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SC ने दिल्ली के असली बॉस की घोषणा की, लगा केजरीवाल सरकार को झटका

Fri, 03 Nov 2017 09:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 03 Nov 2017 09:37 AM IST
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supreme court reveals about the real boss of delhi, kejriwal government is shocked
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'आपकी चुनी हुई सरकार है। आप दिल्ली को चलाने वाले कानून का हिस्सा हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि आप कानून के दायरे में रहकर काम नहीं करना चाहते हैं।’ -सुप्रीम कोर्ट


सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संविधान के तहत पहली नजर में उपराज्यपाल (एलजी) ही दिल्ली के बॉस हैं। प्रशासनिक मामलों में दिल्ली सरकार के अधिकार सीमित हैं। किसी भी मामले पर सरकार और उपराज्यपाल के बीच मतभेद होने की स्थिति में मामले को राष्ट्रपति के पास भेजा जाना चाहिए। जब तक राष्ट्रपति की ओर से कोई निर्णय नहीं ले लिया जाता तब तक उपराज्यपाल जो जरूरी हो, उसके अनुसार काम कर सकते हैं, लेकिन उपराज्यपाल मसले को दबा कर नहीं रख सकते।

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arvind kejriwal

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा, ‘उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच किसी मामले में मतभेद होने पर उपराज्यपाल को अपने अधिकार का इस्तेमाल करने में निष्पक्षता का तत्व दिखाना चाहिए। संविधान के तहत उपराज्यपाल को प्रमुखता दी गई है।’

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CM Arvind Kejriwal

पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच का टकराव संविधान के अनुच्छेद-239 एए (1991 में किए गए 69वें संशोधन) को लेकर है जो साफ-साफ कहता है कि किसी मामले में मतभेद होने की स्थिति में उपराज्यपाल की ओर से लिया गया निर्णय अंतिम होता है। पीठ ने कहा कि भूमि, पुलिस और कानून-व्यवस्था को छोड़ दिल्ली सरकार अन्य विषयों पर निर्णय ले सकती है लेकिन ये निर्णय भी वह संसद के द्वारा पारित कानूनों के तहत ही ले सकती है।

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अरविंद केजरीवाल

पीठ की प्रथम दृष्टया टिप्पणियों से दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मण्यम ने सहमति जताते हुए कहा कि संविधान और कानून के प्रावधानों में ‘तालमेल और सामंजस्य होना चाहिए। इस पर पीठ ने सरकार से कहा, आप तालमेल और सामंजस्य की बात करते हैं। आपकी चुनी हुई सरकार है। दिल्ली को चलाने वाले कानून का हिस्सा हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि आप कानून के दायरे में रहकर काम नहीं करना चाहते हैं।’

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अरविंद केजरीवाल

...तो चुनी हुई सरकार का क्या मतलब
दिल्ली सरकार के वकील सुब्रह्मण्यम ने कहा, ‘उपराज्यपाल सर्वोच्च हैं, लेकिन उनके वीटो पावर के सामने मुख्यमंत्री व मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करने के सिद्धांत को प्रभावहीन नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा नहीं होगा तो लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार और उसके मंत्रिमंडल का क्या मतलब है।’ उन्होंने यह भी कहा कि हम संसद की सर्वोच्चता को लेकर संघर्ष नहीं कर रहे हैं। 

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