सड़क हादसे में मारे गए सभी नौ युवकों ने अपने-अपने घर फोन कर सेना की भर्ती के लिए फिजिकल सही तरीके से होने की सूचना दी थी। इस समाचार को पाकर सभी खुश थे। सभी परिवारों की आर्थिक स्थिति सामान्य है। किसी ने अपने बच्चों को मजदूरी करके पाला तो, किसी ने अपनी छोटी सी खेतीबाड़ी के सहारे। हादसे ने एक ही झटके ने सभी परिवारों को उजाड़ दिया। सभी परिवारों को यह लगा था कि उनका बेटा सेना में भर्ती हो जाएगा और उनके अच्छे दिन आएंगे, लेकिन किस्मत का यह मंजूर नहीं था।
हादसे की 10 दर्दनाक कहानियां: उजड़े कई परिवार, बुझ गए इकलौते चिराग, गांवों में नहीं जले चूल्हे
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1- मां को किया था फोन
गांव पिल्लूखेड़ा निवासी 20 वर्षीय अमित के पिता सरवर की दस महीने पहले बीमारी के कारण मौत हो गई थी। उसका एक छोटा भाई सुमित भी है। दो एकड़ जमीन के मालिक अमित के पिता किसान थे। फिलहाल दोनों बच्चों को उनकी मां मुकेश पाल रही थी। मेहनत-मजदूरी करके अपने दोनों बेटों को 12वीं कक्षा तक पढ़ाया था। अमित आईटीआई भी कर रहा था। अमित ने रात आठ बजे अपनी मां को फोन करके सूचना दी थी कि उसका फिजिकल सही हो गया है। मेडिकल टेस्ट में भी वह पास हो जाएगा, इसलिए आज घर आएगा, क्योंकि सभी दोस्त घर आ रहे हैं। वह शुक्रवार को मेडिकल टेस्ट देने जाएगा, लेकिन रात 11 बजे आए फोन ने मां के सारे सपने को चकनाचूर कर दिया।
2- पिता को मिली थी मेडिकल फिटनेस की सूचना
पिल्लूखेड़ा निवासी राममेहर को रात में उसके 19 वर्षीय बेटे भारत ने बताया कि मेरा मेडिकल सही हो गया। अब मैं जल्द ही देश की सेवा में लग जाऊंगा। राममेहर को लगा कि जिस मेहनत व खेतीबाड़ी से उसने अपने बेटे को पढ़ाया है, उससे उसका सपना साकार हो जाएगा। राममेहर का एक छोटा बेटा है जो 10वीं कक्षा में पढ़ता है। रात को जब राममेहर के पास फोन आया कि उसके बेटे की सड़क हादसे में मौत हो गई तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई। यह सुनकर राममेहर कहने लगा कि ये धरती अभी फट जाए और उसमें समा जाऊं। राममेहर ने भारत के लिए सपना देखा था वह सब खत्म हो गया।
3- पिल्लूखेड़ा में जलीं एक साथ दो चिताएं
गांव पिल्लूखेड़ा निवासी भारत व अमित की मौत से पूरे गांव में मातम छा गया। भारत और अमित की एक साथ चिता जलाई गई। पूरा गांव शोक में डूब गया। हर किसी की जुबान पर केवल यही था कि हे भगवान, यह क्या किया।
4- उजड़ गई धड़ौली निवासी सुभाष की दुनिया
धड़ौली निवासी सुभाष मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा था। उसके बड़े बेटे अमित की नौ माह पहले बीमारी से मौत हो गई थी। अब इस सड़क हादसे ने छोटे बेटे 21 वर्षीय सुमित की भी जान ले ली। बड़े बेटे अमित की मौत से सुभाष अभी तक उबर भी नहीं पाया था कि उसका दूसरा बेटा भी छिन गया। रह-रहकर सुभाष पुकार रहा था कि बेटा मेरे को भी ले चल। सुभाष की एक बेटी ममता है, जो शादीशुदा है। सुमित की रात को 8.20 बजे अपने चाचा चांद व चचेरे भाई सन्नी से बात की थी। सुमित ने कहा था कि वह साढ़े 10-11 बजे तक जींद पहुंच जाएगा। इसलिए आप बाइक लेकर उसे जींद लेने आ जाना, लेकिन जब दोनों जींद में सुमित का इंतजार कर रहे थे, तो उन्हें सड़क हादसे का फोन मिला। दो जवान बेटों को खोने वाले सुभाष का रो-रोकर बुरा हाल है। सुभाष के अनुसार बड़े बेटे की मौत के बाद ही वह इतना टूट गया था कि घर जाने से भी कतराता था, अब तो उसकी दुनिया ही उजड़ गई है।