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करोल बाग होटल अग्निकांड: 6 माह पहले ही मिली थी नौकरी, पढ़ें उत्तराखंड के तारा सिंह की कहानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 13 Feb 2019 12:18 AM IST
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विलाप करते हुए मृतक के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली के करोल बाग स्थित अर्पित पैलेस होटल में आग से बचने के लिए जो दो लोग खिड़की से नीचे कूदे थे, उनमें एक शख्स था तारा सिंह। तारा सिंह होटल में बतौर रसोइया के रुप में तैनात था। छह माह पहले ही उसे यहां नौकरी मिली थी लेकिन उसके परिवार की खुशियां ज्यादा दिन ठहर न सकीं। मंगलवार सुबह जब होटल में आग लगी तो तारा सिंह रेस्टोरेंट के पास ही थे।
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विलाप करते हुए परिजन
- फोटो : अमर उजाला
आग को चारों तरफ बढ़ता देख वह अपने बचाव के लिए नीचे की ओर दौड़ पड़े थे। इसके बाद उन्होंने ही होटल की एक खिड़की को खोला था। जैसा कि प्रत्यक्षदर्शियों ने तारा सिंह के भाई सुरेंद्र को बताया। घटना के बाद लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में मृत घोषित होने के बाद पोस्टमार्टम गृह पहुंचे सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके भाई ने काफी देर तक बचाव के लिए आवाज लगाई थी, लेकिन आखिर में उन्होंने खिड़की से कूदने का ही विकल्प बेहतर समझा।
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मृतक का बच्चा
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार शाम को पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने तारा सिंह का शव परिजनों को सौंप दिया। सुरेंद्र का कहना था कि तारा सिंह अपनी नौकरी को लेकर बेहद खुश था। उसे खाने-पीने से बेहद लगाव था। वह चाइनीज भोजन अच्छे से पका लेता था। चंद ही दिनों में होटल आने जाने वालों को उसका खाना बेहद पसंद भी आने लगा था।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
अक्सर वह घर आने के बाद अपने भाईयों से ये सब बातें साझा किया करते थे। तारा सिंह अपने तीनों भाईयों के साथ दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन स्थित वजीर नगर में रह रहे थे।
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विलाप करता बच्चा
- फोटो : अमर उजाला
उनके बड़े भाई सुरेंद्र बिलखते हुए कह रहे थे, मेरे भाई, अब मैं गांव किस मुंह से जाऊंगा? सबको कैसे बताऊंगा, तू मुझे छोड़कर चला गया? काश मैं वहां आ जाता? परिवार पर टूटे इस अपार दुख को देख लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में मौजूद अन्य मरीज और तिमारदार भी सदमे में थे। तारा सिंह के मासूम बच्चों को बिलखता देख हर कोई भगवान की इस नियति को कोस रहा था।
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