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IND vs NZ: मुंबई में सिराज ने छह ओवर गेंदबाजी की...अश्विन रहे बेअसर, टीम इंडिया के क्लीन स्वीप होने के छह कारण
Mon, 04 Nov 2024 08:56 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 04 Nov 2024 08:56 AM IST
सार
महान बल्लेबाजों की श्रेणी में आने वाले विराट कोहली और कप्तान रोहित शर्मा तो सीरीज में 100 रन भी नहीं बना पाए। सीरीज में 244 रन बनाने वाले न्यूजीलैंड के बल्लेबाज विल यंग प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने गए। आइए जानते हैं कि इस सीरीज में भारत की हार के प्रमुख कारण क्या-क्या रहे...
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भारत बनाम न्यूजीलैंड
- फोटो : BCCI
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स्पिन गेंदबाजी के शेर कहे जाने वाले भारतीय दिग्गज बल्लेबाज न्यूजीलैंड के स्पिनरों के आगे ऐसे ढेर हुए कि 3-0 से सीरीज सफाए का शर्मनाक इतिहास रचवा बैठे। वानखेड़े की जबरदस्त रूप से स्पिन हो रही पिच पर भारतीय बल्लेबाज रविवार को 147 रन के लक्ष्य को नहीं छू पाए। टीम 29.1 ओवर में महज 121 रन पर सिमट गई और 25 रन से तीसरा टेस्ट गंवा बैठी। भारतीय टीम 24 वर्ष बाद घर में सीरीज के सभी टेस्ट हारी है। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका ने भारत से वर्ष 2000 में दो टेस्ट मैच की सीरीज 2-0 से जीती थी। यह 91 वर्ष में पहली बार है जब भारतीय टीम का अपने घर में सीरीज में 3-0 से सफाया हुआ है।
रोहित शर्मा
- फोटो : BCCI
1. रोहित का गलत फैसला
रोहित शर्मा की ओर से ओवरकास्ट कंडीशन में बंगलूरू टेस्ट में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी के फैसले ने पूरी सीरीज की दिशा बदल दी। भारत को 46 रन पर समेटने के बाद न्यूजीलैंड मनोवैज्ञानिक रूप से हावी हो गया। उसके बाद तो टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। टीम इतनी आत्मविश्वास में दिखी कि उन्हें केन विलियम्सन तक की कमी नहीं हुई। विल यंग ने विलियम्सन की भरपाई की, तो जरूरत पड़ने पर पुछल्ले बल्लेबाजों ने भी रन जोड़े। भारतीय तेज गेंदबाज हों या स्पिनर्स, वह कीवी बल्लेबाजों के आगे बेअसर दिखे। वहीं, गेंदबाजी में कीवियों ने सूझबूझ वाला खेल दिखाया। वह लाइन लेंथ से नहीं भटके और हर भारतीय बल्लेबाज के लिए बनाए गए प्लान पर अमल किया।
रोहित शर्मा की ओर से ओवरकास्ट कंडीशन में बंगलूरू टेस्ट में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी के फैसले ने पूरी सीरीज की दिशा बदल दी। भारत को 46 रन पर समेटने के बाद न्यूजीलैंड मनोवैज्ञानिक रूप से हावी हो गया। उसके बाद तो टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। टीम इतनी आत्मविश्वास में दिखी कि उन्हें केन विलियम्सन तक की कमी नहीं हुई। विल यंग ने विलियम्सन की भरपाई की, तो जरूरत पड़ने पर पुछल्ले बल्लेबाजों ने भी रन जोड़े। भारतीय तेज गेंदबाज हों या स्पिनर्स, वह कीवी बल्लेबाजों के आगे बेअसर दिखे। वहीं, गेंदबाजी में कीवियों ने सूझबूझ वाला खेल दिखाया। वह लाइन लेंथ से नहीं भटके और हर भारतीय बल्लेबाज के लिए बनाए गए प्लान पर अमल किया।
रोहित और विराट
- फोटो : BCCI
2. स्पिन पिच का दांव पड़ा उल्टा
बंगलूरू की हार के बाद प्रबंधन ने पुणे और मुंबई में स्पिन पिच का दांव चला जो उल्टा पड़ा। 147 का लक्ष्य छोटा जरूर दिख रहा था, लेकिन पिच की स्थिति देखते हुए आसान नहीं था। हुआ भी यही, रोहित शर्मा अपनी आक्रामक रणनीति पर कायम रहे और फिर निराश किया। वह 11 गेंद में 11 रन बनाकर हेनरी की गेंद पर आउट हुआ। भारत का स्कोर इस दौरान 13 रन था। यहां से एजाज पटेल और फिलिप्स की स्पिन ने ऐसा कमाल किया कि भारत ने 16 रन के अंतराल में पांच विकेट खो दिए। शून्य पर 13 से स्कोर पांच विकेट पर 29 रन हो गया। शुभमन (1), विराट (1), यशस्वी (5), सरफराज (1) तू चल मैं आया वाली श्रेणी में शामिल हो गए। आलम यह है कि टीम इंडिया को आगे किसी घरेलू सीरीज में स्पिन पिच बनाने से पहले 10 बार सोचना होगा।
