरिया के पानी का भरपूर फायदा उठाते हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारी राजीव गोयल का कहना है कि धान की सिंचाई के लिए हरिके पत्तन से नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। जो नहरें सूखी हैं, उनकी सफाई की गई है, जल्द ही पानी छोड़ दिया जाएगा।
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सतलुज दरिया
- फोटो : फाइल फोटो
उन्होंने कहा कि सतलुज दरिया में भी पानी छोड़ा गया है, क्योंकि पीछे बांधों में पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। बरसात के सीजन में पहाड़ों से पानी बांधों में बढ़ेगा, इसीलिए समय अनुसार पानी बांधों से छोड़ा जा रहा है। हरिके पत्तन और हुसैनीवाला हेड में पानी स्टोर करने की क्षमता कम है। जितनी क्षमता है उतना पानी स्टोर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1988 में अचानक बाढ़ आ गई थी, इसीलिए इसे मद्देनजर पानी छोड़ा जा रहा है।