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देखिए, GST ने कैसे महंगा कर दिया है किसी को भी गिफ्ट देना
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 04 Aug 2017 09:54 AM IST
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gift handover tax payment.
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देशभर में GST को लागू हुए अब एक महीने से ज्यादा हो गया है लेकिन अभी तक लोग और दुकानदार इसे अच्छे से समझ नहीं पाए हैं।
gift handover
आप कपड़ा व्यापारी हैं और यदि कपड़ा बेचते हैं तो पांच फीसदी जीएसटी का भुगतान ही करना होगा लेकिन अगर कपड़े को सूट बनाकर सेल किया तो इसमें 12 फीसदी तक टैक्स का भुगतान भी करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, जीएसटी के फार्मूले में अलग अलग कपड़ों और अन्य आइटम प्रोडक्ट का गिफ्ट हैंपर बनाकर बेचने पर आपको उच्चतम जीएसटी का भुगतान करना पड़ सकता है।
गिफ्ट हैंपर
- फोटो : GETTY IMAGES
आल इंडिया फेडरेशन आफ क्लाथ रिटेलर्स एसोसिएशन द्वारा चंडीगढ़ के होटल जीके इंटरनेशनल में आयोजित सेमिनार में एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों द्वारा ऐसी ही जानकारी कपड़ा व्यापारियों को दी गईं। इस मौके पर कमिश्नर किशोरी लाल, असिस्टेंट कमिश्नर रंजन दत्त, डिप्टी कमिश्नर ममता मौजूद थीं। इस मौके पर मदन गुलाटी, चरंजीव सिंह, सुधीर जैन, अनिल वोहरा और आल इंडिया फेडरेशन आफ क्लाथ रिटेलर्स एसोसिएशन के महासचिव अरविंद जैन मौजूद रहे। इस सेमिनार को 125 लोगों ने अटैंड किया।
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गिफ्ट हैंपर
इस मौके पर रेडीमेड और कपड़ा व्यापारी, होलसेल व्यापारियों को बताया गया कि कपड़ा कैसा भी हो, उसके ऊपर पांच फीसदी ही जीएसटी लगेगा। हां, यदि कपड़े का सूट बनाकर बेचते हैं तो एक हजार रुपये से कम की कीमत वाले सूट पर पांच फीसदी और एक हजार रुपये से ज्यादा की कीमत वाले सूट पर 12 फीसदी टैक्स लगेगा।
इसके साथ ही अधिकारियों ने बताया कि यदि पांच फीसदी, बारह फीसदी और 28 फीसदी वाले प्रोडक्ट को मिलाकर गिफ्ट हैंपर तैयार किया गया तो इन तीनों का सबसे ज्यादा जीएसटी वाले प्रोडक्ट का ही जीएसटी काउंट किया जाएगा। अच्छी बात यह है कि हरेक वस्तु पर इनपुट क्रेडिट मिलना तय है।
इसके साथ ही अधिकारियों ने बताया कि यदि पांच फीसदी, बारह फीसदी और 28 फीसदी वाले प्रोडक्ट को मिलाकर गिफ्ट हैंपर तैयार किया गया तो इन तीनों का सबसे ज्यादा जीएसटी वाले प्रोडक्ट का ही जीएसटी काउंट किया जाएगा। अच्छी बात यह है कि हरेक वस्तु पर इनपुट क्रेडिट मिलना तय है।
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गिफ्ट हैंपर
अब आन अप्रूवल माल नहीं
जीएसटी अधिकारियों ने बताया कि अब आन अप्रूवल माल नहीं भेजा जा सकेगा। पहले डेबिट और क्रेडिट नोट पर धंधा हो जाता था और अब ऐसा नहीं हो सकेगा। यदि जिसको माल भेजा गया है और उसका पेमेंट साठ दिन में नहीं आता है तो जीएसटी क्रेडिट वापस लिया जा सकता है। इसके साथ ही यदि 180 दिन तक पेमेंट नहीं होता है तो उसके ऊपर व्याज देना होगा।
जीएसटी अधिकारियों ने बताया कि अब आन अप्रूवल माल नहीं भेजा जा सकेगा। पहले डेबिट और क्रेडिट नोट पर धंधा हो जाता था और अब ऐसा नहीं हो सकेगा। यदि जिसको माल भेजा गया है और उसका पेमेंट साठ दिन में नहीं आता है तो जीएसटी क्रेडिट वापस लिया जा सकता है। इसके साथ ही यदि 180 दिन तक पेमेंट नहीं होता है तो उसके ऊपर व्याज देना होगा।