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Kamal Death Case: सरकार बदली, सिस्टम वही, आंकड़े चीख रहे हैं, सिस्टम बहरेपन पर कायम; हादसों की लंबी सूची
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 07 Feb 2026 02:28 PM IST
सार
नोएडा में इंजीनियर की मौत के बाद अब दिल्ली में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है। दिल्ली में जल बोर्ड की ओर से खोदे गए गड्ढे में गिरने से बाइक सवार एक युवक की मौत हो गई। मदद न मिलने पर युवक ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।
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delhi accident
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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दिल्ली में सरकारें बदलती रहीं, घोषणाएं बदलती रहीं लेकिन सिस्टम जस का तस बना रहा। नोएडा के सेक्टर-150 में निर्माणाधीन बेसमेंट में डूबकर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत और उसके कुछ दिन बाद जनकपुरी में गड्ढे में गिरकर एचडीएफसी में कॉल सेंटर में काम करने वाले कमल की जान जाना।
दोनों घटनाएं अलग-अलग हादसे नहीं हैं। ये दिल्ली-एनसीआर के बुनियादी ढांचे की बदहाली और प्रशासनिक लापरवाही की एक ही कहानी के दो अध्याय हैं। जनकपुरी में जिस जगह कमल की मौत हुई, वहां दिल्ली जल बोर्ड की ओर से गड्ढा खोदा गया था। लेकिन न बैरिकेडिंग थी, न चेतावनी बोर्ड, न रात में कोई रोशनी। बृहस्पतिवार रात कमल उसी गड्ढे में गिरा और उसकी जान चली गई। सिस्टम ने फिर साबित कर दिया कि सुरक्षा इंतजाम कागजों तक सीमित हैं।
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जल बोर्ड के गड्ढे में गिरा बाइक सवार, मदद न मिलने से तपड़कर मौत, बाइक निकालती टीम
- फोटो : अमर उजाला
आंकड़े चीख रहे हैं, सिस्टम बहरेपन पर कायम
राजधानी दिल्ली में खुले नालों, सड़क धंसने और मानसून के दौरान जलभराव के कारण औसतन हर महीने चार लोगों की मौत हो रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच ऐसे हादसों में 89 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद न तो जमीनी स्तर पर हालात सुधरे और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई स्थायी और सख्त कार्रवाई हो सकी।
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जल बोर्ड के गड्ढे में गिरा बाइक सवार, मदद न मिलने से तपड़कर मौत
- फोटो : अमर उजाला
राजस्व विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इन मौतों के बाद न तो अधिकांश मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है और न ही पीड़ित परिवारों तक समय पर मुआवजा पहुंचता है। जांच समितियां बनती हैं, फाइलें चलती हैं, लेकिन परिवार न्याय की आस में भटकते रहते हैं।
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जल बोर्ड के गड्ढे में गिरा बाइक सवार, मदद न मिलने से तपड़कर मौत, बाइक निकालती टीम
- फोटो : अमर उजाला
बहुविभागीय जिम्मेदारी जवाबदेही सिशून्य...
दिल्ली में नालों और सड़कों की देखरेख एक नहीं, बल्कि कई विभागों के हाथ में है। लोक निर्माण विभाग, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, दिल्ली नगर निगम, (एमसीडी), दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड और दिल्ली जल बोर्ड। इतने सारे विभाग हैं कि हादसा होते ही सबसे पहले यही तय नहीं हो पाता कि किस विभाग की चूक थी।
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जल बोर्ड के गड्ढे में गिरा बाइक सवार, मदद न मिलने से तपड़कर मौत, बाइक निकालती टीम
- फोटो : अमर उजाला
इसी भ्रम का फायदा उठाकर विभाग और अधिकारी अक्सर बच निकलते हैं। कई मामलों में महीनों तक विभागों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चलता रहता है और अंत में मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। करीब डेढ़ साल पहले गाजीपुर में खुले नाले में गिरने से मां-बेटे की मौत के बाद डीडीए और एमसीडी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। बाद में नाला एमसीडी का निकला, लेकिन तब तक न कार्रवाई बची और न जवाबदेही।
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