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Uttarakhand: गैस संकट के बीच फिर सुलगी कोयले और लकड़ी की भट्टी, लोगों को पुराने दिनों की याद दिला रही

संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: Renu Saklani Updated Sat, 21 Mar 2026 05:58 PM IST
सार

गैस संकटके बीच एक बार फिर कोयले व लकड़ी की भट्टी सुलग रही है। खाना बनाने के लिए कोयले और लकड़ी की मांग में तेजी आई है।

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Gas Crisis Surge in Demand for Coal and Wood for Cooking Uttarakhand Rishikesh News
कोयले और लकड़ी की मांग में तेजी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

रसोई गैस की किल्लत का असर अब कोयला और लकड़ी के बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गैस की कमी के चलते होटल, ढाबा संचालक और हलवाई फिर से पारंपरिक साधनों की ओर लौट रहे हैं। खाना बनाने के लिए कोयले और लकड़ी के चूल्हों (भट्टियों) की मांग तेजी से बढ़ गई है।

लकड़ी व्यापारी सरदार गोविंद सिंह ने बताया कि उनकी टाल पर अब छोटे-बड़े सभी प्रकार की लकड़ी तेजी से बिक रही है। हालात यह हैं कि चीरान के बाद बचने वाले छोटे-छोटे टुकड़े भी खत्म हो जा रहे हैं। मध्यम वर्ग के लोग शाम के समय खाना बनाने के लिए लकड़ी खरीद रहे हैं, जबकि होटल और ढाबा संचालक भट्टियों के लिए लकड़ी के गुटके ले जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बढ़ती मांग के बावजूद ग्राहकों को राहत देने के लिए लकड़ी अभी भी पुराने दाम 15 रुपये प्रति किलो पर ही बेची जा रही है। वहीं कोयला व्यापारी गौरव अरोड़ा ने बताया कि फिलहाल पुराने स्टॉक को पुराने रेट पर ही बेचा जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में कीमतों में बढ़ोतरी तय है।

पहले 40 रुपये प्रति किलो मिलने वाला कोयला अब 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि बाहरी राज्यों से आने वाले कोयले के दाम बढ़ने के कारण यह वृद्धि करनी पड़ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि हार्ड कोक कोयला, जिसका उपयोग होटलों में तंदूर के लिए होता है, 40 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रहा है, जबकि जल्दी जलने वाला चारकोल कोयला 50 रुपये प्रति किलो में बिक रहा है।

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लकड़ी की बढ़ी मांग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

रसोई गैस की किल्लत ने एक बार फिर लोगों को पुराने दिनों की याद दिला दी है। खासकर मध्यम वर्ग के परिवार अब गैस सिलिंडर की कमी के चलते केरोसिन स्टोव और लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेने के लिए मजबूर हो गए हैं।

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कोयले की बढ़ी मांग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

शहर के कई इलाकों में लोग घरों में रखे पुराने स्टोव की साफ-सफाई कर उन्हें दोबारा उपयोग में ला रहे हैं, तो वहीं कुछ लोग बाजार से अधिक कीमत देकर नए स्टोव खरीद रहे हैं। गैस संकट का सीधा असर आम लोगों के घर के बजट पर पड़ रहा है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में गैस सिलिंडर आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन मध्यम वर्ग के लोगों को छोटे सिलिंडर ऊंचे दामों पर भरवाकर काम चलाना पड़ रहा है।

 

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लकड़ी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

मजबूरी में कई परिवार केरोसिन स्टोव में डीजल डालकर खाना बनाने जैसे जोखिम भरे तरीके भी अपना रहे हैं। झंडा चौक मेन बाजार के बर्तन व्यापारी ऋत्विक ने बताया कि पिछले दस वर्षों से गोदाम में पड़े स्टोव अब निकालकर रिपेयर कर बेचे जा रहे हैं। इनकी कीमत 600 से 1200 रुपये तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि स्टोव और डीजल भट्टी की मांग बढ़ने के बावजूद सप्लाई नहीं मिल पा रही है। बाहरी राज्यों के व्यापारियों का भी कहना है कि उनके पास ही पर्याप्त स्टॉक नहीं है।

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गैस सिलेंडर का इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान - फोटो : Istock

डीजल भट्टी पहले करीब 7 हजार रुपये में मिलती थी। अब वह 25 हजार रुपये तक पहुंच गई है। होटल व्यवसायियों को भी मजबूरी में तीन गुना कीमत चुकाकर इन्हें खरीदना पड़ रहा है। रसोई गैस की किल्लत ने आम जनजीवन को प्रभावित करते हुए लोगों की रसोई और बजट दोनों को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है।

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