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सख्त मिजाजी थे 'सुपरकॉप' गिल, यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगे, 11 अनकहीं बातें
amarujala.com- presented by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 27 May 2017 09:15 AM IST
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पंजाब के पूर्व DGP केपीएस गिल नहीं रहे
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पंजाब के 'सुपरकॉप' और पूर्व डीजीपी केपीएस गिल के नाम से जहां अपराधी कांपते थे, वहां वे कई बार विवादों में भी रहे। जानिए उनके बारे में सब कुछ।
केपीएस गिल दो बार बनें पंजाब पुलिस के मुखिया
- फोटो : Getty Images
किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे
पूर्व डीजीपी केपीएस गिला का शुक्रवार को निधन हो गया। वे 82 साल के थे और दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। वहीं पर उन्होंने आखिरी सांस ली। बताया जा रहा है कि केपीएस गिल लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वह किडनी से जुड़ी बीमारियों के कारण परेशान थे। किडनी फेल होने के कारण ही उनकी मौत हुई।
पूर्व डीजीपी केपीएस गिला का शुक्रवार को निधन हो गया। वे 82 साल के थे और दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था। वहीं पर उन्होंने आखिरी सांस ली। बताया जा रहा है कि केपीएस गिल लंबे समय से बीमार चल रहे थे। वह किडनी से जुड़ी बीमारियों के कारण परेशान थे। किडनी फेल होने के कारण ही उनकी मौत हुई।
पंजाब के पूर्व DGP केपीएस गिल नहीं रहे
24 साल की उम्र में ज्वॉइन की थी पुलिस
केपीएस गिल 24 साल की उम्र में पुलिस सेवा में आए। गिल ने भारतीय पुलिस सेवा में अपने कैरियर की शुरुआत पूर्वोत्तर के राज्य असम से की। वे यहां 28 साल रहे। शुरुआती दिनों में ही उन्होंने खुद को एक सख्त अधिकारी के रूप में स्थापित कर लिया। पंजाब पुलिस के प्रमुख के रूप में 1990 के दशक में वह पूरे देश में प्रसिद्ध हुए थे।
केपीएस गिल 24 साल की उम्र में पुलिस सेवा में आए। गिल ने भारतीय पुलिस सेवा में अपने कैरियर की शुरुआत पूर्वोत्तर के राज्य असम से की। वे यहां 28 साल रहे। शुरुआती दिनों में ही उन्होंने खुद को एक सख्त अधिकारी के रूप में स्थापित कर लिया। पंजाब पुलिस के प्रमुख के रूप में 1990 के दशक में वह पूरे देश में प्रसिद्ध हुए थे।
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पंजाब के पूर्व DGP केपीएस गिल नहीं रहे
पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया था
80 के दशक में जब पूरा पंजाब आतंकवाद की आग में झुलस रहा था, तब उन्होंने खालिस्तानी आतंकवादियों से काफी सख्ती से निपटा था। उन्होंने राज्य में आतंकवाद की कमर तोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके लिए उन पर मानवाधिकार उल्लंघन के भी आरोप लगे हैं। गिल को उनकी सेवा के लिए 1989 में पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया था। केपीएस गिल 1995 में पुलिस फोर्स से रिटायर हुए थे।
80 के दशक में जब पूरा पंजाब आतंकवाद की आग में झुलस रहा था, तब उन्होंने खालिस्तानी आतंकवादियों से काफी सख्ती से निपटा था। उन्होंने राज्य में आतंकवाद की कमर तोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके लिए उन पर मानवाधिकार उल्लंघन के भी आरोप लगे हैं। गिल को उनकी सेवा के लिए 1989 में पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया था। केपीएस गिल 1995 में पुलिस फोर्स से रिटायर हुए थे।
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पंजाब के पूर्व DGP केपीएस गिल नहीं रहे
आतंकवाद निरोधी मामलों के सलाहकार रहे
रिटायर होने के बाद गिल भारत सरकार के आतंकवाद निरोधी मामलों के सलाहकार भी रहे। उनको पंजाब सरकार में सुरक्षा सलाहकार बनाया गया था। गिल को छत्तीसगढ़ की रमन सरकार ने भी नक्सली समस्या के समाधान के लिए सुरक्षा सलाहकार बनाया था, लेकिन उन्हें ज्यादा काम करने का मौका नहीं मिला। गिल इंडियन हॉकी फेडरेशन (IHF) के प्रेसिडेंट भी थे। इस दौरान भारतीय हाकी टीम ने कई ऊंचाईयों को छुआ और मेडल जीते।
रिटायर होने के बाद गिल भारत सरकार के आतंकवाद निरोधी मामलों के सलाहकार भी रहे। उनको पंजाब सरकार में सुरक्षा सलाहकार बनाया गया था। गिल को छत्तीसगढ़ की रमन सरकार ने भी नक्सली समस्या के समाधान के लिए सुरक्षा सलाहकार बनाया था, लेकिन उन्हें ज्यादा काम करने का मौका नहीं मिला। गिल इंडियन हॉकी फेडरेशन (IHF) के प्रेसिडेंट भी थे। इस दौरान भारतीय हाकी टीम ने कई ऊंचाईयों को छुआ और मेडल जीते।