देश में पहली बार डेढ़ वर्षीय मासूम के लिवर से इंडोस्कॉपी तकनीक से छह इंच का कीड़ा निकाला गया है। इससे पहले ब्राजील में इतने छोटे बच्चे के लिवर से इंडोस्कॉपी तकनीक से कीड़ा निकालने का मामला सामने आया था।
इस मासूम के मुंह और मल से निकलते थे कीड़े, देश में पहली बार हुआ ऐसा इलाज
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जिस मासूम के लिवर से कीड़ा निकाला गया है उसकी हालत में अब सुधार हो रहा है और सोमवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सर्जरी में कुछ दिनों की और देरी हो जाती, तो बच्चे की जान भी जा सकती थी। दिल्ली सरकार के जीबी पंत अस्पताल में डेढ़ वर्षीय मोहम्मद दाउद को इलाज के लिए लाया गया। अल्ट्रासाउंड में पता चला कि उसके लिवर में एक कीड़ा है। कीड़ा पेट और आंत से होते हुए लिवर में चला गया था। लिवर से कीड़े को निकालने के लिए ओपन सर्जरी के अलावा इंडोस्कॉपी एक विकल्प था। अस्पताल में इतने छोटे बच्चे के लिए इंडोस्कॉपी संसाधन उपलब्ध नहीं थे, लेकिन चिकित्सकों ने ओपन सर्जरी की जगह इंडोस्कॉपी से ही सही कीड़े को निकालने की तैयारी की।
विभाग के प्रमुख प्रो. एके पुरी के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने वयस्कों पर इस्तेमाल होने वाले 13 एमएम के इंडोस्कॉपी का इस्तेमाल बच्चे पर किया। हालांकि बच्चे के लिए 9 एमएम का इंडोस्कॉपी इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अनुभवी चिकित्सकों ने इसे चुनौती के तौर पर लिया व 20 मिनट के अंदर इस प्रक्रिया को पूरा किया और बच्चे के लिवर से छह इंच का एक बड़ा कीड़ा निकाला। डॉ. पुरी ने बताया कि यदि कीड़े को नहीं निकाला जाता और कीड़े की मौत हो जाती तो लिवर के अंदर संक्रमण हो जाता और इससे बच्चे की भी मौत हो जाती।
मल और मुंह से कीड़े निकलते थे
दाउद के माता-पिता मो. जाकीर और फरहीन ने बताया कि बच्चे को एक महीने से दिक्कत हो रही थी। पेट फूल गया था और दर्द की वजह से रोता था। मल से और मुंह से कीड़े निकलते थे। पहले चाचा नेहरू चिकित्सालय ले गए, वहां के चिकित्सकों ने उसे जीबी पंत अस्पताल रेफर कर दिया।
विश्व में एक करोड़ 20 लाख लोग शिकार
यह पेट में होने वाला आम कीड़ा ही होता है, लेकिन जब कीड़े मारने की दवा नहीं खाई जाती, तब इस कीड़े के लिवर में जाने की संभावना होती है। विश्व में करीब एक करोड़ 20 लाख लोग इस कीड़े के शिकार होते हैं। सबसे ज्यादा मामले दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में होते हैं। भारत, बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे देशों में इसके मरीजों की संख्या ज्यादा है। भारत में जम्मू-कश्मीर, आसाम और गोवा में इसके मरीज ज्यादा हैं।