बैंक में खाता है तो एटीएम कार्ड भी जरूर यूज करते होंगे। ध्यान दें, यह खबर बैंक खाताधारकों के लिए खतरे का अलर्ट लेकर आई है।
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बैंक खाताधारकों के लिए खतरे की घंटी, ध्यान दें वरना लुट जाएगी जमा-पूंजी
आरडी खान, अमर उजाला, काशीपुर
Updated Thu, 05 Jul 2018 05:59 PM IST
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- फोटो : amar ujala
एटीएम कार्ड बदलकर खातों से रकम निकाले जाने के मामले तो आम हैं, लेकिन अब क्लोन एटीएम कार्डों के जरिये खातों से रकम उड़ाई जा रही है। पिछले एक माह में अकेले काशीपुर कोतवाली में ऐसे चार मामले सामने आए हैं। इनमें से तीन मामलों में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दो खाते एसबीआई और एक खाता पीएनबी से संबंधित है। खाता धारकों का कहना है कि उनके एटीएम कार्ड उनके पास सुरक्षित हैं। जांच में पाया गया कि इन खातों से रकम कलकत्ता में निकाली गई है। एसबीआई के मुख्य शाखा प्रबंधक नीरज गौड़ ने बताया कि यह दोनों प्रकरण हेल्पलाइन के माध्यम से जांच के लिए उच्चाधिकारियों को रेफर कर दिए गए हैं।
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काशीपुर कोतवाली में हेमपुर निवासी सावित्री ने रिपोर्ट दर्ज कराकर कहा था कि एटीएम कार्ड उसके पास सुरक्षित होने के बावजूद उसके खाते से करीब तीन लाख रुपये की रकम उड़ा ली गई। बैंक से शिकायत करने पर पता लगा कि उक्त रकम गुजरात की एटीएम मशीनों से निकाली गई है। मंगलवार को मोहल्ला थाना साबिक निवासी ऋतु अग्रवाल ने कोतवाली में एटीएम से धोखाधड़ी कर खाते से 16 हजार रुपये व मानपुर रोड निवासी रमेश चंद्र ने 53 हजार 500 रुपये निकाले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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ऐसे बनता है आपके एटीएम कार्ड का क्लोन
हैकर एटीएम मशीनों में स्कीमर डिवाइस फिट कर क्लोन कार्ड बनाते हैं। क्लोन एटीएम कार्ड से रकम निकालने के लिए साइबर क्रिमिनल कार्ड स्वाइप वाले स्थान पर हूबहू स्कीमर डिवाइस लगा देते हैं। कार्ड स्वाइप करते ही डिवाइस में लगी मैग्नेटिक चिप उसका क्लोन बना लेती है। पासवर्ड प्राप्त करने के लिए हैकर एटीएम केबिन में सेंसर फिट कर देते हैं। बाद में स्कीमर डिवाइस और कैमरा निकालकर कार्ड का क्लोन तैयार किया जाता है। मशीनों में स्कीमर डिवाइस के अलावा हैकर ऑनलाइन शापिंग के दौरान उपयोग होने वाला डाटा भी चोरी कर लेते हैं।
हैकर एटीएम मशीनों में स्कीमर डिवाइस फिट कर क्लोन कार्ड बनाते हैं। क्लोन एटीएम कार्ड से रकम निकालने के लिए साइबर क्रिमिनल कार्ड स्वाइप वाले स्थान पर हूबहू स्कीमर डिवाइस लगा देते हैं। कार्ड स्वाइप करते ही डिवाइस में लगी मैग्नेटिक चिप उसका क्लोन बना लेती है। पासवर्ड प्राप्त करने के लिए हैकर एटीएम केबिन में सेंसर फिट कर देते हैं। बाद में स्कीमर डिवाइस और कैमरा निकालकर कार्ड का क्लोन तैयार किया जाता है। मशीनों में स्कीमर डिवाइस के अलावा हैकर ऑनलाइन शापिंग के दौरान उपयोग होने वाला डाटा भी चोरी कर लेते हैं।
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हैकिंग से बचाता है वर्चुअल कार्ड
एसबीआई के मुख्य शाखा प्रबंधक नीरज गौड़ ने बताया कि हैकरों से बचने के लिए नेट बैकिंग वाले खातों पर वर्चुअल कार्ड की सुविधा प्रदान की है। खातेदार ऑनलाइन भुगतान के लिए इस कार्ड का प्रयोग कर सकते हैं। खाते में यह कार्ड सिर्फ चौबीस घंटे के लिए एक्टिव रहता है। कार्ड की राशि खाते में होल्ड रखी जाती है। इसके इस्तेमाल से डाटा चोरी होने की कोई संभावना नहीं रहती। चौबीस घंटे बाद यह कार्ड स्वत: ही डिएक्टिवेट हो जाता है।
एसबीआई के मुख्य शाखा प्रबंधक नीरज गौड़ ने बताया कि हैकरों से बचने के लिए नेट बैकिंग वाले खातों पर वर्चुअल कार्ड की सुविधा प्रदान की है। खातेदार ऑनलाइन भुगतान के लिए इस कार्ड का प्रयोग कर सकते हैं। खाते में यह कार्ड सिर्फ चौबीस घंटे के लिए एक्टिव रहता है। कार्ड की राशि खाते में होल्ड रखी जाती है। इसके इस्तेमाल से डाटा चोरी होने की कोई संभावना नहीं रहती। चौबीस घंटे बाद यह कार्ड स्वत: ही डिएक्टिवेट हो जाता है।