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20 साल की उम्र में बेटी ने रच दिया ऐसा इतिहास, IAS पिता के छलक आए आंसू
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 20 Mar 2018 09:59 AM IST
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गौरी श्योराण
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बेटी ने 20 साल की उम्र में इतिहास रचकर नाम रोशन कर दिया तो आईएएस पिता के आंसू छलक आए। जानिए कौन है और उनके बारे में सब कुछ।
गौरी श्योराण
हम बात कर रहे हैं, चंडीगढ़ की युवा शूटर गौरी श्योराण की। गौरी ने 7वें वर्ल्ड यूनिवर्सिटी शूटिंग चैंपियनशिप में 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल इवेंट में गोल्ड जीतकर देश के साथ साथ शहर का मान बढ़ाया। इस टूर्नामेंट में 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली गौरी शहर की एकमात्र खिलाड़ी हैं, जिन्होंने मलेशिया के क्वालालंपुर में खेली गई चैंपियनशिप में अपनी प्रतिभा का प्रमाण दिया। इस चैंपियनशिप में विश्व के टॉप शूटरों ने हिस्सा लिया।
गौरी श्योराण
गौरी श्यौराण कुल 37 अंक लेकर पहले स्थान पर रही। चीन की ए-वांग कुल 33 अंक लेकर दूसरे स्थान पर रहे। रशिया की अंसकल ने 24 अंक बटोरे। गौरी का मेडल जीतना इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह इवेंट हर दो साल बाद होती है। गौरी चंडीगढ़ में रहती हैं और हरियाणा की ओर से खेलती हैं। इस होनहार बेटी को शूटिंग में शानदार उपलब्धियों के मद्देनजर हरियाणा सरकार ने गौरी को 2016-17 के भीम अवॉर्ड से भी सम्मानित किया है।
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गौरी श्योराण
गौरी के पिता जगदीप सिंह आईएएस हैं और हरियाणा के स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट में डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं। गौरी की जीत के बाद से पूरे हरियाणा में खुशी की लहर हैं। गौरी के पिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि गौरी को शूटर बनाने का फैसला सही था। उन्होंने कहा कि शायद मैं भारत का पहला ऐसा आइएएस हूं, जिसने अपने बच्चों को स्पोर्ट्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया है। उम्मीद है कि गौरी ओलंपिक में देश का नाम रौशन करेगी।
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गौरी श्योराण
मूल रूप से भिवानी की तहसील लोहारू गांव की रहने वाली गौरी श्योराण का जन्म 1997 में हुआ था। महज 12 साल की उम्र से ही निशानेबाजी के प्रति गौरी का झुकाव हुआ और तभी से अभ्यास भी शुरू कर दिया था। 2010 से गौरी ने निशानेबाजी के टूर्नामेंटों में शिरकत करना शुरू कर दिया। गौरी एक विदेशी कोच से ट्रेनिंग लेती हैं, जबकि उनके राष्ट्रीय कोच जाने माने शूटर जसपाल राणा हैं।