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100 से ज्यादा टेस्ट और 7000+ रन: राहुल द्रविड़ के बाद कैसे चेतेश्वर पुजारा बने भारतीय टीम की 'दीवार', जानिए

Sun, 24 Aug 2025 06:39 PM IST
Mayank Tripathi स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mayank Tripathi Updated Sun, 24 Aug 2025 06:39 PM IST
सार

भारतीय क्रिकेट में पुजारा योगदान छक्कों या स्ट्राइक रेट से नहीं, बल्कि क्रीज पर बिताया समय, धैर्य और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आक्रमणों का दिलेरी से सामना करने से मापा जाता है। उस दौर में भारतीय बल्लेबाजी की तुलना अगर किसी भव्य इमारत से करें तो कोहली उसके वास्तुकार थे लेकिन इसकी नींव निश्चित रूप से चेतेश्वर पुजारा थे।

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Cheteshwar Pujara International Retirement from cricket check unmatched records achievements stats
चेतेश्वर पुजारा - फोटो : ANI
चेतेश्वर पुजारा ना तो विराट कोहली की तरह दिलकश कवर ड्राइव लगाते थे, ना ही रोहित शर्मा की तरह पुल शॉट लगाते थे, उनके पास ऋषभ पंत की तरह सांसे रोक देने वाले गिरते हुए हुक शॉट खेलने की भी क्षमता नहीं थी लेकिन टी20 क्रिकेट के युग में उन्होंने अपनी बेहतरीन तकनीक, मजबूत मानसिकता और अदम्य धैर्य के साथ टेस्ट क्रिकेट के हर पैमाने पर खुद को साबित किया। भारतीय टीम में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और सौरव गांगुली जैसे दिग्गजों के दौर के बाद कलात्मक बल्लेबाजों के बीच पुजारा 2013-14 से 2023 तक 100 से ज्यादा टेस्ट मैच में भारतीय बल्लेबाजी की धुरी बने रहे।
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चेतेश्वर पुजारा - फोटो : ANI
भारतीय क्रिकेट में उनका योगदान छक्कों या स्ट्राइक रेट से नहीं, बल्कि क्रीज पर बिताया समय, धैर्य और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आक्रमणों का दिलेरी से सामना करने से मापा जाता है। उस दौर में भारतीय बल्लेबाजी की तुलना अगर किसी भव्य इमारत से करें तो कोहली उसके वास्तुकार थे लेकिन इसकी नींव निश्चित रूप से चेतेश्वर पुजारा थे। धैर्य के साथ खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट को पसंद करने वालों के लिए पुजारा उस दौर की याद दिलाते थे जब टी20 क्रिकेट का कोई अस्तित्व ही नहीं था।
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चेतेश्वर पुजारा - फोटो : ANI
पुजारा के पिता अरविंद ने प्रथम श्रेणी के कुछ मैच खेले थे और सीमित संसाधनों के बावजूद चेतेश्वर के लिए उनके सपने बड़े थे। टी20 क्रिकेट की लोकप्रियता के बाद मौजूदा दौर के प्रशंसकों ने पुजारा की बल्लेबाजी को अप्रत्याशित रूप से अपरंपरागत करार दिया लेकिन दायें हाथ के इस बल्लेबाज के पिता ने बचपन में उनके दिमाग में यह बात बैठा दी थी टेस्ट क्रिकेट ही असली क्रिकेट है।
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पुजारा और पूजा - फोटो : instagram
उनकी पत्नी पूजा ने अपनी किताब 'द डायरी ऑफ ए क्रिकेटर्स वाइफ: एन अनयूजअल मेमॉयर' में संक्षेप में कहा है, 'चेतेश्वर पुजारा कम बोलने वाले और भावनाओं का कम इजहार करने वाले व्यक्ति हैं। अगर एक मुस्कान से काम चल सकता है तो वह बोलना पसंद नहीं करते। अगर एक वाक्य तीन शब्दों में खत्म हो सकता है, तो वह एक और शब्द जोड़ने की कोशिश नहीं करेंगे।' वह टीम के ऐसे 'भरोसेमंद' योद्धा थे जिसे आप युद्ध में जाते समय अपने साथ रखना चाहेंगे।
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चेतेश्वर पुजारा - फोटो : ANI
जब कोहली ने कमान संभाली, तो पुजारा जानते थे कि उन्हें क्या करना है। गाबा में जब पंत ने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों की बखिया उधेड़ी तो दूसरी ओर पुजारा ना सिर्फ क्रीज पर डटे रहे बल्कि तेज गेंदों की 11 गेंदें अपने शरीर पर झेली। उनकी 211 गेंद में 56 रन की पारी ने उनके व्यक्तित्व को बखूब ही दर्शाया। एक ठोस व्यक्ति, एक मजबूत शरीर और टीम के लिए जरूरी रन। जब ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक जीत के बाद टीम में हर कोई अपनी चमक दिखा रहा था तो वहीं पुजारा के शरीर के घाव ही उनके सम्मान का प्रतीक बन गए। गाबा में पंत की आक्रामक और असाधारण पारी की सफलता का श्रेय भी काफी हद तक पुजारा के उत्कृष्ट और साहसिक बल्लेबाजी को जाता है।
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