बंगलूरू की हार के बाद प्रबंधन ने पुणे और मुंबई में स्पिन पिच का दांव चला जो उल्टा पड़ा। 147 का लक्ष्य छोटा जरूर दिख रहा था, लेकिन पिच की स्थिति देखते हुए आसान नहीं था। हुआ भी यही, रोहित शर्मा अपनी आक्रामक रणनीति पर कायम रहे और फिर निराश किया। वह 11 गेंद में 11 रन बनाकर हेनरी की गेंद पर आउट हुआ। भारत का स्कोर इस दौरान 13 रन था। यहां से एजाज पटेल और फिलिप्स की स्पिन ने ऐसा कमाल किया कि भारत ने 16 रन के अंतराल में पांच विकेट खो दिए। शून्य पर 13 से स्कोर पांच विकेट पर 29 रन हो गया। शुभमन (1), विराट (1), यशस्वी (5), सरफराज (1) तू चल मैं आया वाली श्रेणी में शामिल हो गए। आलम यह है कि टीम इंडिया को आगे किसी घरेलू सीरीज में स्पिन पिच बनाने से पहले 10 बार सोचना होगा।
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विराट-रोहित-जडेजा-अश्विन
- फोटो : BCCI
3. दिग्गजों का फ्लॉप शो
दिग्गज विराट और रोहित अपने प्रदर्शन से टीम के आगे उदाहरण नहीं रख पाए। विराट ने तीन टेस्ट में 15.5 की औसत से 93 और रोहित ने 15.16 की औसत से 91 रन बनाए। इन दोनों का न चलना और खराब शॉट खेलकर आउट होने ने बाकी बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। अगर टीम के दो दिग्गज बल्लेबाज जल्दी आउट हो रहे तो यह तो है ही कि बाकी बल्लेबाज यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि क्या वाकई पिच मुश्किल है। ऐसा ही हुआ भी। एक-एक करते सभी बल्लेबाज वापस पवेलियन लौटते गए। ऋषभ पंत और कुछ हद तक शुभमन गिल को छोड़कर किसी बल्लेबाज ने पिच पर खड़े होकर धैर्य के साथ खेलने की जहमत नहीं दिखाई।
दिग्गज विराट और रोहित अपने प्रदर्शन से टीम के आगे उदाहरण नहीं रख पाए। विराट ने तीन टेस्ट में 15.5 की औसत से 93 और रोहित ने 15.16 की औसत से 91 रन बनाए। इन दोनों का न चलना और खराब शॉट खेलकर आउट होने ने बाकी बल्लेबाजों पर दबाव बनाया। अगर टीम के दो दिग्गज बल्लेबाज जल्दी आउट हो रहे तो यह तो है ही कि बाकी बल्लेबाज यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि क्या वाकई पिच मुश्किल है। ऐसा ही हुआ भी। एक-एक करते सभी बल्लेबाज वापस पवेलियन लौटते गए। ऋषभ पंत और कुछ हद तक शुभमन गिल को छोड़कर किसी बल्लेबाज ने पिच पर खड़े होकर धैर्य के साथ खेलने की जहमत नहीं दिखाई।
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अश्विन
- फोटो : BCCI
4. अश्विन रहे बेअसर
बांग्लादेश के खिलाफ अश्विन का गेंद और बल्ले दोनों से प्रभाव रहा था, लेकिन इस सीरीज में वह कुछ खास नहीं कर पाए। उन्होंने एक बार भी पारी में पांच विकेट नहीं मिला। अश्विन के लिए यह घरेलू टेस्ट सीरीज कुछ खास नहीं रही। उन्होंने तीन टेस्ट में नौ विकेट लिए। इस दौरान उनका गेंदबाजी औसत 41.22 का रहा। यह किसी घरेलू टेस्ट सीरीज में अश्विन का दूसरा सबसे खराब गेंदबाजी औसत है। 2012/13 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उनका गेंदबाजी औसत 52.64 का रहा था। यही वो दो घरेलू सीरीज हैं जिसमें टीम इंडिया का प्रदर्शन भी खराब रहा है। भारत ने ये दोनों सीरीज गंवाए हैं। यानी अश्विन अगर किसी घरेलू सीरीज में अच्छी गेंदबाजी नहीं करते तो इसका सीधा असर टीम इंडिया पर पड़ता है। अश्विन ने अब तक अपने करियर में यही दो घरेलू टेस्ट सीरीज गंवाए भी हैं।
बांग्लादेश के खिलाफ अश्विन का गेंद और बल्ले दोनों से प्रभाव रहा था, लेकिन इस सीरीज में वह कुछ खास नहीं कर पाए। उन्होंने एक बार भी पारी में पांच विकेट नहीं मिला। अश्विन के लिए यह घरेलू टेस्ट सीरीज कुछ खास नहीं रही। उन्होंने तीन टेस्ट में नौ विकेट लिए। इस दौरान उनका गेंदबाजी औसत 41.22 का रहा। यह किसी घरेलू टेस्ट सीरीज में अश्विन का दूसरा सबसे खराब गेंदबाजी औसत है। 2012/13 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उनका गेंदबाजी औसत 52.64 का रहा था। यही वो दो घरेलू सीरीज हैं जिसमें टीम इंडिया का प्रदर्शन भी खराब रहा है। भारत ने ये दोनों सीरीज गंवाए हैं। यानी अश्विन अगर किसी घरेलू सीरीज में अच्छी गेंदबाजी नहीं करते तो इसका सीधा असर टीम इंडिया पर पड़ता है। अश्विन ने अब तक अपने करियर में यही दो घरेलू टेस्ट सीरीज गंवाए भी हैं।