कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को पस्त करने में थलसेना के साथ ही वायुसेना ने भी अभूतपूर्व योगदान दिया था। वायुसेना के एक लड़ाकू विमान ने पाकिस्तान को इतनी गहरी चोट दी थी कि पाकिस्तान उसे 'चुड़ैल' कहता था। अब आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के इस 'बहादुर' से पाकिस्तान कितना घबराया हुआ होगा।
Kargil War: युद्ध में आसमान से आग बरसाता था 'बहादुर' और थर्रा उठता था पाकिस्तान, डर के मारे कहता था 'चुड़ैल'
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जब यह विमान जमीन की सतह के करीब उड़ान भरता था तब कोई भी रडार बड़ी मुश्किल से इसकी पहचान कर पाता था। इसकी आवाज दुश्मनों के दिलों में खौफ पैदा करती थी। हालांकि भारतीय वायुसेना में अपने 38 साल के सफर के दौरान इस लड़ाकू विमान ने कई उतार-चढ़ाव भी देखें हैं।
मिग-27 अपने जमाने का सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमान था। यह हवा से जमीन पर निशाना लगाने में इतना माहिर था कि दुश्मन को भनक लगने से पहले यह उसे नेस्तनाबूत कर देता था। यह फाइटर जेट 1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की उड़ान भरने में सक्षम था। इसके अलावा यह चार हजार किलोग्राम के वॉरहेड को ले जा सकता था।
साल 1981 में भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान और चीन से निपटने के लिए विशेष किस्म के तेज लड़ाकू विमानों की जरूरत थी। उस समय पश्चिमी देश जैसे अमेरिका, ब्रिटेन पाकिस्तान के करीबी थे और वे भारत को अपने उन्नत लड़ाकू विमान नहीं देने वाले थे। उस समय रूस ने अपने मिग 27 विमानों को भारत को बेचने की पेशकश की।
रूस ने यहां तक कहा कि वे इस विमान को बनाने का लाइसेंस भी भारत को देगा। इसके बाद 1985 में औपचारिक रूप से यह विमान भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ। रूस से लाइसेंस मिलने के बाद हिंदुस्तान एयरोटॉनिक्स लिमिटेड ने मिग 27 विमानों के 165 यूनिट का निर्माण किया। इसके अलावा एचएएल ने 86 विमानों को अपग्रेड भी किया।