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शोध में हिमालय को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, वैज्ञानिकों ने नौ राज्यों में जताई बड़े खतरे की आशंका

Mon, 10 Sep 2018 04:44 PM IST
अरविंद सिंह/अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 10 Sep 2018 04:44 PM IST
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Himalaya diwas 2018 water source continuous dry in Himalayan region
himalaya

नीति आयोग के निर्देश पर हिमालय को लेकर हुए शोध में वैज्ञानिकों ने एक बड़े खतरे की आशंका जताई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिमालयी क्षेत्रों में स्थित 50 लाख से अधिक जलस्रोतों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ  हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया है कि हिमालयी क्षेत्र में स्थित झरने सूख रहे हैं, जिसका असर इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर भी दिखाई देने लगा है।

Himalaya diwas 2018 water source continuous dry in Himalayan region
niti ayog

नीति आयोग के निर्देश पर दून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ  हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में पाया है कि उत्तराखंड समेत देश के सभी पर्वतीय राज्यों में 30 फीसदी जलस्रोत सूख गए हैं जबकि 45 फीसदी जलस्रोत सूखने के कगार पर हैं। इस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के मुताबिक दुनिया के तमाम हिमालयी क्षेत्रों में 50 लाख से अधिक जलस्रोत हैं। इसमें से 30 लाख जलस्रोत इंडियन हिमालयन रीजन में स्थित हैं।

Himalaya diwas 2018 water source continuous dry in Himalayan region
Wadia Institute of Himalayan Geology

जो हिमालयी राज्यों उत्तराखंड, जम्मू व कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड के अलावा असम व पश्चिम बंगाल के पर्वतीय इलाकों में स्थित हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक पर्वतीय राज्यों की 60 फीसदी आबादी इन्हीं जलस्रोतों पर आश्रित है। ऐसे में यदि आने वाले समय में जलस्रोतों के सूखने को रोकने के  लिए कारगर कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति भयावह हो सकती है। इससे निपटना केंद्र और राज्य सरकारों के लिए आसान नहीं होगा। संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तराखंड के 16000 गांवों में से 600 गांव ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जहां झरनों से जलापूर्ति होती है लेकिन इन जलस्रोतों के सूखने के चलते इन गांवोें में रहने वाले ग्रामीणों को पलायन करना पड़ेगा।

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water

संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक नीति आयोग की ओर से टास्क फोर्स का गठन कर सभी पर्वतीय राज्यों में गंभीरता से अध्ययन कराया जाए। झरनों के ‘कैचमेंट एरिया’ की स्टडी होने के साथ ही इन जलस्रोतों के रिचार्ज करने के तरीकों पर काम किया जाए। वैज्ञानिकों के मुताबिक सभी पर्वतीय राज्यों में वर्षा जल को पहाड़ों में ही रोकने के लिए नीतियां बनायी जाए।

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Himalaya diwas 2018 water source continuous dry in Himalayan region
research

हिमालयी क्षेत्रों में जलस्रोत सूख रहे हैं। अध्ययन में यह बात सामने आई है। इस संबंध में रिपोर्ट तैयार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जरिये नीति आयोग को भेजी जा रही है। फिलहाल चकराता क्षेत्र में कई जगहों पर नए सिरे से अध्ययन किया जा रहा है। हिमालयी क्षेत्र में स्थित जलस्रोतों को सूखने से रोकने को लेकर यदि कारगर नीतियां नहीं बनाई गई तो भविष्य में समस्या विकट हो सकती है जिससे पार पाना आसान नहीं होगा।
- डॉ. समीर तिवारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी

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