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नया इतिहास: सीएम के लिए जीत से ज्यादा थे रिकॉर्ड के मायने, टीम धामी ने ऐसे किया काम, एक नजर में पढ़ें ये खास बातें और देखें तस्वीरें
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: रेनू सकलानी
Updated Sat, 04 Jun 2022 09:31 AM IST
सार
विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत लाने वाली भाजपा के सीएम पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट कांग्रेस के भुवन कापड़ी के हाथों हार गए थे। इसके बावजूद केंद्रीय आलाकमान ने उन पर विश्वास जताया और उन्होंने 23 मार्च को सीएम की दूसरी बार शपथ ली। 21 अप्रैल को चंपावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था।
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चंपावत उपचुनाव में सीएम धामी की जीत के बाद जश्न मनाते समर्थक
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत उपचुनाव में भाजपा के दो लक्ष्य थे। पहला रिकॉर्ड मतदान करना और दूसरा उपचुनाव में सबसे ज्यादा अंतर से जीत हासिल करना। मतदान में नया रिकॉर्ड बनाने की मंशा तो भाजपा की पूरी नहीं हो पाई, लेकिन उपचुनाव में सबसे ज्यादा अंतर से जीत हासिल करना लक्ष्य पूरा हो गया है।
सीएम पुष्कर सिंह धामी की जीत के साथ ही उत्तराखंड में नया इतिहास जुड़ गया है। उपचुनाव में उनकी जीत तो पहले से ही तय थी, लेकिन सीएम के लिए जीत से ज्यादा रिकॉर्ड के मायने थे और रिकॉर्ड जीत के लिए टीम धामी ने मजबूती से काम किया। चंपावत उपचुनाव में 58 हजार से अधिक वोटों से जीत नया कीर्तिमान रचा है।
पार्टी ने इस चुनाव को हल्के में नहीं लिया। यही वजह रही कि अब तक कोई मुख्यमंत्री उपचुनाव में इतने मतों से नहीं जीता है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा राज्य मंत्री और उत्तराखंड के दो पूर्व मुख्यमंत्री ने भी चंपावत आकर प्रचार को धार दी है। संगठन के स्तर पर राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम, सह प्रभारी रेखा वर्मा सहित संगठन के दिग्गजों ने कार्यकर्ताओं को अधिक मतदान के लिए प्रेरित करते रहे, जिसने धामी के पक्ष को मजबूत किया।
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जीत के जश्न
- फोटो : अमर उजाला
सीएम धामी की जीत के यूं तो कई मुख्य कारण रहे, लेकिन इसमें एक सबसे बड़ी वजह कमजोर विपक्ष भी रहा। चंपावत उपचुनाव प्रचार शुरू होने से मतदान निपटने तक कांग्रेस के 90 प्रतिशत वरिष्ठ कार्यकर्ता नदारद थे। इसके लिए सबने कई बहाने बनाए। कांग्रेस प्रत्याशी निर्मला गहतोड़ी भी इस रवैया से आहत हुई।
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जश्न मनाते भाजपा कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2012 के उपचुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने 53766 वोट लाकर सितारगंज सीट 39966 वोटों से जीती थी। वहीं चंपावत सीट पर सबसे बड़ी जीत 2017 में भाजपा के कैलाश गहतोड़ी की 17360 वोटों से रही।
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जश्न मनाते समर्थक
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष सीएम प्रत्याशी वोट प्रतिद्वंद्वी वोट जीत का अंतर
2002 एनडी तिवारी 32913 राम सिंह बिष्ट 9693 23220
2007 बीसी खंडूरी 24347 सुरेंद्र सिंह नेगी 10256 14091
2012 विजय बहुगुणा 53766 प्रकाश पंत 13800 39966
2014 हरीश रावत 31214 विष्णु दत्त 10610 20604
चंपावत उपचुनाव के एक दिन पहले भाजपा प्रत्याशी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वोटरों से संवाद किया था और अधिक से अधिक मतदान की अपील की। उन्होंने एक दुकान पर चाय की चुस्की ली। बाद में बाइक पर सवार होकर घर-घर दस्तक दी। बाइक पर उनके साथ पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी भी सवार थे। उसके इस डोर टू डोर अभियान का भी मतदाताओं पर असर पड़ा।
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