अंधेरी रात और खौफनाक मंजर, जिसने भी देखा उसकी रूह कांप गई। चारों तरफ कंकाल ही कंकाल और आस पास भी कोई नहीं, ऐसा भयावन नजारा उस महाप्रलय का साक्षी था।
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त्रियुगीनारायण-केदारनाथ ट्रेक पर किमी 6 से 14 के बीच मिले कंकालों पर लिपटे कपड़े, आज भी सुरक्षित।
- फोटो : amar ujala
16/17 जून 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद से अब तक 645 कंकाल मिल चुके हैं। संभावना है कि यदि खोजबीन की जाए तो और कंकाल मिल सकते हैं।
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त्रियुगीनारायण-केदारनाथ ट्रेक पर किमी 6 से 14 के बीच मिले कंकालों पर लिपटे कपड़े, आज भी सुरक्षित।
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आपदा के बाद गौरीकुंड, त्रियुगीनारायण और चौमासी क्षेत्र से केदारनाथ तक करीब सवा महीने चले अभियान में सेना, एसडीआरएफ व पुलिस जवानों को इन स्थानों पर 600 कंकाल मिले थे।
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कंकाल
- फोटो : concept photo
तब सरकार ने इस अभियान को यह कहकर बंद कर दिया था कि अब पूरे क्षेत्र में कोई भी मृत नहीं हैं, लेकिन वर्ष 2015 को कपाट खुलने के एक सप्ताह बाद ही केदारनाथ में मंदाकिनी नदी किनारे दो कंकाल और मिल गए।
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Skeletons found in Kedar Valley
- फोटो : AmarUjala
बाद में भी तीन कंकाल केदारपुरी में मिले थे। बीते वर्ष 8 अक्तूबर को हिटो केदार अभियान के तहत त्रियुगीनारायण-केदारनाथ ट्रेकिंग रूट पर ट्रेकर्स ने 50 से अधिक कंकाल होने की बात कही थी। 13 अक्तूबर को शासन ने भी माना कि वहां कंकाल हैं।