दिल्ली में विधानसभा चुनावों के नतीजों ने आम आदमी पार्टी को न सिर्फ चौंका दिया है बल्कि चंद दिनों बाद होने वाले एमसीडी चुनाव से पहले उनके लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
ये हैं वो 10 कारण जिसने 2 साल में ही दिल्ली में डुबो दी केजरीवाल की लुटिया
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2- शुंगलू कमिटी की रिपोर्ट से आप की किरकिरी- एमसीडी चुनाव और उपचुनाव से ठीक पहले शुंगलू कमिटी की रिपोर्ट का बाहर आना आम आदमी पार्टी के लिए डूबते जहाज में छेद की तरह साबित हुआ। शुंगलू कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ कह दिया है कि आप ने पिछले दो साल में सिर्फ अपनी मनमानी की है। उन्हें किसी भी मामले में एलजी की सहमति नहीं ली और किसी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
3 16000 की थाली ने डुबोई आप की लुटिया- चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए आम आदमी पार्टी की एक सलाना जलसे का एक ऐसा बिल जनता के सामने रख दिया जिसने आम आदमी पार्टी की छवि पर ही सवालिया निशान खड़ा कर दिया। इस बिल में दिखाया गया है कि इस जलसे में मेहमानों के लिए मंगाई गई एक-एक थाली की कीमत लगभग 12 से 16 हजार रुपए थी। जनता के धन पर सरकार की ऐश लोगों को पसंद नहीं आई और यह भी पार्टी के खिलाफ गया।
4 विज्ञापन पर खर्च दिए 97 करोड़- आम आदमी पार्टी पर लगातार यह आरोप लगता रहा है कि उसने दिल्ली की जनता की गाढ़ी कमाई की बड़ी मात्रा अपने सरकार के विज्ञापन पर खर्च कर दिए। आम आदमी पार्टी ने पिछले दो साल में सरकारी खजाने के 97 करोड़ रुपए अखबार, टीवी और विभिन्न माध्यमों पर विज्ञापन देने में ही खर्च कर दिए। निश्चित ही दिल्ली की जनता को यह बात पसंद नहीं आई कि जिन पैसों को शहर के विकास के लिए खर्च करना था वो पार्टी के एड पर खर्च हुए।