फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

बिल्डिंग हादसा: बस बिखरे सपनों और टूटी उम्मीदों का मलबा है बाकी

Fri, 20 Jul 2018 12:40 PM IST
भूपेंद्र कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
भूपेंद्र कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Fri, 20 Jul 2018 12:40 PM IST
विज्ञापन
shahberi building collapse, know all about this case
building collapse shaberi - फोटो : अमर उजाला

उनके चेहरों पर अब अपना आशियाना खरीदकर उसमें रहने का उल्लास नहीं झलकता। अब दिखती है तो बस हताशा की गहरी परत। अपनी खून पसीने की कमाई लगाकर जो आशियाना खरीदा उसके उजड़ने का खौफ। जिनका नहीं उजड़ा उन्हें भविष्य की चिंता। क्या अब भी हम यहां पहले की तरह रह पाएंगे? क्या हमारा फ्लैट सुरक्षित है? क्या यह इमारत अवैध है जिसमें हम रह रहे हैं? क्या सरकार हमें मुआवजा देगी? ऐसे ही ढेरों सवाल हादसे में मकान गंवाने वालों के मन में तो हैं ही, जो दूसरी इमारतों में लोग रह रहे हैं वे भी चिंता में हैं। भविष्य को लेकर अनिश्चय। आइये देखते हैं वक्त ने कैसे शाहबेरी को दो दिन में बदलकर रख दिया।

गुबार में गरजती मशीनें

shahberi building collapse, know all about this case
building collapse shaberi - फोटो : अमर उजाला

गरीबों का ग्रेटर नोएडा इसका अहसास गौड़ चौक से एक किलोमीटर आगे चौड़ी सड़क से एक गली नुमा कच्चे रास्ते पर जाने से होता है। मल्टी स्टोरी अपार्टमेंट की जगह यहां अचानक शाहबेरी गांव शुरू हो जाता है। गड्ढों भरी सड़क के दोनों तरफ कच्ची पक्की इमारते हैं। सहसा छह सात मंजिला अपार्टमेंट दिखने लगते हैं। गली में दोनों तरफ प्रापर्टी डीलर हैं जिन्होंने बोर्ड उतार दिए हैं। एक नौजवान कहता है, आप अंतर देखिये। दीवार दाईं तरफ क्रासिंग रिपब्लिक है तो बाईं तरफ महागुन अपार्टमेंट। इनमें दो बीएचके फ्लैट 50 से 60 लाख का मिलता है। और यहां महज 20-22 लाख में। हैं तो दोनों ही ग्रेटर नोएडा। जिनके पास ज्यादा पैसा नहीं वे ही यहां मकान लेते हैं। और साथ में जोखिम भी थोड़ा आगे जाने पर पुलिस बैरीकेड है।

हाथ लगाते ही झड़ता है प्लास्टर

shahberi building collapse, know all about this case
building collapse shaberi - फोटो : अमर उजाला

बस वहीं से अर्थ मूविंग मशीनों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगती है। मलबा हटाने का काम तेजी से चल रहा है। इसी मलबे में दफन हैं वे सपने और उम्मीदें जो लोगों ने सस्ते आशियाने के फेर में देखे थे। धूल का गुबार यहां छाया है। एक सिपाही कहता है यहीं थीं वे दो इमारतें। जिनमें से एक दूसरी पर गिर गई। क्या अभी कोई मलबे में बचा होगा? वह कुछ नहीं बोलता, दूर कहीं देखने लगता है। आसपास की छतों पर बहुत से लोग खड़े हैं। क्या देख रहे हैं...शायद एक सपने की मौत। जिसे बहुत से लोगों ने अलग-अलग देखा लेकिन अंत एक सा हुआ।

विज्ञापन
विज्ञापन

मर्सीडीज, बिटौरा और नीम का पेड़

shahberi building collapse, know all about this case
building collapse shaberi - फोटो : अमर उजाला

समय के साथ चल रही जंग एनडीआरएफ के कर्मचारियों को एक पल का भी आराम नहीं। मशीनें कहां लगानी हैं कहां मलबे में कोई दबा हो सकता है इस सब पर नजर। नारंगी ड्रेस में वे अलग ही नजर आते हैं। कभी लोगों की भीड़ के बीच रास्ता बनाते तो कभी मशीनों को इधर से उधर ले जाते। पूछा तो एक जवान बोला, बस हम जल्दी से इस काम को निपटाना चाहते हैं।

विज्ञापन
shahberi building collapse, know all about this case
building collapse shaberi - फोटो : अमर उजाला

इसी बीच एक ट्रक में उनका भोजन आ जाता है। लेकिन काम नहीं रुकता, बारी से बारी से जवान लंच कर लेते हैं। इसी जगह कई इमारतें हैं जो ठीक वैसी ही हैं जैसी मंगलवार रात गिरी थीं। उनमें से एक इमारत की बीम के पास एक युवक प्लास्टर पर हाथ रगड़ता है। भुरभुरा सीमेंट प्लास्टर छूटने लगता है। देखिये यही है सस्ते सामान की क्वालिटी। सस्ते के फेर में बिल्डर इतना खराब सामान लगाते हैं कि कभी भी कुछ हो सकता है। और शायद कुछ ऐसा ही मंगलवार रात हुआ।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed