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एशियन चैंपियनशिप 2018 में तिरंगा लहराने के बाद अब इस पर है लक्ष्य सेन की नजर

Mon, 23 Jul 2018 08:49 AM IST
दीप जोशी, अमर उजाला, अल्मोड़ा
दीप जोशी, अमर उजाला, अल्मोड़ा Updated Mon, 23 Jul 2018 08:49 AM IST
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lakshya sen wins gold in asian junior badminton championship interview
lakshya sen

जकार्ता में भारतीय तिरंगा लहराकर अल्मोड़ा के लाल लक्ष्य ने उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश का नाम रोशन किया है। इस शानदार उपलब्धि के बाद लक्ष्य की नजर इस साल अक्तूबर में होने जा रहे यूथ ओलंपिक और 2020 में ओलंपिक में सोना लाने पर है। लक्ष्य देश के उन टॉप खिलाड़ियों में शुमार हैं, जिनसे दो साल बाद होने जा रहे ओलंपिक में पदक की उम्मीद की जा रही है।


 

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इसे देखते हुए भारत सरकार विशेष प्रशिक्षण के तौर पर उन्हें 50 हजार रुपये प्रति माह स्कॉलरशिप भी दे रही है। इसके अलावा ओलंपिक में उनके पदक लाने की संभावना देखते ओलंपिक गोल्ड स्वैस्ट की मदद से उन्हें प्रकाश पादुकोण अकादमी में पिछले सात साल से खास प्रशिक्षण भी मिल रहा है। उत्तरांचल बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव बीएस मनकोटी ने बताया कि लक्ष्य जकार्ता में संपन्न हुई एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप के बाद सीधे अल्मोड़ा पहुंचेंगे। यहां आने पर उनका भव्य स्वागत और सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। 

 
 
lakshya sen wins gold in asian junior badminton championship interview
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लक्ष्य सेन दादा सीएल सेन को अल्मोड़ा में बैडमिंटन का भीष्म पितामह कहा जाता है। उन्होंने कुछ दशक पहले अल्मोड़ा में बैडमिंटन की शुरुआत की और एक से बढ़कर एक खिलाड़ी अल्मोड़ा से निकलकर देश और दुनिया के पटल पर छा रहे हैं। लक्ष्य के पिता डीके सेन बैडमिंटन के जाने-माने कोच हैं और वर्तमान में प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं। पिता की देखरेख में लक्ष्य ने होश संभालते ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया और वह चार साल की उम्र में स्टेडियम जाने लगे। छह-सात साल की उम्र में ही उनका खेल देखकर लोग हैरान हो जाते थे। 
 

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लक्ष्य पिछले साल अगस्त में खेली गई बुल्गेरिया इंटरनेशनल सीरीज और हैदराबाद इंटरनेशनल सीरीज के विजेता रहे। हाल के वर्षों में वह कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीत चुके हैं। उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए ओलंपिक गोल्ड क्वैस्ट ने उन्हें विशेष प्रशिक्षण के लिए चुना और पिछले साढ़े सात साल से वह बंगलूरी में प्रकाश पादुकोण एकेडमी में प्रशिक्षण ले रहे हैं, जहां खुद प्रकाश पादुकोंण भी उन्हें टिप्स देते हैं। लक्ष्य की दसवीं तक की पढ़ाई अल्मोड़ा के बीयरशिवा स्कूल में ही हुई। 
 

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जकार्ता एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतने के बाद लक्ष्य सेन ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में बताया कि अब उनका लक्ष्य इस साल अक्तूबर में अर्जेंटीना में होने जा रहे यूथ ओलंपिक और उसके बाद 2020 के ओलंपिक खेलों में भारत को पदक दिलाना है। लक्ष्य ने कहा कि 2020 में होने वाले ओलंपिक को देखते हुए अब उनका फोकस सीनियर प्रतियोगिताओं में रहेगा। वह चाहेंगे कि भविष्य में होने वाली राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सीनियर प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करके अपनी रैंकिंग को और आगे बढ़ाएं।  

 
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