गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ...
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यमुना किनारे पहुंचने के बाद लोगों ने जहां बप्पा की पूजा अर्चना की, वहीं उसके बाद उनका विसर्जन भी किया। इसके बाद सपरिवार यमुना में डुबकी लगाने के बाद सुख-समृद्घि की कामना भी की गई। इनसब के बीच दिल्ली के खुशनुमा मौसम ने भक्तों के मन में मधुर रस भी घोल दिया। बारिश की मनमोहक बौछारों के बीच दिल्ली की सड़कों पर गुलाल से होली खेलते हुए लोग अपने गणपति को लेकर यमुना की ओर बढ़े जा रहे थे।
कोई वाहन पर तो कोई ठेले पर। कई लोग तो अपने घर से बप्पा को लेकर यमुना तक पैदल ही निकल पड़े थे। ढ़ोल और ताशों की मधुर ध्वनि के साथ लोग झूमते-नाचते आगे बढ़ रहे थे। कालिंदी कुंज घाट पर सुबह से ही भगवान गणेश की मूर्तियों को लेकर विसर्जन के लिए पहुंचने लगे थे। घाट पर पर्याप्त लाइटिंग, सीसीटीवी आदि की व्यवस्था की गई थी। विसर्जन से पहले लोगों ने भगवान गणेश की पूजा की।
लक्ष्मी नगर में श्री गणेश सेवा मंडल द्वारा गणेश उत्सव पर विसर्जन के दौरान एक अनोखी पहल की गई। जिसमें दिल्ली का महाराजा के नाम से मशहूर श्रीगणेश की प्रतिमा को यमुना में नहीं विसर्जित किया गया। पर्यावरण की दृष्टि से इस बार भी श्रीगणेश की फाइबर की मूर्ति बनाई गई थी, जिसे पूजा स्थल डीडीए, मिनी स्टेडियम, बैंक एंकलेव से लेकर मंगल बाजार, लक्ष्मीनगर, विकास मार्ग होते हुए दोबारा पूजा स्थल तक लाया गया, जहां स्थानीय लोगों द्वारा छोटे गणेशजी की प्रतिमाओं को विशाल कुंड में विसर्जित किया गया।